Delhi News: बाल भिक्षावृत्ति पर सख्ती, बच्चों की सुरक्षा के लिए CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला

Published : Sep 11, 2026, 05:47 PM IST
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सार

दिल्ली सरकार ने बच्चों की सुरक्षा और भविष्य के लिए बड़ा एक्शन प्लान बनाया। बाल भिक्षावृत्ति, POCSO, स्कूल सुरक्षा, CCI बच्चों और रोजगार पर रहेगा फोकस।

नई दिल्ली। दिल्ली में बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और उनके बेहतर भविष्य को लेकर सरकार ने नई प्राथमिकताएं तय की हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली आयोग फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (DCPCR) के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें बच्चों की सुरक्षा से लेकर शिक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भर भविष्य तक कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में खास तौर पर Child Begging Free Delhi Campaign को तेज करने, स्कूलों में POCSO और HPV जागरूकता बढ़ाने तथा बच्चों से जुड़े संस्थानों की व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा करने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के हर बच्चे को सुरक्षा, सम्मान और आगे बढ़ने के पूरे अवसर देना सरकार की जिम्मेदारी और प्राथमिकता है। बैठक में दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष ओम प्रकाश व्यास और संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे।

Child Begging Free Delhi Campaign: बाल भिक्षावृत्ति मुक्त दिल्ली अभियान को मिलेगी रफ्तार

बैठक में तय किया गया कि Child Begging Free Delhi Campaign को और तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए सिर्फ सरकारी एजेंसियों पर निर्भर रहने के बजाय NGOs, CSOs और RWAs की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।

बाल भिक्षावृत्ति एक गंभीर सामाजिक समस्या है और इसके पीछे कई बार गरीबी, परिवार की आर्थिक स्थिति, संगठित नेटवर्क और बच्चों के शोषण जैसे कारण जुड़े हो सकते हैं। ऐसे में सरकार का फोकस केवल बच्चों को सड़कों से हटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनकी पहचान, सुरक्षा, पुनर्वास और भविष्य की व्यवस्था पर भी ध्यान देना जरूरी होगा। NGOs, नागरिक संगठनों और स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों की भागीदारी से अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।

POCSO Awareness in Schools: स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर बढ़ेगा फोकस

दिल्ली के स्कूलों में POCSO कानून को लेकर जागरूकता अभियान को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूलों को सिर्फ पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि सुरक्षित वातावरण के रूप में मजबूत करना भी जरूरी है। बैठक में बच्चों, अभिभावकों और स्कूलों से जुड़े लोगों के बीच सुरक्षा और जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। POCSO यानी बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले कानून के बारे में सही जानकारी बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम मानी जाती है।

HPV Awareness: स्कूलों में स्वास्थ्य जागरूकता पर भी जोर

बच्चों और किशोरों के बेहतर स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में HPV जागरूकता बढ़ाने का भी फैसला लिया गया है। सरकार का उद्देश्य बच्चों और अभिभावकों तक जरूरी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाना है। महिला और बाल स्वास्थ्य के मामले में जागरूकता की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। इसलिए POCSO के साथ HPV को लेकर जानकारी और जागरूकता को भी स्कूल स्तर पर मजबूत करने की तैयारी की जा रही है।

School Safety: स्टाफ और वाहन चालकों का होगा पुलिस वेरिफिकेशन

स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए स्कूल स्टाफ, वाहन चालकों और सपोर्ट स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन कराने पर भी जोर दिया गया है। स्कूल में बच्चों के संपर्क में आने वाले शिक्षकों के अलावा ड्राइवर, कंडक्टर, हेल्पर और अन्य सहायक कर्मचारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में उनका सत्यापन बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करने की दिशा में एक जरूरी कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा भी की जाएगी, ताकि किसी तरह की कमी सामने आने पर समय रहते कार्रवाई हो सके।

Anganwadi और Palna Centers की व्यवस्थाओं की होगी नियमित समीक्षा

बैठक में आंगनवाड़ी केंद्रों, Palna Centres और Child Care Institutions यानी CCIs की व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा करने पर भी फैसला लिया गया। इन संस्थानों से छोटे बच्चों और जरूरतमंद बच्चों की देखभाल सीधे तौर पर जुड़ी होती है। ऐसे में यहां बच्चों को मिलने वाली सुरक्षा, पोषण, देखभाल और अन्य सुविधाओं की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत है। सरकार की कोशिश है कि बच्चों से जुड़े संस्थान केवल औपचारिक व्यवस्था बनकर न रहें, बल्कि वहां बच्चों को वास्तव में सुरक्षित और सहयोगी माहौल मिले।

CCI से बाहर आने वाले बच्चों को मिलेगा शिक्षा और रोजगार का सहारा

बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उन बच्चों के भविष्य को लेकर रहा जो Child Care Institutions (CCIs) से बाहर निकलने के बाद अपनी नई जिंदगी शुरू करते हैं। ऐसे बच्चों के लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और After Care की व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया गया है। उद्देश्य यह है कि CCI से बाहर आने के बाद बच्चे अचानक असहाय न हो जाएं। उन्हें पढ़ाई जारी रखने, कौशल सीखने और रोजगार से जुड़ने का अवसर मिले। साथ ही जरूरत पड़ने पर आफ्टर केयर के माध्यम से सहयोग मिलता रहे, ताकि वे धीरे-धीरे अपने पैरों पर खड़े हो सकें और आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ सकें।

Delhi Child Rights: सिर्फ सुरक्षा नहीं, सम्मान और आगे बढ़ने का पूरा मौका

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बच्चों के अधिकारों को लेकर सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट करते हुए कहा कि दिल्ली के हर बच्चे को सुरक्षा, सम्मान और प्रगति के पूरे अवसर मिलना जरूरी है। यह सोच केवल बच्चों को अपराध या हिंसा से बचाने तक सीमित नहीं है। इसमें उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, देखभाल, कौशल और भविष्य की आजीविका भी शामिल है। खास तौर पर कमजोर और कठिन परिस्थितियों से आने वाले बच्चों के लिए यह व्यवस्था अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। क्योंकि किसी बच्चे को सुरक्षित स्थान मिल जाना ही काफी नहीं है, उसे आगे बढ़ने और सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर भी मिलना चाहिए।

Delhi Child Safety Action Plan: सरकार के सामने अब जमीनी क्रियान्वयन की चुनौती

बैठक में तय किए गए कदमों से साफ है कि दिल्ली सरकार बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को कई स्तरों पर मजबूत करना चाहती है। बाल भिक्षावृत्ति, स्कूल सुरक्षा, POCSO जागरूकता, स्वास्थ्य, आंगनवाड़ी व्यवस्था और CCI से बाहर आने वाले बच्चों का भविष्य—इन सभी मुद्दों को एक साथ जोड़कर देखने की कोशिश की गई है।

अब सबसे अहम बात इन फैसलों का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन होगा। अगर NGOs, CSOs, RWAs, स्कूल प्रशासन और सरकारी एजेंसियां मिलकर काम करती हैं तो बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए एक मजबूत व्यवस्था तैयार की जा सकती है। सरकार का संदेश साफ है- दिल्ली में हर बच्चे को सिर्फ संरक्षण ही नहीं, बल्कि सम्मान के साथ आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।

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