
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उनके सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र निर्माण में योगदान का उल्लेख करते हुए प्रदेशवासियों से ‘सेवा संकल्प अभियान’ से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपना जीवन जनसेवा, राष्ट्र निर्माण और गरीब कल्याण के लिए समर्पित किया है। उनके जन्मदिन से शुरू हुआ सेवा संकल्प अभियान सेवा की भावना को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने और राष्ट्र निर्माण में भागीदारी बढ़ाने का अवसर है।
मुख्यमंत्री गुरुवार, 17 सितंबर को बीरगांव के बुधवारी बाजार मैदान में आयोजित भगवान विश्वकर्मा पूजा एवं किसान-मजदूर सम्मान समारोह में बोल रहे थे। कार्यक्रम में उन्होंने किसानों, श्रमिकों, कारीगरों और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम करने वाली प्रतिभाओं का सम्मान किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 17 सितंबर का दिन दो महत्वपूर्ण वजहों से खास है। एक तरफ सृजन, शिल्प और निर्माण के आराध्य भगवान विश्वकर्मा की जयंती है, तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन भी इसी दिन पड़ता है। उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा अपने कौशल और सृजन के जरिए समाज के निर्माण की प्रेरणा देते हैं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सार्वजनिक जीवन सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान के परिश्रम से देश के अन्न भंडार भरते हैं और मजदूरों की मेहनत से विकास की इमारत खड़ी होती है। खेत से कारखाने तक और निर्माण स्थल से उद्योगों तक किसान, श्रमिक, कारीगर और शिल्पकार छत्तीसगढ़ की प्रगति में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
उनके मुताबिक विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य इन्हीं श्रमवीरों की मेहनत, क्षमता और कौशल के बल पर पूरा होगा। राज्य सरकार श्रमिकों के सम्मान के साथ उनके परिवारों को सुरक्षा, बेहतर जीवन और आर्थिक मजबूती देने की दिशा में काम कर रही है।
मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गरीब, किसान, मजदूर, युवा और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों को पक्का मकान, घर-घर शौचालय, बिजली, नल से जल और जन-धन खातों के जरिए बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने जैसी पहलों से करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में समाज के हर वर्ग और देश के अंतिम व्यक्ति तक विकास के अवसर पहुंचाना भी शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ सरकार ने भी 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ बनाने का विजन तैयार किया है। सरकार का लक्ष्य ऐसा समृद्ध, आत्मनिर्भर और आधुनिक राज्य बनाना है, जहां गांव और शहर, किसान और श्रमिक, युवा और महिलाएं—सभी को आगे बढ़ने के अवसर मिलें।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से देशभर में सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत हुई है। उन्होंने इसे सिर्फ एक आयोजन न मानकर जनभागीदारी से जुड़ा व्यापक संकल्प बताया। उन्होंने प्रदेशवासियों से अभियान में सक्रिय रूप से शामिल होने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन की शाम हर परिवार अपने घर में ‘आशीर्वाद का दीप’ जलाए और उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक केवल निर्माण कार्यों में अपनी भूमिका निभाने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक और विकास यात्रा के महत्वपूर्ण आधार हैं। इसलिए सरकार श्रमिक कल्याण को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि पंजीकृत श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए जीवन के अलग-अलग चरणों को ध्यान में रखते हुए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें जन्म से लेकर बच्चों की शिक्षा, आजीविका और दूसरी जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान शामिल है। CM साय ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण अपनी प्रतिभा और सपनों से समझौता न करना पड़े।
मुख्यमंत्री ने बताया कि श्रमिक परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत 200 बच्चों को निजी आवासीय विद्यालयों में पढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। उन्होंने श्रमिकों से अपील की कि वे शासन की योजनाओं का लाभ लेने के लिए अपना पंजीयन जरूर कराएं। सरकार का प्रयास है कि पात्र श्रमिक परिवार योजनाओं से वंचित न रहें।