
वडोदरा। मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल की मौजूदगी में सोमवार को छोटाउदेपुर जिले के अंतर्गत 'वाइब्रेंट गुजरात रीजनल समिट' के तहत वडोदरा स्थित जीएसएफसी परिसर में "स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग हब और परंपरागत कौशल से औद्योगिक स्तर तक" विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में खेल उपकरण निर्माण उद्योग, निवेश, कौशल विकास और औद्योगिक विस्तार से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'विकसित भारत @2047' के विजन को साकार करने के उद्देश्य से गुजरात सरकार ने 'विकसित गुजरात' का व्यापक रोडमैप तैयार किया है। राज्य के संतुलित और समावेशी आर्थिक विकास को ध्यान में रखते हुए पूरे गुजरात को छह प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों—कच्छ, सौराष्ट्र, कॉस्टल सौराष्ट्र, उत्तर गुजरात, मध्य गुजरात और सूरत—में विभाजित किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक आर्थिक क्षेत्र के लिए अलग-अलग फोकस सेक्टर निर्धारित किए गए हैं, जिनकी पूरी जानकारी राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए और बाद में देश के प्रधानमंत्री के रूप में जो भी संकल्प लिए, उन्हें सफलतापूर्वक जमीन पर उतारकर दिखाया। यही कारण है कि आज निवेशकों का सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर मजबूत विश्वास कायम हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस सेमीकंडक्टर उद्योग को कभी देश में स्थापित करना कठिन माना जाता था, वही उद्योग आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में गुजरात में चार बड़े प्लांटों के साथ तेजी से विकसित हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने देश में पहली बार औद्योगिक नीति-2026 लागू की है। इस नीति के तहत उद्योगों को पूंजीगत सब्सिडी (कैपिटल सब्सिडी) और बिजली दरों से जुड़े लाभ अपनी आवश्यकता के अनुसार चुनने की सुविधा दी गई है। उनका कहना था कि इससे उद्योगों को अधिक लचीलापन मिलेगा और निवेश को भी नई गति मिलेगी।
श्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि वर्ष 2003 में शुरू हुआ 'वाइब्रेंट गुजरात' आज अंतरराष्ट्रीय स्तर का निवेश मंच बन चुका है। इसकी सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां हुए एमओयू में से 70 से 90 प्रतिशत तक का सफल क्रियान्वयन हो रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योगों को यदि किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो राज्य सरकार उसका त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए हमेशा तत्पर रहती है। उन्होंने सभी नागरिकों और उद्योग जगत से विकसित भारत और विकसित गुजरात के लक्ष्य को पूरा करने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।
केंद्रीय युवा कार्य एवं खेल मंत्री श्री मनसुख मांडविया ने कहा कि देश की तेजी से बढ़ती स्पोर्ट्स इकोनॉमी में स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग एक मजबूत आधार बनकर उभर रही है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार खेल प्रतिभाओं की पहचान, आधुनिक खेल अवसंरचना और विश्वस्तरीय खेल उपकरण निर्माण के जरिए देश को वैश्विक स्पोर्टिंग पावर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि 'खेलो इंडिया', 'फिट इंडिया मूवमेंट' और खेल अवसंरचना में लगातार किए जा रहे निवेश के कारण युवाओं में खेलों के प्रति रुचि और भागीदारी दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
मनसुख मांडविया ने कहा कि खेलों में बढ़ती भागीदारी के कारण स्थानीय उत्पादन, नवाचार, स्टार्टअप और निर्यात के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत स्वदेशी खेल उत्पादों को बढ़ावा देने, स्पोर्ट्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित करने और भविष्य के अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का लाभ उठाने के लिए केंद्र सरकार विशेष नीतिगत सहयोग प्रदान कर रही है।
कार्यक्रम में छोटाउदेपुर की प्रभारी मंत्री डॉ. मनीषाबेन वकील ने राज्य के समग्र और समावेशी विकास में खेल क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि खेल उद्योग रोजगार, निवेश और स्थानीय विकास का मजबूत माध्यम बन सकता है।
सेमिनार के तकनीकी सत्र में हेलो इंडिया के संयुक्त सचिव श्री विनिल कृष्णा और नीति आयोग के कार्यक्रम निदेशक श्री संजीत सिंह ने प्रतिभागियों को खेल उद्योग, निवेश और विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी।
जिला कलेक्टर गार्गी जैन की अध्यक्षता में आयोजित पैनल चर्चा में केपीएमजी के पार्टनर प्रशांत शांतकुमारन, स्टैग इंटरनेशनल के अध्यक्ष श्री राकेश कोहली, शिव नरेश स्पोर्ट्स प्रा. लि. के एमडी एवं सीईओ श्री शिव प्रकाश सिंह, एगिलिटास के निदेशक श्री अजय कुमार पांडे, आनंदको स्पोर्टिंग कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड के आर एंड डी निदेशक श्री अर्जुन आनंद, स्विमिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव श्री मोनल चौकसी तथा खेल विभाग के निदेशक के. एम. हरिलाल (आईटीएस) ने अपने विचार साझा किए।
चर्चा के दौरान खेल उपकरण निर्माण के लिए उपयुक्त उत्पाद श्रेणियों की पहचान, आदिवासी युवाओं के कौशल विकास, उद्यमिता को बढ़ावा देने, एमएसएमई को मजबूत बनाने, बाजार तक पहुंच आसान करने, पर्यावरण अनुकूल उत्पादन तकनीकों को अपनाने और खेल उद्योग में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल औद्योगिक वातावरण विकसित करने जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
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