BRICS Summit 2026: भोपाल बना वैश्विक संस्कृति का केंद्र, सांची से भीमबेटका तक दिखेगी भारत की ताकत

Published : Aug 04, 2026, 08:22 PM IST
brics culture ministers meeting bhopal

सार

भोपाल में 5-8 अगस्त तक BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक, सांस्कृतिक महोत्सव, सांची-भीमबेटका भ्रमण और भारत के बड़े सांस्कृतिक प्रस्तावों पर चर्चा होगी।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत संस्कृति मंत्रालय 5 से 8 अगस्त 2026 तक मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह (Culture Working Group) और संस्कृति मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर रहा है। इसके साथ कई सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियां और विरासत भ्रमण भी आयोजित किए जाएंगे।

संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करना, आपसी सहयोग को नई दिशा देना और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कला परंपराओं तथा सभ्यतागत मूल्यों को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना है। इस बैठक में सदस्य देशों के संस्कृति मंत्री, उपमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।

BRICS घोषणापत्र पर भोपाल में लगेगी अंतिम मुहर

विवेक अग्रवाल के अनुसार 5 और 6 अगस्त को अधिकारी स्तर की बैठकों में विभिन्न नीतिगत विषयों और मसौदों पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके बाद 7 और 8 अगस्त को संस्कृति मंत्री और उपमंत्री अंतिम स्तर की बातचीत कर साझा सहमति बनाएंगे। उन्होंने बताया कि इससे पहले ब्रिक्स देशों के साथ एक वर्चुअल बैठक और फिर वाराणसी में दूसरी बैठक आयोजित की जा चुकी है। भोपाल में होने वाली यह तीसरी और अंतिम बैठक होगी, जहां ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों के घोषणा-पत्र को अंतिम रूप दिया जाएगा।

भारत ने रखा साझा BRICS डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रस्ताव

भारत ने ब्रिक्स देशों के बीच दीर्घकालिक और संस्थागत सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी सामने रखे हैं। पहला प्रस्ताव एक साझा BRICS डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने का है। इस प्लेटफॉर्म पर कलाकारों की जानकारी, रचनात्मक उद्योगों का डेटा, पांडुलिपियों का संग्रह और विभिन्न देशों की स्थापत्य विरासत का दस्तावेजीकरण उपलब्ध कराया जाएगा।

दूसरा प्रस्ताव यूनेस्को में बहुराष्ट्रीय और संयुक्त नामांकन को बढ़ावा देने से जुड़ा है। वर्तमान व्यवस्था के तहत प्रत्येक देश साल में केवल एक राष्ट्रीय नामांकन भेज सकता है। ऐसे में भारत ने ‘प्रोजेक्ट मॉनसून’, बौद्ध विरासत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से जुड़े साझा मंदिर स्थापत्य को मिलकर वैश्विक पहचान दिलाने का सुझाव दिया है।

BRICS सांस्कृतिक महोत्सव में आम जनता भी ले सकेगी हिस्सा

बैठकों के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान और जनभागीदारी को भी विशेष महत्व दिया गया है। भोपाल के रवींद्र भवन में बेलारूस, रूस, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया और भारत समेत कई देशों के सांस्कृतिक दल अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इन कार्यक्रमों में आम नागरिक भी शामिल हो सकेंगे। सम्मेलन के दौरान तीन प्रमुख प्रदर्शनियां भी लगाई गई हैं-

  • ज्ञान भारतम्
  • यूनेस्को बहुराष्ट्रीय नामांकन प्रदर्शनी
  • मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत प्रदर्शनी

इन प्रदर्शनियों में पांडुलिपियों के संरक्षण, डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अध्ययन और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के विभिन्न आयाम प्रदर्शित किए जाएंगे।

IGRMS में होगा पारंपरिक स्वागत, दिखेगी जनजातीय संस्कृति

5 अगस्त की शाम प्रतिनिधिमंडल इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय (IGRMS) पहुंचेगा। यहां पॉटरी प्रदर्शनी के माध्यम से पारंपरिक स्वागत किया जाएगा और स्वदेशी शिल्प एवं पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का जीवंत प्रदर्शन दिखाया जाएगा। इसके बाद प्रतिनिधि ट्राइबल हैबिटेट में ‘नागा हाउस’ और ‘हिमालयी गांव’ का भ्रमण करेंगे। यहां उन्हें विभिन्न समुदायों की वास्तुकला, जीवनशैली और सांस्कृतिक परंपराओं की जानकारी दी जाएगी। शाम को आयोजित सांस्कृतिक संध्या में कथक नृत्य, सामुदायिक लोक नृत्य और भारत की विविध जनजातीय एवं पारंपरिक वेशभूषाओं पर आधारित विशेष फैशन शो प्रस्तुत किया जाएगा।

BRICS संस्कृति कार्य समूह की बैठक में इन मुद्दों पर होगी चर्चा

6 अगस्त को आयोजित तीसरी BRICS संस्कृति कार्य समूह बैठक में संस्कृति मंत्रियों के घोषणापत्र के मसौदे और कई अहम विषयों पर चर्चा होगी। इनमें शामिल हैं-

  • सांस्कृतिक विरासत संरक्षण
  • संग्रहालयों का विकास
  • रचनात्मक उद्योग
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान
  • क्षमता निर्माण
  • लोगों के बीच संपर्क और सहयोग

