
मध्यप्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को आधुनिक बनाने के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में डिजिटल कृषि व्यवस्था से लेकर फसल ऋण और खाद वितरण तक नई पहल की गई हैं। एग्रीस्टैक योजना के बेहतर क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश को देश में पहला स्थान मिला है। इसके तहत 1.20 करोड़ से ज्यादा किसानों की आईडी बनाई जा चुकी हैं। वहीं, बालाघाट का जीआई टैग प्राप्त चिन्नौर चावल भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रहा है।
केंद्र सरकार की एग्रीस्टैक व्यवस्था के तहत मध्यप्रदेश में किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 1.20 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनाई गई हैं। साथ ही करीब 4 करोड़ से ज्यादा खेतों का सर्वे कर उनका जियो रेफरेंस किया गया है। इससे किसानों तक सरकारी योजनाओं और कृषि से जुड़ी सुविधाएं पहुंचाने में मदद मिलेगी।
मध्यप्रदेश में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना लागू की गई है। वर्ष 2026 में सरसों और सोयाबीन के लिए इस योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके अलावा उड़द की सरकारी खरीदी पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के साथ 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है।
रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के तहत 15 जिलों के 4 हजार किसानों से 3 हजार मीट्रिक टन श्रीअन्न खरीदा गया है। किसानों को इसके लिए 1 हजार रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि भी दी गई है।
प्रदेश में खाद वितरण के लिए ई-विकास डिजिटल प्रणाली अपनाई गई है। सरकार के अनुसार, इसके माध्यम से पात्र किसानों तक उर्वरक पहुंचाने में मदद मिली और 764.65 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी की बचत हुई। मंडियों में भी सफाई, ग्रेडिंग और पैकेजिंग की सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।
ब्याज रहित फसल ऋण योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 35 लाख किसानों को 24 हजार करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया। वहीं, 2026-27 में अब तक 15 हजार करोड़ रुपये का फसल ऋण दिया जा चुका है। किसानों को कृषि संबंधी जानकारी देने के लिए हेल्पलाइन नंबर 155253 भी शुरू किया गया है।
मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले का जीआई टैग प्राप्त चिन्नौर चावल भी चर्चा में है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन 2026 में इसका विशेष स्टॉल लगाया गया। यहां राष्ट्रीय और विदेशी खरीदारों को चिन्नौर चावल की खुशबू, स्वाद और गुणवत्ता के बारे में जानकारी दी गई।
लालबर्रा चिन्नौर फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने इस आयोजन में बालाघाट का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2021 में चिन्नौर चावल को जीआई टैग मिला था। अब अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ सीधे बातचीत से इसके निर्यात की संभावनाएं बढ़ी हैं। इससे स्थानीय धान उत्पादक किसानों को भी नए बाजार मिलने की उम्मीद है।
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