MP Justice: सीएम मोहन यादव बोले- हर नागरिक को न्याय दिलाना सरकार की जिम्मेदारी

Published : Aug 08, 2026, 03:03 PM IST
CM Mohan Yadav

सार

इंदौर में सीएम मोहन यादव ने कहा कि सरकार हर नागरिक को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सुशासन, मध्यस्थता और न्याय तक आसान पहुंच पर जोर दिया।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार सभी नागरिकों को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ लोगों तक आसान, सुलभ और सम्मानजनक तरीके से न्याय पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय परंपरा में पंच-परमेश्वर से लेकर भगवान श्रीकृष्ण के संवाद और समाधान के मार्ग तक न्याय की समृद्ध परंपरा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह बात 8 अगस्त को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 'Enhancing Access to Justice' वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कही। सम्मेलन में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत समेत सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के न्यायाधीश, विधिक सेवा प्राधिकरणों के अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

MP News: न्याय की आसान पहुंच के लिए सरकार प्रतिबद्ध- सीएम मोहन यादव

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) भारतीय न्याय परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सम्मेलन की थीम 'एक आवाज, सशक्त भविष्य, गरिमा और समावेशन के माध्यम से न्याय तक पहुंच' है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व जैसे मूल्यों पर टिकी है। छोटे-छोटे विवादों को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने से अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम किया जा सकता है। सीएम ने कहा कि भारतीय समाज में विवादों के समाधान की परंपरा काफी पुरानी है। पंच-परमेश्वर कभी समझाइश तो कभी आपसी सहमति के जरिए विवादों का समाधान करते रहे हैं। भगवान श्रीकृष्ण के गीता ज्ञान में भी कठिन परिस्थितियों के बीच संवाद और समाधान का रास्ता दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में हजारों वर्षों से चली आ रही न्याय परंपराओं और आधुनिक व्यवस्था का बेहतरीन मेल देखने को मिलता है। देश की अदालतों को लोग न्याय के मंदिर के रूप में देखते हैं और उम्मीद लेकर उनकी चौखट तक पहुंचते हैं।

Justice Access: इंदौर में हुआ वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन

इंदौर में आयोजित इस सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम हुए। 'Ensuring Access Protecting Rights Building Futures' पुस्तक सहित निवारक एवं रणनीतिक विधिक सेवा योजनाओं से संबंधित पुस्तकों का विमोचन किया गया। इसके अलावा 'न्याय सबके लिए', ब्रेल लिपि में विधिक मार्गदर्शिका और 'न्याय के स्वर' का भी विमोचन हुआ। कार्यक्रम में NALSA का थीम सॉन्ग प्रस्तुत किया गया। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने NALSA शिक्षा योजना और थीम सॉन्ग को इंडियन साइन लैंग्वेज में भी लॉन्च किया। इस दौरान 'विवाद से सहमति' नाम से मध्यस्थता पर सर्टिफिकेट कोर्स और Justice to Children Litigation Fellowship Programme की शुरुआत की गई।

MP Government: अंग्रेजों के दौर के गैर-जरूरी कानून खत्म किए गए

सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश बदलाव के दौर से गुजर रहा है। सरकार ने अंग्रेजों के समय के कई गैर-जरूरी कानूनों को खत्म कर न्याय व्यवस्था को अधिक सरल और लोगों के लिए सुलभ बनाने की दिशा में काम किया है। उन्होंने कहा कि ई-केस फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई, डिजिटल डेटा और आधुनिक न्याय प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं से न्याय प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है। पुराने औपनिवेशिक कानूनों की जगह लागू किए गए नए कानूनों का उद्देश्य भी नागरिकों के लिए व्यवस्था को सरल बनाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनविश्वास अधिनियम के जरिए छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने जैसे कदम न्याय व्यवस्था को अधिक नागरिक हितैषी बनाने की दिशा में उठाए गए हैं।

UCC Bill: समान नागरिक संहिता को लेकर भी सीएम ने कही बड़ी बात

सीएम ने बताया कि राज्य सरकार ने सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़े विधेयक को विधानसभा में पारित किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम पूर्व न्यायाधीश रंजना देसाई के नेतृत्व में गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी धर्मों का सम्मान करते हुए सर्वधर्म सद्भाव कायम रखना है। हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सहित किसी भी धर्म के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।

