
दिल्ली सरकार इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) के चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर एक बड़ा प्लान बना रही है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 32,000 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन लगाना है। यह कदम दिल्ली EV पॉलिसी 2026 का एक अहम हिस्सा है, जिसका मकसद राजधानी को सस्टेनेबल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के मामले में देश का एक बड़ा हब बनाना है।
दिल्ली में अभी हजारों पब्लिक चार्जिंग पॉइंट्स हैं, लेकिन सरकार अगले चार सालों में इस नेटवर्क को लगभग चार गुना तक बढ़ाना चाहती है। ये नए चार्जिंग स्टेशन रिहायशी कॉलोनियों, कमर्शियल इलाकों, मेट्रो स्टेशनों, पब्लिक पार्किंग और बड़े ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसी जगहों पर लगाए जाएंगे ताकि EV यूजर्स को आसानी से चार्जिंग की सुविधा मिल सके।
इस नई पॉलिसी में फास्ट-चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास जोर दिया गया है, ताकि गाड़ियों को चार्ज करने में लगने वाला समय कम हो और लोगों को सहूलियत मिले। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे एडवांस चार्जिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करें और प्राइवेट ऑपरेटरों के साथ मिलकर एक भरोसेमंद चार्जिंग इकोसिस्टम तैयार करें। यह नेटवर्क प्राइवेट और कमर्शियल, दोनों तरह की इलेक्ट्रिक गाड़ियों को सपोर्ट करेगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार सरकार के उस लक्ष्य को पाने के लिए जरूरी है, जिसके तहत 2030 तक 30% से ज्यादा लोग EV अपनाएंगे। इस पॉलिसी में इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने पर छूट, व्हीकल टैक्स में माफी, पुरानी गाड़ी स्क्रैप करने पर फायदे और मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाने जैसे कदम भी शामिल हैं।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का यह विस्तार दिल्ली की क्लीन मोबिलिटी स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। इसका बड़ा मकसद वायु प्रदूषण और पेट्रोल-डीजल जैसे पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करना है। सरकार इलेक्ट्रिक बसों को चलाने और EV खरीदारों को छूट देने के साथ-साथ उम्मीद कर रही है कि बेहतर चार्जिंग नेटवर्क से लोगों के लिए रोजमर्रा के इस्तेमाल में इलेक्ट्रिक गाड़ियां ज्यादा प्रैक्टिकल बनेंगी और शहर की हवा भी साफ होगी।
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