बस्तर की बेटी ने बदली किस्मत, 1.12 करोड़ की सूकर पालन परियोजना से खड़ा किया करोड़ों का कारोबार

Published : Jul 22, 2026, 03:13 PM IST
Pig Farming Success Story

सार

Pig Farming Success Story: बस्तर की ग्रेसी दुग्गा ने सरकारी सहायता और आधुनिक तकनीक से 1.12 करोड़ की सूकर पालन परियोजना स्थापित कर सफलता की मिसाल पेश की। जानिए ग्रेसी दुग्गा के आधुनिक सूकर पालन की सक्सेस स्टोरी।

Piggery Farming: सूकर पालन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ता हुआ लाभकारी व्यवसाय बन रहा है। कम लागत, अधिक प्रजनन क्षमता और मांस की लगातार बढ़ती मांग के कारण यह किसानों और युवाओं के लिए स्थायी आय का बेहतर माध्यम साबित हो रहा है। सूअर अन्य पशुओं की तुलना में तेजी से बढ़ते हैं। एक मादा सूअर एक बार में 8 से 12 पिगलेट्स को जन्म देती है, जो लगभग 45 से 60 दिनों में बिक्री के योग्य हो जाते हैं। छत्तीसगढ़ में भी कई युवा पारंपरिक रोजगार के बजाय आधुनिक तरीके से सूकर पालन को अपनाकर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के किंजोली गांव की रहने वाली बीएससी एग्रीकल्चर स्नातक ग्रेसी दुग्गा ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाया और आधुनिक सूकर पालन परियोजना स्थापित कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की।

Bastar Success Story: नौकरी छोड़ ग्रेसी दुग्गा ने चुना सूकर पालन व्यवसाय

ग्रेसी दुग्गा ने वर्ष 2023 में उत्तराखंड के देहरादून से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा या नौकरी की बजाय उन्होंने कृषि और पशुपालन क्षेत्र में अपना उद्यम शुरू करने का निर्णय लिया। उन्होंने सूकर पालन को इसलिए चुना क्योंकि बस्तर क्षेत्र में इसकी मांग लगातार बढ़ रही थी, जबकि व्यावसायिक स्तर पर इस क्षेत्र में अभी भी कम लोग काम कर रहे हैं। उनका उद्देश्य वैज्ञानिक तरीके से बड़ा फार्म स्थापित कर युवाओं के लिए रोजगार और प्रेरणा का उदाहरण बनना था। भारत सरकार भी सूकर पालन को बढ़ावा देने के लिए नेशनल लाइवस्टॉक मिशन जैसी योजनाएं संचालित कर रही है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को परियोजना लागत पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी उपलब्ध कराई जाती है।

Modern Pig Farming Project: सरकारी सहायता से बनी 1.12 करोड़ की आधुनिक इकाई

बड़े स्तर पर सूकर पालन फार्म स्थापित करने के लिए ग्रेसी को तकनीकी जानकारी और आर्थिक सहायता की आवश्यकता थी। पशु चिकित्सा विभाग ने परियोजना तैयार करने से लेकर तकनीकी मार्गदर्शन तक हर स्तर पर उनका सहयोग किया। विभाग की मदद से 1 करोड़ 12 लाख 10 हजार रुपये की आधुनिक सूकर पालन परियोजना तैयार की गई, जिसे केंद्र सरकार की नेशनल लाइवस्टॉक मिशन योजना के अंतर्गत मंजूरी मिली। अनुसूचित जनजाति वर्ग से पहली बार आवेदन करने पर ग्रेसी को योजना के तहत 30 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। उनका कहना है कि यदि सरकारी सहायता नहीं मिलती तो वह केवल 20 से 25 सूकरों के साथ छोटे स्तर पर काम शुरू कर पातीं। अनुदान मिलने से उन्हें आधुनिक सुविधाओं के साथ बड़े स्तर पर फार्म स्थापित करने का अवसर मिला।

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Scientific Pig Farming: आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन से मिली सफलता

पशुपालन विभाग के चिकित्सकों और कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में ग्रेसी के फार्म में तमिलनाडु से उन्नत नस्ल के सूकर लाए गए। फार्म में पशुओं के टीकाकरण, पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया। मई 2025 में फार्म की शुरुआत 110 प्रजनन योग्य सूकरों से हुई थी। इनमें 100 मादा और 10 नर सूकर शामिल थे। वैज्ञानिक देखभाल और बेहतर प्रबंधन के कारण जून 2026 तक फार्म में 202 वयस्क प्रजनन योग्य सूकर और लगभग 206 पिगलेट तैयार हो चुके हैं। वर्तमान में उनके फार्म में 400 से अधिक सूकर मौजूद हैं, जो इस परियोजना की सफलता को दर्शाते हैं।

Pig Farming Business: पहली बिक्री से ही हुई करीब 4 लाख रुपये की कमाई

ग्रेसी दुग्गा के फार्म से अब उन्नत नस्ल के पिगलेट्स की व्यावसायिक बिक्री भी शुरू हो चुकी है। उनके फार्म से रायपुर सहित अन्य स्थानीय बाजारों में सूकरों की आपूर्ति की जा रही है। हाल ही में उन्होंने 65 पिगलेट्स को 6 हजार रुपये प्रति पिगलेट की दर से बेचकर 3 लाख 90 हजार रुपये की आय अर्जित की। यह साबित करता है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर सूकर पालन एक सफल और लाभकारी व्यवसाय बन सकता है।

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Bastar Youth Inspiration: युवाओं के लिए बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

ग्रेसी दुग्गा की सफलता दिखाती है कि सही मार्गदर्शन, तकनीकी जानकारी और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर ग्रामीण क्षेत्र के युवा भी बड़े उद्यम स्थापित कर सकते हैं। पशु चिकित्सा विभाग का सहयोग, शासन की वित्तीय सहायता और ग्रेसी की मेहनत ने उनके सूकर पालन व्यवसाय को सफल बनाया है। आज उनका फार्म केवल एक व्यावसायिक मॉडल नहीं, बल्कि बस्तर के शिक्षित युवाओं के लिए कृषि और पशुपालन आधारित स्टार्टअप शुरू करने की प्रेरणा बन चुका है।

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