Fast Track Court: पेपर लीक और धोखाधड़ी के मामलों पर तेज कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए पेपर लीक और धोखाधड़ी जैसे मामलों में तेजी से कार्रवाई के लिए चार फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं। हाईकोर्ट जबलपुर के सहयोग से इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में 24 घंटे के भीतर फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए गए। सीएम ने कहा कि इससे ऐसे मामलों के जल्द निपटारे में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश में साइबर सुरक्षा, राष्ट्रीय स्वचालित प्रणाली और ई-जीरो एफआईआर जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं के माध्यम से पुलिस प्रणाली को आधुनिक जरूरतों के मुताबिक मजबूत किया जा रहा है।

Justice Delay: 'न्याय में देरी भी अन्याय के समान'

सीएम मोहन यादव ने कहा कि न्याय मिलने में देरी भी एक तरह का अन्याय है। उन्होंने मालवा की धरती को न्याय और सुशासन की परंपरा से जोड़ते हुए लोकमाता अहिल्याबाई होलकर और सम्राट विक्रमादित्य के उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि करीब 250 वर्ष पहले लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने इंदौर में सुशासन की मिसाल कायम की थी। उनके लिए न्याय करते समय पुत्र और प्रजा के बीच कोई भेदभाव नहीं था। उन्होंने अपने इकलौते पुत्र को भी गलती के लिए उसी तरह दंड दिया, जैसे किसी सामान्य व्यक्ति को दिया जाता। सीएम ने सम्राट विक्रमादित्य का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने भी न्याय के रास्ते से हटने से इनकार किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय न्याय परंपरा में निष्पक्षता और न्याय को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया गया है।

CJI Justice Suryakant: संवाद से निकलेगा न्याय और समाधान का रास्ता

भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सशक्त भविष्य, गरिमा और समावेशन केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि विधिक सहायता की वास्तविक परिभाषा हैं। उन्होंने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के न्याय के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनके लिए न्याय सभी के लिए समान था। वे नागरिकों, किसानों और विधवाओं से सीधे संवाद करती थीं और उनकी समस्याओं को सुनकर समाधान करती थीं। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्याय तक सभी की पहुंच केवल कानून बनाने से सुनिश्चित नहीं हो सकती। इसके लिए संवाद बेहद जरूरी है। किसी विवाद में मध्यस्थता की शुरुआत ही दूसरे पक्ष को सुनने से होती है। पीड़ित को सबसे पहले यह भरोसा होना चाहिए कि उसकी समस्या और पीड़ा को कोई सुन रहा है।

NALSA: सभी के लिए समान संवैधानिक उद्देश्य

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि NALSA के संवाद और चर्चा कार्यक्रमों से राज्य, जिला और तहसील स्तर की विधिक सेवा संस्थाएं जुड़ी हैं। पैरा लीगल वॉलेंटियर्स समाज के सबसे करीब रहकर लोगों की समस्याओं को समझते हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के जनजातीय समुदाय, गोवा के मछुआरे, गुजरात के प्रवासी श्रमिक और मुंबई में रहने वाली महिलाओं की समस्याएं अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए सभी के लिए एक जैसा समाधान नहीं हो सकता। स्थानीय समस्याओं को समझने के लिए स्थानीय भाषा और परिस्थितियों को समझना जरूरी है। उन्होंने डॉक्टर का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह डॉक्टर मरीज से बातचीत करके उसकी समस्या समझता है, उसी तरह किसी समुदाय की परेशानी को जानने के लिए संवाद आवश्यक है।

Equal Justice: समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे न्याय

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि समाज के आखिरी व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना ही समानता की वास्तविक भावना है। हमें यह देखना होगा कि विकास और अधिकारों की दौड़ में कोई पीछे तो नहीं छूट गया। उन्होंने कहा कि असली चुनौती केवल उन लोगों की मदद करना नहीं है, जो हमारे पास पहुंच चुके हैं, बल्कि उन लोगों तक पहुंचना है जो अभी न्याय व्यवस्था तक नहीं आ पाए हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने पैरा लीगल वॉलेंटियर्स को न्याय व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि समानता केवल योजनाएं शुरू करने से नहीं आएगी। संवाद से हर समस्या सुनी जाएगी, गरिमा से लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होगा और समावेशन से यह सुनिश्चित होगा कि कोई पीछे न छूटे।

