
भोपाल। भोपाल में आयोजित ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव-2026 में संगीत, नृत्य और कला के जरिए दुनिया को शांति, सद्भाव और सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया गया। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने रवीन्द्र भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों का संबंध केवल आर्थिक और राजनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं है। इन देशों को साझा संस्कृति, शांति, आपसी सम्मान और समावेशी विकास की भावना भी जोड़ती है।
यह आयोजन ब्रिक्स संस्कृति मंत्री समूह की तीसरी बैठक के दौरान हुआ। कार्यक्रम में भारत सहित ब्रिक्स देशों के कलाकारों ने अपनी-अपनी सांस्कृतिक और संगीत परंपराओं की प्रस्तुति देकर विविधता में एकता की तस्वीर पेश की।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रदेश सदियों से अलग-अलग सभ्यताओं, विचारों, आस्थाओं और कलात्मक परंपराओं का संगम रहा है। उन्होंने भीमबेटका के प्रागैतिहासिक शैलचित्रों, सांची की शांति, खजुराहो के भव्य मंदिरों और प्रदेश के जनजातीय समुदायों की जीवंत परंपराओं का जिक्र किया। उनके मुताबिक मध्य प्रदेश भारत की लंबी और समृद्ध सभ्यतागत यात्रा को अपनी विरासत के जरिए खूबसूरती से सामने रखता है। शेखावत ने भारतीय दर्शन के दो महत्वपूर्ण सूत्रों ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘अतिथि देवो भव’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में अतिथि सत्कार केवल सामाजिक परंपरा नहीं, बल्कि एक गहरा सभ्यतागत मूल्य है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स देशों की भाषाएं, इतिहास और कलात्मक अभिव्यक्तियां अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन संगीत और कला ऐसी सार्वभौमिक भाषाएं हैं, जो लोगों और सभ्यताओं को एक-दूसरे के करीब लाती हैं। उन्होंने कहा कि यही कला मित्रता, शांति और उम्मीद के साझा संदेश को आगे बढ़ाने का माध्यम बनती है। भोपाल में आयोजित सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की प्रार्थना से हुई, जिसका संदेश आज की वैश्विक परिस्थितियों में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। शेखावत ने भोपाल और मध्य प्रदेश आए सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि यह प्रवास ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों और आपसी समझ को और मजबूत करेगा।
करीब 32 मिनट के विशेष संगीत कार्यक्रम की शुरुआत ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ मंगलाचरण से हुई। इसके बाद ‘भारतीय संगीत के रंग’ कार्यक्रम में हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत की परंपराओं का सुंदर मेल देखने को मिला। महोत्सव का सबसे खास आकर्षण ‘ब्रिक्स पीस सॉन्ग’ रहा। इसमें ब्रिक्स देशों के कलाकारों ने अपनी-अपनी संगीत परंपराओं के जरिए शांति, मित्रता और वैश्विक सद्भाव का संदेश दिया।
बेलारूस, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात सहित सहभागी देशों की सांगीतिक परंपराएं एक ही मंच पर नजर आईं। खास बात यह रही कि हर देश की प्रस्तुति के बाद भारतीय गान-वृंद ने संबंधित देश की भाषा में ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का गायन किया। इससे कार्यक्रम में सांस्कृतिक संवाद और वैश्विक एकता का संदेश और प्रभावी हुआ। कार्यक्रम का समापन ‘पीस टू ऑल, हार्मनी टू ऑल’ और ‘क्रेसेंडो ऑफ यूनिटी’ की सामूहिक प्रस्तुति के साथ हुआ।
महोत्सव में मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग की ओर से ‘अमृतस्य मध्यप्रदेश’ नाम से करीब 35 मिनट की भव्य नृत्य-नाट्य प्रस्तुति भी दी गई। इस प्रस्तुति के जरिए मध्य प्रदेश की आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को मंच पर उतारा गया। इसमें यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के साथ भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े प्रसंगों को भी शामिल किया गया। महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, राजा भोज, भोपाल, मां नर्मदा और सिंहस्थ-2028 से जुड़ी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत को भी प्रस्तुति में प्रभावशाली तरीके से दिखाया गया।
‘अमृतस्य मध्यप्रदेश’ में 125 से अधिक कलाकार शामिल हुए। प्रस्तुति में देश की अलग-अलग शास्त्रीय और लोक नृत्य परंपराओं को एक साथ पिरोया गया। कथक, भरतनाट्यम, मोहिनीअट्टम, मणिपुरी और समकालीन नृत्य के साथ मार्शल आर्ट को भी प्रस्तुति का हिस्सा बनाया गया। वहीं मध्य प्रदेश की गोंड, बैगा, गुदुमबाजा, मटकी, बधाई और बरेदी जैसी लोक नृत्य विधाओं की भी प्रस्तुति हुई। इस तरह कुल 12 नृत्य विधाओं का समन्वय देखने को मिला। कार्यक्रम का निर्देशन प्रसिद्ध कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी ने किया, जबकि प्रकाश संयोजन अनूप ‘बंटी’ जोशी ने संभाला।
महोत्सव में मध्य प्रदेश की पारंपरिक वस्त्र संस्कृति को भी खास जगह दी गई। पारंपरिक कपड़ों और प्रिंट्स पर आधारित फैशन प्रस्तुति के जरिए प्रदेश की समृद्ध टेक्सटाइल परंपरा को दर्शाया गया। ‘चदरिया झीनी रे झीनी’ की संगीतमय प्रस्तुति के दौरान करीब 150 फीट लंबे विशेष लहंगे का प्रदर्शन किया गया। इस प्रस्तुति का निर्देशन मुमताज खान ने किया। यह हिस्सा मध्य प्रदेश की पारंपरिक बुनाई, वस्त्र और प्रिंट परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सामने रखने का एक अलग प्रयास रहा।
ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव-2026 ने कला और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय संवाद का माध्यम बनाते हुए शांति, आपसी सम्मान और सहयोग का संदेश दिया। संगीत, नृत्य और विभिन्न देशों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘विविधता में एकता’ जैसे भारतीय विचारों को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया।
महोत्सव ने सांस्कृतिक कूटनीति को भी नई दिशा दी और यह संदेश दिया कि अलग-अलग भाषाओं, परंपराओं और इतिहास वाले देश कला और संस्कृति के जरिए एक साझा मंच पर आ सकते हैं। भोपाल में हुआ यह आयोजन वैश्विक सद्भाव और साझा सांस्कृतिक विरासत की भावना को मजबूत करने वाला रहा।
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