
दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने और हवा की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखने के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इसी दिशा में दिल्ली सरकार ने शास्त्री पार्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) स्थापित किया है। इस सेंटर के माध्यम से राजधानी में प्रदूषण की स्थिति पर 24 घंटे निगरानी रखने की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शास्त्री पार्क स्थित सेंटर का दौरा किया और यहां संचालित 24×7 प्रदूषण निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की। इस दौरान दिल्ली में 13 नए कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (CAAQMS) का उद्घाटन भी किया गया।
सरकार की इस पहल को दिल्ली में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, प्रदूषण के स्तर में वास्तविक सुधार के लिए निगरानी के साथ-साथ उत्सर्जन पर नियंत्रण और प्रभावी कार्रवाई भी जरूरी होगी।
प्रदूषण के हर हॉटस्पॉट पर पैनी नजर और हर समस्या पर त्वरित एक्शन के लिए दिल्ली सरकार द्वारा शास्त्री पार्क में नया इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) स्थापित किया गया है। यहां AI कैमरों, रियल-टाइम डेटा और GPS तकनीक से प्रदूषण नियंत्रण के कार्यों की 24×7 निगरानी की जा रही है।
आज माननीय केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री @byadavbjp जी के साथ इस सेंटर का दौरा कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। साथ ही PM 2.5 और PM 10 की सटीक निगरानी के लिए 13 नए CAAQMS स्टेशनों का उद्घाटन किया गया।
केंद्र सरकार के सहयोग से हमारी सरकार प्रदूषण के हर प्रमुख स्रोत पर नियंत्रण के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। इस अवसर पर दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा जी, कैबिनेट सहयोगी श्री मनजिंदर सिंह सिरसा जी, विधायक श्री अरविन्दर सिंह लवली जी एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।
@hdmalhotra
@mssirsa
@ArvinderLovely
#ViksitDelhi
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) October 13, 2026
शास्त्री पार्क में स्थापित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण से जुड़े आंकड़ों की निगरानी और उनके विश्लेषण की व्यवस्था को मजबूत करना है। AI आधारित तकनीक की मदद से उपलब्ध आंकड़ों को व्यवस्थित तरीके से देखने और प्रदूषण की स्थिति को समझने में सहायता मिल सकती है।
दिल्ली जैसे बड़े शहर में वायु प्रदूषण की स्थिति अलग-अलग इलाकों में अलग हो सकती है। ऐसे में लगातार निगरानी से यह समझने में मदद मिलती है कि कहां प्रदूषकों का स्तर बढ़ रहा है और किन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि, सेंटर में इस्तेमाल की जा रही AI तकनीक की सटीक क्षमताओं, अलर्ट सिस्टम और कार्रवाई की प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध होने पर ही इसके संचालन का पूरा आकलन किया जा सकेगा।
शास्त्री पार्क में सेंटर की समीक्षा के साथ दिल्ली में 13 नए कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन का उद्घाटन किया गया। इन स्टेशनों का उद्देश्य हवा में मौजूद प्रदूषक तत्वों के स्तर की लगातार निगरानी करना है। ऐसे निगरानी स्टेशन वायु गुणवत्ता से जुड़े आंकड़े जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके जरिए प्रदूषण के स्तर में होने वाले बदलावों को समझने और अलग-अलग समय पर हवा की स्थिति का आकलन करने में मदद मिलती है।
नए स्टेशनों से दिल्ली के निगरानी नेटवर्क को विस्तार मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इनकी सटीक लोकेशन, संचालन शुरू होने की तारीख और मौजूदा स्टेशनों के मुकाबले इनसे मिलने वाले अतिरिक्त कवरेज का विस्तृत ब्योरा सामने आने पर ही इनके प्रभाव का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।
दिल्ली के शास्त्री पार्क में AI-सक्षम इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) की स्थापना की गयी।
मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने केंद्र का दौरा कर 24×7 प्रदूषण निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की।
दिल्ली में वायु गुणवत्ता की निगरानी मजबूत करने के लिए 13 नए CAAQMS का उद्घाटन।
PM2.5 और PM10 के स्तर पर अब होगी और बेहतर निगरानी।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा, कैबिनेट मंत्री श्री मनजिंदर सिंह सिरसा और वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद।
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— Asianetnews Hindi (@AsianetNewsHN) October 13, 2026
दिल्ली में वायु प्रदूषण की चर्चा के दौरान PM2.5 और PM10 दो प्रमुख मानक हैं। नए मॉनिटरिंग स्टेशनों के जरिए इन कणों के स्तर पर नजर रखने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। PM2.5 बेहद महीन कण होते हैं, जो सांस के जरिए फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। PM10 अपेक्षाकृत बड़े कणों का समूह है, जिसमें धूल और अन्य कण शामिल हो सकते हैं। इनका स्तर बढ़ने पर लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इन दोनों प्रदूषकों की नियमित निगरानी से हवा की गुणवत्ता को समझने में मदद मिलती है। साथ ही, आंकड़ों के आधार पर प्रदूषण की गंभीरता का आकलन करने और जरूरी कदमों की योजना बनाने में भी सहायता मिल सकती है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शास्त्री पार्क स्थित ICCC में प्रदूषण की निगरानी से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस दौरान तकनीक के इस्तेमाल और लगातार निगरानी के जरिए वायु गुणवत्ता पर नजर रखने के प्रयासों पर ध्यान दिया गया। कार्यक्रम में दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
इस पहल के जरिए सरकार का जोर प्रदूषण निगरानी व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत करने पर है। आगे इसका असर इस बात पर भी निर्भर करेगा कि निगरानी से मिलने वाले आंकड़ों का इस्तेमाल प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, संबंधित विभागों के बीच समन्वय और समय पर कार्रवाई के लिए किस तरह किया जाता है।
दिल्ली में वायु प्रदूषण एक ऐसी समस्या है, जिसका समाधान केवल आंकड़े जुटाने से नहीं हो सकता। इसके लिए निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल, वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियां, कचरा जलाने और अन्य प्रदूषण स्रोतों पर भी प्रभावी नियंत्रण की जरूरत होती है। AI आधारित ICCC और नए वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन सरकार को प्रदूषण की स्थिति समझने के लिए बेहतर जानकारी उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं। लेकिन इनसे मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर समय रहते कार्रवाई करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
शास्त्री पार्क में स्थापित सेंटर और 13 नए मॉनिटरिंग स्टेशनों के शुरू होने से दिल्ली में वायु गुणवत्ता की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस तकनीकी पहल से प्रदूषण के स्रोतों पर कार्रवाई और राजधानी की हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने के प्रयासों को कितनी मदद मिलती है।
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