
भोपाल: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतरराष्ट्रीय खुशहाली दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को जीवन जीने का एक नया नजरिया दिया है। भोपाल के RCVP नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी 'आनंद के आयाम' को संबोधित करते हुए सीएम ने भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के जरिए आनंद की असली परिभाषा समझाई और बताया इंसान कैसे खुश रह सकता है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मानव जीवन में आनंद के आयाम, हमारे सुख और दुख के बीच के अंतर को समझने से पता चलते हैं। आदिकाल से ही भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम की रही है, जिसमें परिवार की धारणा को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने एक ऐतिहासिक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि साल 1956 के विश्व हिंदू सम्मेलन में मार्गरेट थेचर ने भारत और इंग्लैंड की संस्कृति का मूल अंतर सबको समझाया था। उन्होंने कहा था कि भारतीय परिवारों की व्यवस्था में अगर कोई एक सदस्य भी कमाई करता है तो पूरा परिवार आनंद और सम्मान के साथ जीवन जीता है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह अद्भुत व्यवस्था दुनिया में सिर्फ भारत में ही संभव है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम दूसरों के सुख में भी अपने आनंद की अनुभूति प्राप्त कर लें, यही सनातन संस्कृति की चेतना का आधार है। हम सभी को अपने कार्यों को पूरे आनंद, उत्साह और दक्षता के साथ संपादित करना चाहिए। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और माता देवकी के जीवन के कष्टों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यशोदा मैया और नंद बाबा ने कन्हैया के लालन-पालन में आनंद की अनुभूति की, कभी ये नहीं सोचा कि यह किसी और का बच्चा है। डॉ. यादव ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने सुख और दु:ख में 'स्थितप्रज्ञ' होकर आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है, तब भी जब महाभारत में उन्हीं के सैनिक उनके सामने युद्ध लड़ रहे थे।
मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ का जिक्र करते हुए कहा कि वहां साधु-संत भीषण गर्मी में अग्नि स्नान करते देखे जाते हैं। उनके शरीर पर मौसम और कांटों तक का कोई असर नहीं पड़ता है, क्योंकि वे भगवान के समीप साधना के मार्ग से आनंद में डूबते हैं। सनातन संस्कृति में हमारे संत अग्नि वस्त्र धारण कर समाज की कई उलझनों को दूर करने के लिए अपने जीवन का निचोड़ देते हैं।
कार्यक्रम में मौजूद महर्षि मधुसूदन महाराज ने कहा कि संसार के भौतिक जगत को मापने का मापदंड 'मैटा फिजिक्स' तय करती है, जिसमें तत्व ज्ञान और ब्रह्म ज्ञान का अध्ययन किया जाता है। उन्होंने बताया कि आनंद ही ब्रह्म है, जो पूरे संसार को गति प्रदान करता है। ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश की गुलामी के समय बेलियम हेस्टिंग ने गीता को पढ़कर कहा था कि भारत अब लंबे समय तक गुलाम नहीं रहेगा, क्योंकि उन्होंने गीता में आनंद के तत्व ज्ञान को जाना था। बाद में गीता लंदन पहुंची और वहां हर विचारधारा के विद्वानों ने इसे हाथों-हाथ लिया। अमेरिका के विद्वान भी गीता के ज्ञान को 'परफेक्शन' के रूप में देखते हैं, और यह परफेक्शन निरंतर अभ्यास से ही आता है।
आनंद विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने कार्यक्रम में जानकारी दी कि प्रदेश के सभी ब्लॉक स्तर पर शासकीय सेवकों के लिए आनंद से रहने की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसके जरिए शासकीय सेवक स्वयं आनंदित रहना और नागरिकों के साथ कुशल व्यवहार करना सीख रहे हैं। साथ ही, विद्यार्थियों को स्कूल से लेकर कॉलेज तक मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
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