
बालासोर/हावड़ा. ओडिशा के बालासोर में तीन ट्रेनों की भयानक टक्कर को भारत के 20 साल के इतिहास में 'सबसे भीषण रेल हादसा' माना जा रहा है। इस हादसे में दबे-कुचले डिब्बों से जिंदा निकले लोग इसे ईश्वरीय चमत्कार मान रहे हैं। पटरियों पर आड़े-टेड़े पड़े डिब्बों, खून से लथपथ पड़ी लाशों को देखने के बाद हादसे में जिंदा बचे लोगों का मानना है कि यह उनके पुनर्जन्म होने जैसा है।
कोरामंडल ट्रेन हादसा- भारत के भीषणतम रेल हादसे में जीवित बचे यात्रियों की कहानियां
अनुभव दास नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा-"अतिशयोक्ति नहीं होगी, लेकिन मैंने स्वयं 200-250 से अधिक मौतों को देखा है। परिवारों कुचले ,अंगहीन शरीर और ट्रेन की पटरियों पर खून-खराब। यह एक ऐसा नजारा था, जिसे मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा। भगवान परिवारों की मदद करें।"
ओडिशा ट्रेन हादसे की कहानी-जैसे मौत के मुंह से निकला पूरा परिवार
कोरोमंडल ट्रेन से यात्रा कर रहा एक परिवार मानों चमत्कारिक रूप से हादसे में बच गया। यह परिवार अपने घर पश्चिम बंगाल के पुरबा मेदिनीपुर के महिसादल में मालुबासन गांव लौट आया है। हालांकि हादसे को याद करके परिवार के मुखिया सुब्रतो पाल कहते हैं, “हम खड़गपुर स्टेशन से चेन्नई के लिए निकले थे। बालासोर स्टेशन के बाद ट्रेन को झटका लगा। फिर हमने डिब्बे को धुएं से भरते देखा। मुझे कोई दिखाई नहीं दिया। स्थानीय लोग मेरे पास आए। सहायता की और उन्होंने मुझे मलबे से बाहर निकाला।”
बालासोर रेल हादसा कब और कैसे हुआ?
रेल मिनिस्ट्री के प्रवक्ता अमिताभ शर्मा के अनुसार, हावड़ा से चेन्नई जा रही ट्रेन नंबर 12841 कोरोमंडल एक्सप्रेस 2 जून शाम 8.30 बजे ओडिशा के खड़गपुर डिविजन में आने वाले बहनागा बाजार रेलवे स्टेशन के पास मालगाड़ी से टकरा कर पटरी से उतर गई थी। उसी वक्त दूसरी तरफ से आ रही यशवंतपुर-हावड़ा सुपरफास्ट ट्रेन इन डिब्बों से आकर भिड़ गई। दोनों ट्रेनों में करीब 4000 पैसेंजर मौजूद थे।
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