1984 Anti Sikh Riots: सिख दंगा पीड़ितों से मिलकर CM रेखा गुप्ता ने जाना दर्द, BJP ने कांग्रेस को घेरा

Published : Nov 07, 2026, 07:20 PM IST
Union Minister Hardeep Singh Puri and CM Rekha gupta (Photo/ANI)

सार

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों से मुलाकात की। बीजेपी ने कांग्रेस पर हिंसा की बरसी पर रैली निकालकर सिखों की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया है।

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को दिल्ली में पुरी के आवास पर 1984 के सिख विरोधी दंगा पीड़ितों से मुलाकात की। इस दौरान पुरी और गुप्ता ने पीड़ितों से बात की और उनका हालचाल जाना। सामने आए दृश्यों में सीएम रेखा गुप्ता एक पीड़ित को सांत्वना देती नजर आ रही हैं। यह मुलाकात ऐसे वक्त में हुई है जब सत्ताधारी बीजेपी ने 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की ‘चलो दिल्ली’ रैली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी ने दिल्ली के कई इलाकों में मार्च निकालकर 1984 के दंगों को याद किया और कांग्रेस पर हिंसा की बरसी के दिन राजनीतिक रैली करने का आरोप लगाया।

इससे पहले 1 नवंबर को केंद्रीय मंत्री पुरी ने हरिनगर डिपो से तिलक नगर मेट्रो स्टेशन तक निकाले गए एक मार्च में हिस्सा लिया था। इस मार्च में सीएम रेखा गुप्ता, दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, आशीष सूद, कई सांसद, विधायक, पार्टी कार्यकर्ता और सिख समुदाय के कई लोग शामिल हुए थे। पुरी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उन्होंने 1984 की हिंसा की बरसी पर राजनीतिक प्रदर्शन करके सिखों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है। 'दंगा' शब्द को खारिज करते हुए पुरी ने 1984 की इस त्रासदी को एक सुनियोजित 'नरसंहार' और 'मानवता के खिलाफ अपराध' बताया। उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में 2,733 और देशभर में 3,325 लोगों की मौत हुई थी। उन्होंने इस सरकारी दावे पर भी सवाल उठाए कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद लोगों के गुस्से की वजह से यह हिंसा अचानक भड़क उठी थी। पुरी ने कहा,

42 साल पहले दिल्ली में जो हुआ, उसके बारे में काफी जानकारी मौजूद है। लेकिन मुझे लगता है कि 'दिमाग धोखा देता है', यह बताने की बहुत कोशिश की गई कि दिल्ली में जो हिंसा हुई वो अचानक थी और लोगों के गुस्से का नतीजा थी। यह बात बिल्कुल भी सच नहीं है।

पुरी ने याद दिलाया कि 1 नवंबर 1984 के आसपास इस सुनियोजित हिंसा का पहला निशाना भारत के सातवें राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह बने थे। जब वे अपनी आधिकारिक अफ्रीका यात्रा से लौट रहे थे, तब एम्स (AIIMS) के पास उनकी कार पर हमला किया गया था।

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