Delhi Industrial Policy: दिल्ली कैबिनेट ने पास की नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी, 1000 करोड़ का बजट

Published : Oct 14, 2026, 04:47 PM IST
Delhi Chief Minister Rekha Gupta (File Photo/ANI)

सार

दिल्ली सरकार ने 'दिल्ली इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2026' को मंजूरी दे दी है। सीएम रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुए इस फैसले का मकसद दिल्ली को एक क्लीन और हाई-टेक इंडस्ट्रियल हब बनाना है। इसके तहत 'मुख्यमंत्री उद्यमश्री योजना' पर 1,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने राजधानी को एक क्लीन, मॉडर्न और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन इंडस्ट्रियल हब बनाने की तरफ बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की लीडरशिप में मंगलवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में 'दिल्ली इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2026' को मंजूरी मिल गई।

एक प्रेस रिलीज के मुताबिक, इस पॉलिसी का टारगेट अगले 10 सालों में क्लीन, हाई-वैल्यू इंडस्ट्रीज और नॉलेज-टेक्नोलॉजी बेस्ड बिजनेस को बढ़ावा देना है। सरकार ने 'मुख्यमंत्री उद्यमश्री योजना' के लिए 1,000 करोड़ रुपये का बजट रखा है। यह पैसा वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच सालों में खर्च होगा। इसका सीधा मकसद नई इंडस्ट्रीज को सपोर्ट करना और रोजगार के नए मौके बनाना है।

सीएम रेखा गुप्ता ने बताया कि इस नई पॉलिसी से दिल्ली को एडवांस टेक्नोलॉजी, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, डेटा सेंटर्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), हेल्थकेयर, अर्बन लॉजिस्टिक्स, सर्कुलर इकोनॉमी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब बनाया जाएगा। रिलीज में कहा गया है कि यह पॉलिसी नए इन्वेस्टमेंट लाएगी, पुरानी इंडस्ट्रीज को मॉडर्न बनाएगी, महिला उद्यमियों को आगे बढ़ाएगी और युवाओं के लिए नौकरियां पैदा करेगी।

सीएम ने कहा कि 10 प्रायोरिटी सेक्टर्स की जरूरतों के हिसाब से इंसेंटिव दिए जाएंगे। इनमें कैपिटल इन्वेस्टमेंट, ऑफिस रेंट, नई भर्तियां, रिसर्च, सर्टिफिकेशन, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन, एनर्जी एफिशिएंसी और स्किल डेवलपमेंट शामिल हैं। यह पॉलिसी संसाधनों के दोबारा इस्तेमाल और कचरा कम करने पर भी जोर देगी।

रिलीज के मुताबिक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में इन्वेस्टमेंट पर 3 साल तक 25% इंसेंटिव मिलेगा। यह रकम 10 करोड़ रुपये (महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) तक हो सकती है। ऑफिस रेंट पर भी 3 साल तक 40% (अधिकतम 2 करोड़ रुपये) की मदद मिलेगी। बैंडविड्थ और क्लाउड सर्विसेज के लिए 2 साल तक 25% (सालाना 10 लाख रुपये तक) की छूट मिलेगी। हर नई भर्ती पर 40,000 से 50,000 रुपये का इंसेंटिव दिया जाएगा।

बड़े लेवल के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर 5 साल के लिए 25% इंसेंटिव (50 करोड़ रुपये तक, महिलाओं के लिए 60 करोड़ रुपये) मिलेगा। ऑफिस रेंट पर 2 साल के लिए 40% (अधिकतम 2 करोड़ रुपये) की मदद मिलेगी। यहां हर नई भर्ती पर 1 लाख से 1.2 लाख रुपये का इंसेंटिव है। पॉलिसी में सर्टिफिकेशन के लिए 50% (25 लाख रुपये तक), R&D के लिए 30% (5 करोड़ रुपये तक) और वर्कस्पेस बनाने वाली यूनिट्स को 25% (10 करोड़ रुपये तक) की मदद का भी प्रावधान है।

कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर 25% इंसेंटिव (10 करोड़ रुपये तक, महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) मिलेगा। कम पानी इस्तेमाल करने वाले कूलिंग सिस्टम के लिए 30% (2 करोड़ रुपये तक), सर्टिफिकेशन और डेटा सिक्योरिटी के खर्च पर 50% (50 लाख रुपये तक) और रेगुलेटरी कंप्लायंस की तैयारी के लिए 50% (25 लाख रुपये तक) की मदद दी जाएगी।

रिसर्च एक्टिविटीज के लिए कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर 25% इंसेंटिव (10 करोड़ रुपये तक, महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) मिलेगा। रिसर्च ग्रांट के तौर पर 50% (50 लाख रुपये तक) की मदद मिलेगी। पेटेंट के लिए 25% खर्च (प्रति पेटेंट 5 लाख रुपये तक, अधिकतम 4 पेटेंट) सरकार उठाएगी। लैब एक्रेडिटेशन के लिए भी 25% (25 लाख रुपये तक) का इंसेंटिव मिलेगा।

हेल्थकेयर सेक्टर में कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर 25% इंसेंटिव (10 करोड़ रुपये तक, महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) मिलेगा। 1,000 या उससे ज्यादा बेड वाले अस्पतालों को 100 करोड़ रुपये तक की मदद मिल सकती है। वेलनेस एक्टिविटीज के लिए 5% (1 करोड़ रुपये तक) और NABH, NABL, JCI जैसे सर्टिफिकेशन के लिए 50% (20 लाख रुपये तक) की मदद मिलेगी। हर नए स्पेशलिस्ट डॉक्टर की नियुक्ति पर 50,000 से 60,000 रुपये का इंसेंटिव दिया जाएगा।

