रामगढ़ महोत्सव 2026: रामलीला से कवि सम्मेलन तक, सरगुजा की विरासत ने बांधा समां

Published : Jun 30, 2026, 11:23 AM IST
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सार

रामगढ़ महोत्सव 2026 के पहले दिन रामलीला, जटायु मोक्ष नृत्य-नाटिका, कवि सम्मेलन और सरगुजिहा लोकनृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

रायपुर। सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को समर्पित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 का पहला दिन रंगारंग कार्यक्रमों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ यादगार बन गया। पूरे आयोजन में संस्कृति, साहित्य, लोककला और पारंपरिक विरासत का सुंदर समन्वय देखने को मिला। महोत्सव में आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों ने बड़ी संख्या में पहुंचे दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नई दिल्ली से आए कलाकारों की भव्य रामलीला, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय उदयपुर की छात्राओं की 'जटायु मोक्ष' नृत्य-नाटिका और कवि सम्मेलन मुख्य आकर्षण रहे।

रामलीला मंचन ने कराया भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन का सजीव दर्शन

नई दिल्ली के प्रसिद्ध कलाकारों ने भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन प्रस्तुत किया। कलाकारों के दमदार अभिनय, प्रभावशाली संवाद, आकर्षक वेशभूषा, भव्य मंच सज्जा और मधुर संगीत ने दर्शकों को त्रेतायुग का एहसास कराया। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के धर्म, सत्य, मर्यादा, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा जैसे आदर्शों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। पूरे मंचन के दौरान दर्शक कलाकारों की प्रस्तुति में पूरी तरह डूबे नजर आए और हर दृश्य के बाद तालियों की गूंज पूरे परिसर में सुनाई देती रही।

'जटायु मोक्ष' नृत्य-नाटिका ने भावुक कर दिया पूरा सभागार

महोत्सव के दौरान कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, उदयपुर की छात्राओं ने 'जटायु मोक्ष' पर आधारित भावपूर्ण नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। भगवान श्रीराम और जटायु के प्रसंग को छात्राओं ने बेहद संवेदनशील अभिनय और आकर्षक नृत्य के माध्यम से मंच पर जीवंत कर दिया।

पारंपरिक वेशभूषा, भावपूर्ण अभिव्यक्ति, उत्कृष्ट मंच संचालन और मधुर संगीत के साथ प्रस्तुत इस कार्यक्रम ने दर्शकों को भावुक कर दिया। कई दर्शकों की आंखें नम हो गईं और प्रस्तुति समाप्त होने के बाद देर तक तालियों की गूंज सुनाई देती रही। छात्राओं के आत्मविश्वास और प्रतिभा की सभी ने सराहना की।

कवि सम्मेलन में ओज, हास्य और सामाजिक सरोकारों की गूंज

रामगढ़ महोत्सव के पहले दिन आयोजित कवि सम्मेलन भी आकर्षण का केंद्र रहा। इसमें देश के प्रतिष्ठित कवियों ने ओज, वीर रस, श्रृंगार, हास्य-व्यंग्य और समसामयिक विषयों पर आधारित अपनी रचनाओं का पाठ किया। राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति, सामाजिक मुद्दों और मानवीय मूल्यों पर आधारित कविताओं ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया। वहीं हास्य-व्यंग्य की प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को आनंदमय बना दिया। कवियों की शानदार प्रस्तुति पर दर्शकों ने जोरदार तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया।

सरगुजिहा लोकनृत्य और लोकगीतों ने बिखेरा पारंपरिक संस्कृति का रंग

महोत्सव में लोकगीत, सरगुजिहा लोकनृत्य, करमा नृत्य, स्वागत गीत सहित कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। स्थानीय और क्षेत्रीय कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों के माध्यम से सरगुजा की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया।

नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की पहल

रामगढ़ महोत्सव का मुख्य उद्देश्य सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक धरोहर, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और साहित्यिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना है। साथ ही नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, इतिहास और लोक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास भी इस आयोजन के माध्यम से किया जा रहा है। महोत्सव के पहले दिन हुए भव्य आयोजन ने इस उद्देश्य को सफलतापूर्वक साकार करते हुए दर्शकों के बीच संस्कृति और विरासत के प्रति नई जागरूकता का संदेश दिया।

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