
इंदौर में आयोजित मालवा उत्सव इस बार सिर्फ सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक सौहार्द, लोक संस्कृति और स्थानीय अर्थव्यवस्था का बड़ा मंच बनकर उभरा। रजत जयंती वर्ष मना रहे इस भव्य आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हिस्सा लिया और कहा कि मेले और उत्सव समाज को जोड़ने का सबसे मजबूत माध्यम होते हैं। मुख्यमंत्री ने लोक संस्कृति मंच द्वारा आयोजित मालवा उत्सव की सराहना करते हुए इसे “मेल-मिलाप, आत्मीयता और सांस्कृतिक एकता का उत्सव” बताया। इस दौरान उन्होंने आयोजकों को 5 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा भी की।
इंदौर में आयोजित इस सांस्कृतिक महोत्सव में देश के अलग-अलग राज्यों से आए कलाकारों ने लोक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से माहौल को जीवंत बना दिया। भांगड़ा, गरबा, बधाई और पारंपरिक लोक नृत्यों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ऐसा लग रहा था मानो “स्वर्ग धरती पर उतर आया हो।” उन्होंने कहा कि भारत की विविध संस्कृति ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और ऐसे आयोजन इस एकता को और मजबूत करते हैं।
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मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि मालवा उत्सव जैसे आयोजन सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि हजारों लोगों की आजीविका से भी जुड़े होते हैं। छोटे कलाकार, हस्तशिल्पी, ठेले संचालक, झूला व्यवसायी और स्थानीय दुकानदार इन आयोजनों से आर्थिक रूप से मजबूत होते हैं। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए स्थानीय कला और परंपराओं को नया बाजार मिलता है, जिससे छोटे कारोबारियों को भी लाभ पहुंचता है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के ग्रामीण हाट बाजार परिसर में आयोजित तीन दिवसीय “मैंगो जत्रा” में भी हिस्सा लिया। यहां महाराष्ट्र के रत्नागिरी और देवगढ़ के प्रसिद्ध हापुस (अल्फांसो) आमों की प्रदर्शनी और बिक्री की जा रही है। मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और आम उत्पादक किसानों से बातचीत कर उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि “देवगढ़ और रत्नागिरी के हापुस आमों का मालवा के बाजार तक पहुंचना देश की सांस्कृतिक और आर्थिक एकात्मता का प्रतीक है।”
मुख्यमंत्री ने 24 आम उत्पादक किसानों को 11-11 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। किसानों ने बताया कि वे पिछले करीब 15 वर्षों से मैंगो जत्रा में हिस्सा ले रहे हैं। सीएम ने कहा कि ऐसे आयोजन किसानों को सीधे ग्राहकों से जोड़ते हैं, जिससे उन्हें अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिलता है और उपभोक्ताओं को ताजे व गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध होते हैं।
मैंगो जत्रा में आम से बने आइसक्रीम, शेक, मिठाइयां, आमरस, चटनी, जैम, स्क्वैश और कैंडी जैसे उत्पाद लोगों को खासा आकर्षित कर रहे हैं। इसके अलावा हस्तनिर्मित मसाले, पापड़, अचार और खादी उत्पादों के स्टॉल भी लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग इन स्टॉलों पर खरीदारी और स्वाद का आनंद लेने पहुंच रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार इस वर्ष “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मना रही है। सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मैंगो जत्रा और मालवा उत्सव जैसे आयोजन न सिर्फ सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक सहभागिता को भी नई दिशा देते हैं।
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