'जुड़वा भाई बनेंगे देश का ग्रोथ इंजन', जयपुर में CM मोहन यादव ने बताया- कैसे एमपी-राजस्थान बनेंगे नया इंडस्ट्रियल हब

Published : Mar 21, 2026, 08:20 PM IST
cm mohan yadav big vision

सार

CM Mohan Yadav Vision: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जयपुर में राजस्थान के निवेशकों को संबोधित करते हुए दोनों राज्यों को 'आर्थिक प्रगति का स्वाभाविक साझेदार' बताया। उन्होंने पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना को गेम-चेंजर करार दिया और कहा कि राजस्थान की उद्यमशीलता और मध्यप्रदेश के संसाधन मिलकर मध्य भारत को नया 'इंडस्ट्रियल पावर सेंटर' बनाएंगे।

भोपाल : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक ऐतिहासिक विजन पेश करते हुए कहा है कि मध्यप्रदेश और राजस्थान जुड़वां भाइयों की तरह हैं। दोनों राज्य मिलकर विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत तैयार कर रहे हैं। सीएम ने कहा कि दोनों प्रदेश केवल सांस्कृतिक विरासत और विविधताओं के ही नहीं, बल्कि आर्थिक प्रगति के भी स्वाभाविक साझेदार हैं। शनिवार को जयपुर में आयोजित 'इन्टरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश' में उन्होंने राजस्थान के निवेशकों को दिल खोलकर एमपी में निवेश का न्योता दिया।

पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना तस्वीर बदलने वाला कदम

मुख्यमंत्री ने राजस्थान के विकसित टेक्सटाइल, जेम्स-एंड-ज्वेलरी और मध्यप्रदेश की ऑर्गेनिक कॉटन क्षमता के साथ मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के मिलन को एक सशक्त वैल्यू चैन के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने पार्वती-कालीसिंध-चंबल राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना पर विशेष जोर देते हुए कहा कि यह 1 लाख करोड़ रुपये की महात्वाकांक्षी योजना दोनों राज्यों के विकास की नई इबारत लिखेगी। इस परियोजना की 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार वहन कर रही है, जबकि राज्यों को मात्र 5-5 प्रतिशत राशि देनी है। डॉ. यादव ने भावुक होते हुए कहा कि हमारे बीच 'रोटी-बेटी' का संबंध तो सदियों से रहा है, अब इस परियोजना के माध्यम से 'पानी' का अटूट संबंध भी स्थापित हो गया है।

प्रधानमंत्री का नेतृत्व और औद्योगिक सुगमता- सीएम

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके नेतृत्व में राज्यों के बीच प्राकृतिक संसाधनों का बंटवारा अत्यंत मधुरता के साथ हो रहा है। उन्होंने राजस्थान के उद्यमियों की बुद्धि और व्यापारिक क्षमता का लोहा मानते हुए उन्हें मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि समय की चुनौतियों के बीच हमारे पास आगे बढ़ने के स्वर्णिम अवसर हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने उद्योग स्थापना के लिए नियमों और कानूनों का सरलीकरण किया है, ताकि निवेशकों को किसी भी प्रकार की बाधा का सामना न करना पड़े।

26 नई नीतियां और भविष्य की तकनीक

औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में 26 प्रकार की नई नीतियां लागू की हैं। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब राज्य सरकार स्पेस और एआई (Artificial Intelligence) सेक्टर के लिए भी विशेष पॉलिसी लाने की तैयारी में है। ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की उपलब्धि गिनाते हुए उन्होंने कहा कि राज्य न केवल बिजली के मामले में आत्मनिर्भर (सरप्लस) है, बल्कि 'ग्रीन, क्लीन और सोलर एनर्जी कैपिटल' के रूप में उभर रहा है। मध्यप्रदेश की बिजली से दिल्ली मेट्रो का संचालन इसका जीवंत प्रमाण है। औद्योगिक इकाइयों को प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।

सेक्टर-वार विकास की रणनीति

माइनिंग, मेडिकल टूरिज्म और डेयरी सेक्टर में भी मध्यप्रदेश लंबी छलांग लगा रहा है। पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खोलने के लिए सरकार मात्र 1 रुपये की लीज पर जमीन उपलब्ध करा रही है। दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए 5 हजार से 50 हजार की क्षमता वाली विशाल गौशालाएं खोली जा रही हैं और गौ-अनुदान को 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये कर दिया गया है। स्कूली बच्चों को नि:शुल्क दूध बांटने जैसी जनकल्याणकारी योजनाएं भी शुरू की गई हैं।

डिजिटल निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर

मुख्यमंत्री ने उन धारणाओं को खारिज किया कि मध्यप्रदेश में उद्योग नहीं टिक सकते। उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि आज मध्यप्रदेश देश के सबसे तेजी से विकसित होते राज्यों में शामिल है। राज्य का 'सिंगल विंडो सिस्टम-इन्वेस्ट एमपी 3.0 पोर्टल' देश के श्रेष्ठ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में शुमार है। उद्योगों और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया है। नर्मदापुरम में पावर और रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट के लिए देश का पहला मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन विकसित किया जा रहा है।

एविएशन और टूरिज्म को प्रोत्साहन

होटल और हॉस्पिटल जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश पर कैपिटल सब्सिडी दी जा रही है। रीवा में टाइगर सफारी और एयरपोर्ट की सौगात के साथ ही राज्य की एविएशन पॉलिसी के तहत हवाई सेवा कंपनियों को 15 लाख रुपये का वीजीएफ (VGF) दिया जा रहा है। 'पीएमश्री हेली सर्विस' के माध्यम से धार्मिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने उत्तरप्रदेश के साथ मुरैना में बिजली बंटवारे के मॉडल का भी उदाहरण दिया, जो आपसी समन्वय की मिसाल है।

साझेदारों और अधिकारियों का भरोसा

इस अवसर पर राजस्थान के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने जल बंटवारे के समाधान की सराहना की। वहीं, मध्यप्रदेश के प्रमुख सचिव (औद्योगिक नीति) राघवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि राज्य के पास निवेश के लिए 1 लाख एकड़ भूमि उपलब्ध है और निवेशकों को 40 प्रतिशत तक कैपिटल सब्सिडी दी जा रही है। राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स के प्रेसिडेंट डॉ. के.एल. जैन ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने औद्योगिक और सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर में लंबी उड़ान भरी है। सत्र के दौरान इन्सुलेशन एनर्जीस के मनीष गुप्ता ने बाबई-मोहासा प्रक्षेत्र में 1650 करोड़ रुपये के निवेश के अपने सकारात्मक अनुभव साझा किए। राजस्थान एंजल्स ग्रुप के चेयरमैन महावीर प्रताप शर्मा ने मध्यप्रदेश की सस्ती बिजली और निवेश अनुकूल वातावरण की तारीफ की।

सीएम की उद्योगपतियों से वन-टू-वन चर्चा

कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जयपुर में कई बड़े उद्योगपतियों महिंद्रा लाइफ साइंसेज, प्रताप ग्रुप और प्लास्टिक मेन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के चीफ से वन-टू-वन चर्चा की। उन्हें 'देश के दिल' मध्यप्रदेश से जुड़ने का न्योता दिया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बेहतर नीतियों, आकर्षक इन्सेंटिव और सरकार के पूर्ण सहयोग के साथ निवेशकों को मध्यप्रदेश में विकास के असीम अवसर मिलेंगे।

 

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