नई वेयरहाउसिंग यूनिट्स को 25% इंसेंटिव (10 करोड़ रुपये तक, महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) मिलेगा, जबकि पुरानी यूनिट्स को 25% (1 करोड़ रुपये तक) की मदद मिलेगी। कोल्ड-चेन फैसिलिटी के लिए 25% (2 करोड़ रुपये तक), लॉजिस्टिक्स में नई तकनीक अपनाने पर 40% (50 लाख रुपये तक) और ग्रीन एनर्जी के इस्तेमाल पर 25% (2 करोड़ रुपये तक) का इंसेंटिव मिलेगा।

सर्कुलर इकोनॉमी और वेस्ट मैनेजमेंट के तहत रीसाइक्लिंग यूनिट्स को 25% इंसेंटिव (1 करोड़ रुपये तक) मिलेगा। रोजाना 10 टन से ज्यादा ऑर्गेनिक वेस्ट प्रोसेस करने वाली यूनिट्स को 25% (1 करोड़ रुपये तक, महिलाओं के लिए 1.2 करोड़ रुपये) की मदद मिलेगी। ई-वेस्ट मैनेजमेंट के लिए 25% (2 करोड़ रुपये तक) और पर्यावरण सर्टिफिकेशन के लिए 50% (10 लाख रुपये तक) का इंसेंटिव मिलेगा।

इसके अलावा, कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर 25% इंसेंटिव (5 करोड़ रुपये तक, महिलाओं के लिए 6 करोड़ रुपये) मिलेगा। 2 साल तक रेंट पर 20% (सालाना 50 लाख रुपये तक) की मदद मिलेगी। अप्रेंटिस के स्टाइपेंड के लिए भी 6 महीने तक एक्स्ट्रा मदद दी जाएगी।

स्किल डेवलपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 25% इंसेंटिव (2 करोड़ रुपये तक) मिलेगा, लेकिन इसके लिए कम से कम 50 लाख रुपये का इन्वेस्टमेंट जरूरी है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने पर भी 25% (2 करोड़ रुपये तक) की मदद मिलेगी, जिसके लिए न्यूनतम इन्वेस्टमेंट 75 लाख रुपये होना चाहिए।

टेक्नोलॉजी अपग्रेड करने के लिए 25% इंसेंटिव (5 करोड़ रुपये तक, महिलाओं के लिए 7 करोड़ रुपये) मिलेगा। एनर्जी एफिशिएंसी बढ़ाने और रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए 25% (50 लाख रुपये तक) की मदद मिलेगी। अप्रेंटिस के स्टाइपेंड के लिए 6 महीने तक एक्स्ट्रा मदद मिलेगी। इन सब का मकसद MSME को नई तकनीक अपनाने और बिजली बचाने में मदद करना है।

2026 की इस पॉलिसी में महिला उद्यमियों को हर सेक्टर में ज्यादा इंसेंटिव मिलेगा। महिलाओं द्वारा चलाई जा रही MSME यूनिट्स को बिजनेस बढ़ाने के लिए एक्स्ट्रा सपोर्ट मिलेगा। जो कंपनियां महिलाओं को नौकरी देंगी, उन्हें हर भर्ती पर ज्यादा इंसेंटिव मिलेगा। स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम में भी महिलाओं और युवाओं पर खास फोकस रहेगा।

इस पॉलिसी के तहत 'इन्वेस्ट दिल्ली' एक डेडिकेटेड सरकारी एजेंसी के तौर पर काम करेगी। यह इन्वेस्टर्स के लिए सिंगल पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट होगी। यह एजेंसी सही जगह चुनने से लेकर अप्रूवल दिलाने, इंसेंटिव बांटने और शिकायतें दूर करने तक हर कदम पर मदद करेगी।

यह पूरा सिस्टम 'दिल्ली उद्योग मित्र पोर्टल' के जरिए चलेगा, जिससे अप्रूवल प्रोसेस तेज और पारदर्शी बनेगा। सीएम ने कहा कि इस पॉलिसी का मकसद नया इन्वेस्टमेंट लाकर, पुरानी MSME को मॉडर्न बनाकर और स्किल डेवलपमेंट को मजबूत करके रोजगार के ज्यादा मौके बनाना है।

राजधानी होने के नाते दिल्ली के पास कई फायदे हैं, जैसे बड़े कॉलेज, रिसर्च सेंटर, कॉर्पोरेट हेडक्वार्टर, स्किल्ड वर्कफोर्स और बड़े बाजारों से नजदीकी। इस पॉलिसी का मकसद इन्हीं ताकतों का इस्तेमाल करके दिल्ली को एक क्लीन और नॉलेज-बेस्ड इंडस्ट्रियल हब बनाना है।

सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि यह पॉलिसी एडवांस टेक्नोलॉजी और हाई-वैल्यू इंडस्ट्रीज को बढ़ावा देकर दिल्ली की आर्थिक क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करेगी। अगले 10 सालों में यह पॉलिसी एक इन्वेस्टमेंट-फ्रेंडली माहौल बनाएगी, उद्यमियों को सपोर्ट करेगी और युवाओं के लिए नई नौकरियां पैदा करेगी। यह दिल्ली की इंडस्ट्रियल इकोनॉमी को पूरी तरह से एक मॉडर्न और क्लीन मॉडल में बदल देगी।

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