अमेरिका में ओहियो के आई-480 हाईवे पर उस काली रात आखिर क्या हुआ? डिवाइडर पार कर आई मौत ने 26 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर दिलीप की सांसें छीन लीं। हादसे का रहस्य गहराया, जांच जारी।
Indian Software Engineer Crash: उस रात सब कुछ सामान्य था। अमेरिका की जगमगाती सड़कें, एक होनहार युवा के बड़े सपने और अपनी मंजिल की ओर बढ़ती एक सेडान कार। आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले से निकलकर सात समंदर पार पहुंचे 26 वर्षीय दिलीप कुमार बुंगातावूला के लिए अमेरिका सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि उनके किसान पिता के त्याग और अपनी मेहनत की सफलता का प्रतीक था। लेकिन किसे पता था कि 7 अगस्त, 2026 की रात ओहियो के इंटरस्टेट 480 पर मौत उनका इंतजार कर रही थी।
डिवाइडर पार कर आई मौत: सेकेंडों का वो मंजर जिसने सब कुछ तबाह कर दिया
हादसा 7 अगस्त 2026 को ओहियो के मैसेडोनिया इलाके में इंटरस्टेट 480 पर हुआ। पुलिस के अनुसार, दिलीप एक सेडान कार चला रहे थे। रात के सन्नाटे को चीरती हुई दिलीप की सेडान कार अपनी लेन में सामान्य गति से आगे बढ़ रही थी। तभी अचानक, विपरीत दिशा से आ रहे एक अनियंत्रित पिकअप ट्रक ने सड़क के बीचों-बीच बने मजबूत डिवाइडर को लांघ दिया। जब तक दिलीप कुछ समझ पाते या कार को मोड़ने का प्रयास करते, सामने से आती लोहे की विशाल मशीन सीधे उनकी कार पर आ चढ़ी। टक्कर इतनी भीषण थी कि धातु के टुकड़े हवा में उछल गए और गाड़ियों के परखच्चे उड़ गए। जब तक आपातकालीन सेवाएं (इमरजेंसी रिस्पांस टीम) सायरन बजाते हुए मौके पर पहुंचीं, तब तक दिलीप की सांसें थम चुकी थीं।
सपनों की उड़ान से अचानक पसरे मातम तक: आखिर क्या था उस काली रात का सच?
केंट स्टेट यूनिवर्सिटी से 2025 में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री पूरी करने के बाद दिलीप ने हाल ही में एक प्रतिष्ठित सॉफ्टवेयर कंपनी में अपने करियर की शुरुआत की थी। घर में खुशी का माहौल था और भारत के जेट्टिवरीपल्ली गांव में बैठे उनके पिता श्रीहरी बुंगातावुल को महसूस हो रहा था कि उनके त्याग का फल मिल रहा है। लेकिन इस भीषण दुर्घटना ने एक झटके में पूरे परिवार के चिराग को बुझा दिया। हादसे में तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज अस्पताल में जारी है। आखिर उस पिकअप ट्रक चालक से कहां चूक हुई? क्या गाड़ी में कोई तकनीकी खराबी थी या ड्राइवर की लापरवाही? पुलिस इन अनुत्तरित सवालों के जवाब तलाशने में जुटी है।
अंतिम विदाई का इंतजार: अमेरिका से भारत तक संवेदनाओं का तांता
न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने इस दुखद हादसे की पुष्टि करते हुए गहरा शोक व्यक्त किया है। दूतावास अधिकारियों के अनुसार, वे परिवार के निरंतर संपर्क में हैं और पार्थिव शरीर को भारत भेजने के लिए सभी कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रियाएं तेज कर रहे हैं। वहीं, नॉर्थ अमेरिका तेलुगु सोसाइटी (NATS) ने इस मुश्किल घड़ी में परिवार की आर्थिक मदद के लिए एक फंडरेज़र अभियान शुरू किया है, ताकि एक किसान पिता के खोए हुए सहारे को कम से कम संबल दिया जा सके। अब गांव में हर आंख नम है और हर किसी को बस दिलीप की आखिरी झलक का इंतजार है।