कार्य समूह की सिफारिशें बाद में मंत्रिस्तरीय बैठक के लिए आधार तैयार करेंगी।

BRICS Peace Song बनेगा सांस्कृतिक महोत्सव का मुख्य आकर्षण

7 अगस्त को रवींद्र भवन में आयोजित BRICS Cultural Festival 2026 सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण होगा। कार्यक्रम की शुरुआत "सर्वे भवन्तु सुखिनः" के संदेश के साथ होगी। इसके बाद "कलर्स ऑफ इंडियन म्यूजिक" के जरिए हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत परंपराओं का प्रदर्शन किया जाएगा।

इस आयोजन का केंद्र बिंदु 'BRICS Peace Song- Peace is the Language of the Land' रहेगा। इस प्रस्तुति में बेलारूस, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात की संगीतमय परंपराओं का संगम देखने को मिलेगा।

इसके अलावा 'पीस टू ऑल, हार्मनी टू ऑल' और 'क्रेस्केंडो ऑफ यूनिटी' जैसी भव्य ऑर्केस्ट्रा प्रस्तुतियां भी दी जाएंगी।

‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’ से दिखेगी राज्य की सांस्कृतिक आत्मा

ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव की अंतिम और विशेष प्रस्तुति "अमृतस्य मध्य प्रदेश – एक अलौकिक सांस्कृतिक महायात्रा" होगी। प्रसिद्ध कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी के निर्देशन में 125 से अधिक कलाकार मंच पर मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेंगे।

इस प्रस्तुति में भीमबेटका, सांची, खजुराहो, चित्रकूट, उज्जैन, ग्वालियर, ओरछा, मांडू और ओंकारेश्वर की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत को नृत्य और संगीत के माध्यम से दर्शाया जाएगा। इसके साथ बैगा, मटकी और बधाई जैसे लोक एवं जनजातीय नृत्यों का भी प्रदर्शन होगा। प्रस्तुति के माध्यम से सिंहस्थ कुंभ 2028 का सांस्कृतिक संदेश भी दिया जाएगा।

8 अगस्त को होगी BRICS संस्कृति मंत्रियों की अहम बैठक

8 अगस्त को संस्कृति मंत्रियों की औपचारिक बैठक आयोजित होगी। इसमें सदस्य और साझेदार देश सांस्कृतिक विरासत, संग्रहालय, रचनात्मक अर्थव्यवस्था, क्षमता निर्माण और लोगों के बीच सहयोग बढ़ाने के विषयों पर चर्चा करेंगे। बैठक के अंत में BRICS Culture Ministers Declaration को अपनाया जाएगा, जो भविष्य में सांस्कृतिक सहयोग के लिए साझा दृष्टि और रोडमैप तय करेगा।

सांची स्तूप और बौद्ध विरासत से रूबरू होंगे विदेशी प्रतिनिधि

मंत्रिस्तरीय बैठक के बाद प्रतिनिधिमंडल यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची का दौरा करेगा। प्रतिनिधि बुद्ध जंबूदीप और विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप का भ्रमण करेंगे। साथ ही चेतियागिरी मंदिर में दर्शन, योग और ध्यान सत्र में भी भाग लेंगे। शाम के समय बौद्ध इतिहास और कला पर आधारित 3D प्रोजेक्शन मैपिंग तथा लाइट एंड साउंड शो का आयोजन किया जाएगा।

भीमबेटका भ्रमण से मिलेगा प्रागैतिहासिक विरासत का अनुभव

9 अगस्त को इच्छुक विदेशी प्रतिनिधियों के लिए यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भीमबेटका शैलाश्रयों की यात्रा भी रखी गई है। यह भ्रमण दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण प्रागैतिहासिक सांस्कृतिक धरोहरों में शामिल शैल चित्रों और मानव सभ्यता के शुरुआती प्रमाणों को करीब से देखने का अवसर देगा।

हेरिटेज वॉक, शिकारा राइड और बर्ड वाचिंग का भी रहेगा आकर्षण

सम्मेलन के दौरान प्रतिनिधियों को भोपाल की ऐतिहासिक और प्राकृतिक खूबसूरती से परिचित कराने के लिए कई विशेष गतिविधियां आयोजित की गई हैं। 5 और 8 अगस्त को हेरिटेज वॉक, 7 अगस्त को बर्ड वाचिंग और 6-7 अगस्त को बड़ी झील में शिकारा राइड की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा स्थानीय हस्तशिल्प और कलाकृतियों की खरीदारी के लिए भी विशेष कार्यक्रम रखा गया है।

मालवा से बुंदेलखंड तक के स्वाद से रूबरू होंगे मेहमान

अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए मध्यप्रदेश की पारंपरिक पाक विरासत को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है। प्रतिनिधियों को मालवी, बुंदेली और निमाड़ी व्यंजनों के साथ दाल-बाफला, निमोना, रिकमच, गुइया की सब्जी, चंबल का थोपा, चंदिया, बड़ा और कोदो-कुटकी जैसे मिलेट आधारित व्यंजनों का स्वाद चखने का अवसर मिलेगा। साथ ही विदेशी मेहमानों की पसंद को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी और ओरिएंटल व्यंजनों की भी व्यवस्था की गई है।

भारत की सांस्कृतिक ताकत दिखाने का बड़ा अवसर

यह पूरा आयोजन केवल एक सम्मेलन नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता, सभ्यतागत विरासत, कलात्मक उत्कृष्टता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना को दुनिया के सामने रखने का अवसर है। बैठकों, सांस्कृतिक महोत्सवों, प्रदर्शनियों, आधिकारिक कार्यक्रमों और विरासत यात्राओं के जरिए भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी। साथ ही सदस्य देशों के बीच संवाद, सांस्कृतिक सम्मान, विविधता और स्थायी मित्रता को भी नई मजबूती मिलेगी।

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