
दिल्ली में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। इस पहल के तहत अब राजधानी के लोग अपने पुराने और उपयोग योग्य कपड़ों को आसानी से दान कर सकेंगे। इन कपड़ों का पुनर्चक्रण (Recycling) और अपसाइक्लिंग (Upcycling) किया जाएगा, जिससे कपड़ा कचरे में कमी आएगी, लैंडफिल पर दबाव घटेगा और महिलाओं के लिए नए रोजगार के अवसर भी तैयार होंगे।
इसी उद्देश्य से दिल्ली सचिवालय में दिल्ली सरकार, DLWO (Delhi Livelihood and Welfare Organisation), DMRC (Delhi Metro Rail Corporation), SULM (State Urban Livelihood Mission), ReSpun और Clothes Box Foundation के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
An MoU was signed today at the Delhi Secretariat between the Delhi Government, DLWO, DMRC, SULM, ReSpun and Clothes Box Foundation to launch the Old Clothes Donation Project.
Under the initiative, ‘Arpan’ donation centres will soon be set up at 10 Delhi Metro stations, where… pic.twitter.com/Uy3rv0d7eA— CMO Delhi (@CMODelhi) July 14, 2026
समझौते के तहत दिल्ली मेट्रो के 10 प्रमुख स्टेशनों पर जल्द ही 'अर्पण' (Arpan) Donation Centres स्थापित किए जाएंगे। यहां नागरिक अपने पुराने, साफ और उपयोग योग्य कपड़े दान कर सकेंगे। दान किए गए कपड़ों को उनकी स्थिति के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाएगा। उपयोग योग्य कपड़ों को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी, जबकि अनुपयोगी कपड़ों को रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग के माध्यम से नए उत्पादों में बदला जाएगा।
हर वर्ष बड़ी मात्रा में कपड़ा कचरा लैंडफिल तक पहुंचता है, जिससे पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। यह परियोजना टेक्सटाइल वेस्ट को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग के जरिए कपड़ों का दोबारा उपयोग बढ़ेगा, प्राकृतिक संसाधनों की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी लाने में मदद मिलेगी। यह पहल दिल्ली सरकार के स्वच्छ, हरित और टिकाऊ (Sustainable) दिल्ली के विजन को मजबूत करेगी।
इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाना भी है। पुराने कपड़ों की छंटाई, मरम्मत, अपसाइक्लिंग और नए उत्पाद तैयार करने जैसी गतिविधियों से स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) और महिला उद्यमियों को रोजगार एवं आय के नए अवसर मिलेंगे। इससे शहरी आजीविका मिशन (SULM) के तहत महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को भी बल मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि कपड़ों का पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) को मजबूत करने की दिशा में भी बड़ा कदम है। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और बेकार होने वाले कपड़ों को नई उपयोगिता मिल सकेगी।
दिल्ली सरकार का कहना है कि यह परियोजना केवल कपड़े दान करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नागरिकों में जिम्मेदार उपभोग (Responsible Consumption) और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी माध्यम बनेगी। सरकार का लक्ष्य राजधानी को अधिक स्वच्छ, हरित और टिकाऊ शहर बनाना है। 'अर्पण' डोनेशन सेंटर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकते हैं।
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