
नई दिल्ली। दिल्ली में रहने वाले छात्रों के लिए एक अच्छी खबर है। दिल्ली सरकार राजधानी में चल रहे सभी पेइंग गेस्ट (पीजी) की मैपिंग के लिए जल्द ही एक ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च करने जा रही है। इसके अलावा, सुरक्षा मानकों और कानूनी नियमों की जांच के लिए अगले तीन दिनों में 100 पीजी का जॉइंट इंस्पेक्शन भी किया जाएगा। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने छात्र आवास और सुरक्षा पर बनी हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) की दूसरी बैठक के बाद यह जानकारी दी।
गुरुवार को हुई इस बैठक में छात्रों की सुरक्षा को पुख्ता करने पर जोर दिया गया। साथ ही, पीजी और हॉस्टल के लिए नियम-कानून बेहतर बनाने पर चर्चा हुई। इस काम में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली नगर निगम (MCD), दिल्ली पुलिस और विश्वविद्यालयों जैसे अहम विभागों के साथ मिलकर तुरंत कदम उठाने की बात कही गई। आपको बता दें कि सत्य निकेतन हादसे के बाद इस हाई-पावर्ड कमेटी का गठन किया गया था। इसका मकसद पूरी दिल्ली में पीजी और हॉस्टल के लिए पक्के नियम बनाना है।
बैठक में शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि सरकार पोर्टल बनाने के काम में काफी आगे बढ़ चुकी है। इस पोर्टल पर छात्रों और उनके पीजी की पूरी जानकारी होगी। इससे प्रशासन को यह पता लगाने में आसानी होगी कि छात्र कहां रह रहे हैं और उन्हें वहां क्या-क्या सुविधाएं मिल रही हैं। आशीष सूद ने कहा,
सत्य निकेतन की दुखद घटना के बाद, दिल्ली में पीजी और हॉस्टल के कामकाज के नियम तय करने के लिए सभी विभागों को मिलाकर एक हाई-पावर्ड कमेटी बनाई गई थी। छात्रों और पीजी का डेटा इकट्ठा करने के लिए पोर्टल बनाने का काम तेजी से चल रहा है। हम बहुत जल्द इस पोर्टल को लॉन्च करेंगे ताकि यह पता चल सके कि दिल्ली में बच्चे कहां और किस तरह के कमरों में रह रहे हैं। इससे हमें उन्हें रेगुलेट करने में मदद मिलेगी।
शुरुआत में इस पोर्टल पर कमरों की संख्या और बुनियादी सुविधाओं जैसी जरूरी जानकारी ही मांगी जाएगी। इसका मकसद रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान रखना है, ताकि पीजी चलाने वालों को कोई बेवजह की परेशानी न हो। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) और एमसीडी अगले दो से चार दिनों के अंदर इस पोर्टल की टेस्टिंग करेंगे। इसके बाद सरकार छात्रों को रजिस्ट्रेशन के लिए जागरूक करने के लिए एक आधिकारिक अभियान चलाएगी।
कमेटी ने एक सब-कमेटी बनाने का भी फैसला किया है। इसमें डीडीए, दिल्ली सरकार, एमसीडी के अधिकारी और दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति शामिल होंगे। यह सब-कमेटी उन कानूनी अड़चनों की जांच करेगी जो पीजी चलाने में दिक्कत पैदा करती हैं। यह सब-कमेटी मास्टर प्लान और दिल्ली नगर निगम (DMC) एक्ट के तहत जरूरी छूट देने की गुंजाइश पर स्टडी करेगी। इसमें बड़े एजुकेशन हब के 5-6 किलोमीटर के दायरे में, ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) वाले इलाकों में पीजी चलाने की अनुमति देने पर भी विचार किया जाएगा। इस बारे में समझाते हुए सूद ने कहा,
मास्टर प्लान और डीएमसी एक्ट की पाबंदियों के कारण जहां भी कानूनी रूप से पीजी चलाने में दिक्कतें आ रही हैं, वहां एक सब-कमेटी बैठकर उसकी स्टडी करेगी। इसमें डीडीए, दिल्ली सरकार, एमसीडी और दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के प्रतिनिधि शामिल हैं, ताकि मानकों में जरूरी बदलावों पर भी चर्चा की जा सके।
इसके अलावा, एमसीडी और डीडीए की टीमें अगले तीन दिनों में 100 चिन्हित पीजी का फील्ड इंस्पेक्शन करेंगी। इस दौरान सुरक्षा इंतजामों और मौजूदा कानूनी नियमों के पालन की जांच की जाएगी। बैठक में पीजी के लिए प्रस्तावित सुरक्षा नियमों पर भी चर्चा हुई। इसमें सभी एंट्री-एग्जिट गेट और कॉमन एरिया में सीसीटीवी कैमरे लगाना शामिल है, जिनका 40-45 दिनों का रिकॉर्डिंग बैकअप होना चाहिए। इस प्रस्ताव का मकसद निगरानी को मजबूत करना है, साथ ही यह भी ध्यान रखा जाएगा कि छात्रों की प्राइवेसी बनी रहे।
सूद ने बताया कि सरकार पीजी के कामकाज को व्यवस्थित करने और छात्रों को सुरक्षित व सस्ता आवास देने के लिए एक रेगुलेटरी ढांचा लाने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा,
जैसा कि हमने पहले बताया था, हम इस सिस्टम को सुधारने के लिए जल्द ही पीजी से जुड़े नियम और कानून लाएंगे। हम सुरक्षित और सस्ता आवास देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इस दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं।
दशहरा के बाद हाई-पावर्ड कमेटी की फिर से बैठक होगी। इसमें सब-कमेटी की रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी और रेगुलेटरी ढांचे के ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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