Good Governance: सुशासन का वास्तविक आधार न्याय- अर्जुन राम मेघवाल

केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया में लोकतंत्र की जननी के रूप में पहचान मिली है। भारतीय सभ्यता में कानून का शासन, प्राकृतिक न्याय, संवाद, मध्यस्थता और लोक कल्याण की परंपरा पहले से रही है। उन्होंने संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान में न्याय को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय भारतीय संवैधानिक व्यवस्था की बुनियाद हैं। अनुच्छेद 39A के जरिए प्रत्येक नागरिक को नि:शुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी तय की गई है।मेघवाल ने कहा कि आर्थिक या सामाजिक स्थिति किसी व्यक्ति को न्याय से वंचित नहीं कर सकती। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने भी न्याय प्रक्रिया को बहुभाषीय और अधिक सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय परंपराएं और सामाजिक विविधता इसे खास बनाती हैं। राजा भोज और देवी अहिल्याबाई होलकर की सुशासन परंपरा यह संदेश देती है कि सुशासन का वास्तविक आधार न्याय है।

Mediation: संवाद और सहमति से आसान होगा विवादों का समाधान

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विक्रम नाथ ने कहा कि NALSA की शिक्षा योजना और इंडियन साइन लैंग्वेज में थीम सॉन्ग न्याय को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में मदद करेंगे। उन्होंने हिंदी में योजनाओं के संस्करण और ब्रेल लिपि में गाइड जारी किए जाने को दिव्यांगजनों के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। इससे दृष्टिबाधित लोग बिना किसी की मदद के विधिक सेवाओं से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने मध्यस्थता पर शुरू किए गए 'विवाद से सहमति' सर्टिफिकेट कोर्स की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि परिवार, पड़ोसी और साझेदारी से जुड़े कई विवादों को बातचीत और आपसी सहमति के जरिए सुलझाया जा सकता है। मध्यस्थता के जरिए समाधान किसी पक्ष पर थोपा नहीं जाता, बल्कि दोनों पक्ष मिलकर सहमति से रास्ता निकालते हैं।

Access to Justice: हर नागरिक को मिले न्याय की आसान पहुंच

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मनमोहन ने कहा कि न्याय केवल कानून और अदालतों तक सीमित अवधारणा नहीं है। न्याय व्यवस्था पर नागरिकों का भरोसा होना जरूरी है कि मुश्किल समय में वे संबंधित मंच तक पहुंचेंगे और उनकी समस्या के समाधान की प्रक्रिया शुरू होगी। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए संवाद, सम्मान और समानता पर जोर देना होगा। मध्यस्थता मामलों के निपटारे का प्रभावी माध्यम बन सकती है। उन्होंने कहा कि न्याय को केवल विवाद खत्म करने की प्रक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य की मजबूत व्यवस्था के रूप में देखना चाहिए। समाज के हर वर्ग और विशेष रूप से जनजातीय समुदायों तक न्याय की आसान पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है।

MP High Court: न्याय को समाज के हर व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश विवेक रुसिया ने कहा कि यह सम्मेलन न्याय तक पहुंच के संकल्प को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि सभी संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों से न्याय हर व्यक्ति के लिए उम्मीद और भरोसे की किरण बन सकता है। उन्होंने कहा कि Access to Justice केवल संवैधानिक विचार नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। समानता को किसी तरह की मदद या चैरिटी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने तकनीकी नवाचारों की मदद से विधिक सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने लोक अदालतों, कारागार सुधार, जनजातीय क्षेत्रों में विधिक सेवाओं के विस्तार और प्रशिक्षित मध्यस्थों के जरिए अदालत से पहले विवादों के समाधान की पहल को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं, ताकि न्याय व्यवस्था वास्तव में समाज के हर वर्ग के लिए सरल, सहज और सम्मानजनक बन सके।

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