
दिल्ली. सोशल मीडिया पर इन दिनों काफी अश्लील सामग्री नजर आने लगी है। चूंकि सोशल मीडिया से बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक हर व्यक्ति जुड़ चुका है। ऐसे में सोशल मीडिया पर नजर आनेवाली अश्लील सामग्री के कारण यौन अपराधों में बढ़ोतरी होती है। इसी के चलते बाल रोग विशेषज्ञ संजय कुलश्रेष्ठ द्वारा उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की है। जिसमें उन्होंने कहा कि कोर्ट द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्म को निर्देश दिया जाए कि वे अश्लील सामग्री का प्रदर्शन नहीं करें।
अश्लील सामग्री इसलिए खतरनाक
सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई याचिका में बाल रोग विशेषज्ञ संजय कुलश्रेष्ठ ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, गृह मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को पक्षकार बनाते हुए कहा है कि सोशल मीडिया पर जिस प्रकार आसानी से अश्लील सामग्री उपलब्ध हो रही है। वह कहीं न कहीं लोगों को यौन व्यवहार के लिए उकसाने का काम कर रही है। इस कारण नाबालिक भी यौन अपराध की तरफ अग्रसर होते हैं। इसलिए बच्चों को यौन अपराधों के जाल में फंसने से बचाने के लिए सोशल मीडिया पर प्रदर्शित होने वाली अश्लील सामग्री को रोकना जरूरी है।
आईटी अधिकारों का उपयोग करें
सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में कहा गया कि यौन अपराधों की रोकथाम के लिए आईटी अधिनियम के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए अश्लील सामग्रियों को सोशल मीडिया पर जाने से रोकना चाहिए। ये सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से संभव है।
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जनहित के लिए लगाई याचिका, रूकेंगे बलात्कार
बाल रोग विशेषज्ञ संजय कुलश्रेष्ठ का कहना है कि ये याचिका जनहित के लिए लगाई गई है। जिससे छोटी उम्र के बच्चों के साथ होने वाले बलात्कार, यौन शोषण, यौन उत्पीड़न जैसी घटनाओं में कमी आएगी। चूंकि सोशल मीडिया पर डाली जा रही अश्लील सामग्री के सम्पर्क में हर उम्र के लोग आ रहे हैं। इस कारण यौन अपराध भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जिसे सोशल मीडिया पर अश्लील सामग्री नहीं डालकर काफी हद तक रोका जा सकता है। आजकल 24 घंटे फ्री इंटरनेट होता है। इस कारण हर कोई सोशल मीडिया पर घंटो समय बीताता है। ऐसे में उसे अश्लील सामग्री भी नजर आती है। जिससे वह यौन अपराध की तरफ बढ़ता है।
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