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रमिक परिवारों की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर भी सरकार का जोर है। इसी दिशा में महिलाओं को ई-रिक्शा उपलब्ध कराकर स्वरोजगार और नियमित आय के अवसर दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं है। श्रमिक परिवारों को अवसर और संसाधन देकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना भी लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री ने किसानों को छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि किसान समृद्ध होगा तो गांव मजबूत होगा और गांव की मजबूती से पूरा प्रदेश आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि राज्य में किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक किसानों को दो वर्षों का बकाया धान बोनस भी दिया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए राज्य में बड़े पैमाने पर सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। सरकार का लक्ष्य खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचाना, कृषि उत्पादकता बढ़ाना और किसानों की आय में लगातार वृद्धि करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों और श्रमिकों की मेहनत का सम्मान करना ही भगवान विश्वकर्मा के प्रति सच्ची श्रद्धा है। विकसित छत्तीसगढ़ का सपना तभी पूरा होगा जब प्रदेश का किसान खुशहाल हो और श्रमिक परिवार सुरक्षित तथा समृद्ध हो।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। महतारी वंदन योजना के तहत पात्र महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस सहायता से महिलाओं को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आर्थिक सहारा मिला है और परिवार के फैसलों में उनकी भागीदारी भी मजबूत हुई है। सरकार महिलाओं को लंबे समय के लिए आत्मनिर्भर बनाने के लिए शिक्षा, कौशल, स्वरोजगार और आजीविका के अवसरों से जोड़ने पर भी काम कर रही है। स्व-सहायता समूहों समेत कई माध्यमों से महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का फोकस सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं है। शहरों में भी सड़क, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और दूसरी जरूरी नागरिक सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बीरगांव नगर निगम क्षेत्र में पिछले ढाई वर्षों के दौरान करीब 175 करोड़ रुपये के विकास कार्य किए गए हैं। इन कामों से क्षेत्र की अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं में विस्तार हुआ है।
साय ने कहा कि आने वाले समय में भी बीरगांव की जरूरतों के मुताबिक विकास कार्य जारी रहेंगे। सरकार की विकास नीति बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। गांव, कस्बे, छोटे शहर और दूरस्थ जनजातीय इलाके भी प्राथमिकता में हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर क्षेत्र में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना विकसित छत्तीसगढ़ की बुनियादी जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने बस्तर समेत दूरस्थ क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नियद नेल्ला नार जैसी पहल के जरिए दूरस्थ गांवों तक सरकारी योजनाओं और मूलभूत सुविधाओं की पहुंच बढ़ाई जा रही है। साय ने कहा कि बस्तर प्राकृतिक संपदा, जनजातीय संस्कृति और वनोपज के लिहाज से संभावनाओं से भरा क्षेत्र है। पर्यटन और वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देकर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और जनजातीय परिवारों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। दूरदराज के इलाकों में सड़क और दूसरी अधोसंरचना के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोजगार के अवसरों का विस्तार करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सामाजिक, सांस्कृतिक, कला, साहित्य, समाजसेवा, खेल और विज्ञान समेत अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम करने वाली 76 प्रतिभाओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने सम्मानित लोगों को बधाई देते हुए कहा कि अपने क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले लोग समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं। किसी प्रतिभा का सम्मान सिर्फ उस व्यक्ति को सम्मानित करना नहीं है, बल्कि इससे समाज में सकारात्मक काम और उत्कृष्टता की संस्कृति को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने सम्मानित प्रतिभाओं से आगे भी इसी तरह समाज और प्रदेश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम को कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा तथा रोजगार एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने भी संबोधित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर प्रदेशवासियों से घरों में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाकर उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना करने की अपील की।
कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री साय ने माता परमेश्वरी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने भगवान विश्वकर्मा की पूजा कर प्रदेश के श्रमिकों, कारीगरों, शिल्पकारों, तकनीशियनों और निर्माण कार्यों से जुड़े कर्मयोगियों को विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू, धरसींवा विधायक अनुज शर्मा समेत स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, किसान, श्रमिक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नगरवासी मौजूद रहे।
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