
रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने युवाओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और असफलताओं से सीख लेने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि जीवन में असफलता से घबराने के बजाय उसके कारणों को समझना चाहिए और अपनी गलतियों से सीखकर फिर से प्रयास करना चाहिए। युवाओं को अपनी प्रतिभा और क्षमता पर भरोसा रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ व्यक्तिगत सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी होना चाहिए।
राज्यपाल रमेन डेका मंगलवार को बिलासपुर स्थित पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ के सप्तम दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने समारोह की अध्यक्षता करते हुए विद्यार्थियों को जीवन में सफलता के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को भी समझने की सलाह दी। इस अवसर पर पिछले पांच वर्षों के दौरान विश्वविद्यालय के 24 हजार 800 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर और डिप्लोमा की उपाधियां प्रदान की गईं।
बिलासपुर में आयोजित विश्वविद्यालय के सप्तम दीक्षांत समारोह में कई जनप्रतिनिधि और शिक्षा जगत की प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव, विधायक धरमलाल कौशिक और सुशांत शुक्ला, महापौर पूजा विधानी, हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष कैलाश चंद्र शर्मा, नैक अध्यक्ष नागेश्वर राव और विश्वविद्यालय के कुलपति वीरेंद्र कुमार सारस्वत मौजूद रहे।
समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की उन्नत आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही स्मारिका 'अभ्युदय' का विमोचन भी हुआ। विश्वविद्यालय की ओर से सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए एकलव्य विद्यालय देवपहरी के 311 विद्यार्थियों को बैग, स्वेटर, टिफिन और पानी की बोतलें वितरित की गईं।
राज्यपाल रमेन डेका ने उपाधि और पदक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की इस उपलब्धि के पीछे उनके माता-पिता, गुरुजनों और शिक्षण संस्थानों का महत्वपूर्ण योगदान है। दीक्षांत समारोह केवल डिग्री मिलने का अवसर नहीं है, बल्कि यह जीवन में नई ऊर्जा और नई जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है। उन्होंने कहा कि मुक्त विश्वविद्यालयों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। ये संस्थान दूर-दराज के इलाकों तक शिक्षा पहुंचाने और उन लोगों को पढ़ाई का अवसर देने का काम कर रहे हैं, जो किसी वजह से नियमित शिक्षण संस्थानों में दाखिला नहीं ले पाते।
राज्यपाल ने डिजिटल तकनीक और इंटरनेट के बढ़ते महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि इन माध्यमों ने ज्ञान तक पहुंच को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है। हालांकि, युवाओं को इनका इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए। तकनीक का सही उपयोग करते हुए अपनी विचारशक्ति और रचनात्मक क्षमता को विकसित करना जरूरी है।
रमेन डेका ने युवाओं को करियर और रोजगार के अवसरों को लेकर भी महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज रोजगार और आजीविका के कई नए क्षेत्र सामने आ रहे हैं। ऐसे में युवाओं को सबसे पहले अपनी रुचि और क्षमता को पहचानना चाहिए और फिर पूरी मेहनत के साथ उस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जीवन में अपना स्थान खुद बनाना पड़ता है। इसके लिए दूसरों की नकल करने या उनसे अपनी तुलना करने की जरूरत नहीं है। हर व्यक्ति की अपनी अलग प्रतिभा और पहचान होती है। युवाओं को अपनी इसी विशेषता पर विश्वास रखना चाहिए। राज्यपाल ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों पर अपनी इच्छाएं और अपेक्षाएं न थोपें। बच्चों की रुचि और प्रतिभा को समझकर उन्हें उसी दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। इससे वे अपनी क्षमता के मुताबिक बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
राज्यपाल रमेन डेका ने जीवन में आंतरिक संतुष्टि और संतुलन बनाए रखने को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं। इसलिए व्यक्ति को समय और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना आना चाहिए। उन्होंने युवाओं को डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने की सलाह दी। उनका कहना था कि समय का उपयोग ऐसे कामों में होना चाहिए, जिनसे जीवन और समाज दोनों को लाभ मिले। केवल तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय अपने आसपास की दुनिया और समाज के प्रति भी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए हमेशा बड़े स्तर पर काम करने की जरूरत नहीं होती। हर व्यक्ति अपने आसपास साफ-सफाई रखने, पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने जैसे छोटे-छोटे प्रयासों से भी बदलाव ला सकता है। उन्होंने युवाओं से ऐसा काम करने का आग्रह किया, जिसका मकसद केवल लेन-देन या व्यक्तिगत लाभ न होकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना हो।
समारोह में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने भी उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा और कौशल का इस्तेमाल समाज के विकास और उत्थान के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक पंडित सुंदरलाल शर्मा के नाम पर स्थापित यह विश्वविद्यालय उन लोगों के सपनों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जो नौकरी, कामकाज या दूसरी परिस्थितियों के कारण नियमित रूप से पढ़ाई नहीं कर पाते। मुक्त विश्वविद्यालय ऐसे विद्यार्थियों को शिक्षा से जुड़ने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने का अवसर देते हैं। अरुण साव ने विश्वविद्यालय को नैक की ओर से 'ए प्लस' ग्रेडिंग मिलने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को आगे बढ़ाने और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने की दिशा में विश्वविद्यालय लगातार काम कर रहा है।
कार्यक्रम में हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष कैलाश चंद्र शर्मा ने दीक्षांत भाषण दिया। वहीं, नैक अध्यक्ष नागेश्वर राव ने भी समारोह को संबोधित किया। इससे पहले विश्वविद्यालय के कुलपति वीरेंद्र कुमार सारस्वत ने स्वागत भाषण दिया और विश्वविद्यालय की उपलब्धियों के बारे में जानकारी साझा की। समारोह में विश्वविद्यालय की कार्य परिषद के सदस्य, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्रशासनिक अधिकारी, प्राध्यापक, विद्यार्थी, अभिभावक और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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