देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में नल का पानी कैसे बना जहर? जिसे पीने से भागीरथपुरा में 200 से ज्यादा लोग पहुंचे अस्पताल, 32 ICU में और मौतों का आंकड़े पर सवाल। क्या पहले की चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया? कमिश्नर हटे,अफसर सस्पेंड-असली जिम्मेदार कौन?
IMC Shake-Up: इंदौर दूषित पानी कांड में बड़ा प्रशासनिक एक्शन
Indore Water Contamination: मध्य प्रदेश का इंदौर, जिसे देश का सबसे स्वच्छ शहर कहा जाता रहा है, आज दूषित पानी संकट को लेकर सुर्खियों में है। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में नल के पानी से फैली बीमारी ने सैकड़ों लोगों को बीमार कर दिया है। इस Indore Water Contamination मामले में अब तक 200 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें 32 मरीज ICU में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए नगर निगम कमिश्नर को हटा दिया है।
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दूषित पानी से कैसे बिगड़े हालात?
29 दिसंबर के बाद से भागीरथपुरा में लोगों को दस्त, उल्टी और तेज बुखार की शिकायत होने लगी। धीरे-धीरे अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती गई। जांच में सामने आया कि नल का पानी दूषित था। जैसे-जैसे बीमारी फैली, मौतों की खबरें भी आने लगीं। अब तक इस संकट में 10 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।
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प्रशासन पर गिरी गाज क्यों?
इस इंदौर डायरिया संकट के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए इंदौर नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव को हटा दिया और अतिरिक्त कमिश्नर रोहित सिसोनिया को सस्पेंड कर दिया। जल वितरण विभाग के प्रभारी इंजीनियर को भी उनके पद से हटा दिया गया है। सरकार का कहना है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस मामले ने तब और तूल पकड़ा जब यह सामने आया कि दो साल पहले ही पाइपलाइन बदलने की चेतावनी दी गई थी। भाजपा पार्षद कमल वाघेला ने दावा किया कि उन्होंने भागीरथपुरा की खराब पाइपलाइन को लेकर नगर निगम को पत्र लिखा था। आरोप है कि फाइल बनी, लेकिन महीनों तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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मौतों के आंकड़ों पर क्यों है विवाद?
इस मामले में मौतों के आंकड़ों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को सौंपी रिपोर्ट में चार मौतों की बात कही है, जबकि इंदौर के महापौर ने 10 मौतों की पुष्टि की है। इस विरोधाभास ने लोगों में और चिंता बढ़ा दी है।
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अभी हालात कैसे हैं?
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अब तक 294 मरीज भर्ती किए गए थे, जिनमें से कुछ को छुट्टी मिल चुकी है। फिलहाल करीब 201 मरीज अस्पताल में हैं और 32 ICU में हैं। प्रशासन ने लोगों से नल का पानी न पीने, टैंकर का पानी इस्तेमाल करने और पानी उबालकर पीने की अपील की है।
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क्या आगे और कार्रवाई होगी?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ कहा है कि लोगों की सेहत से कोई समझौता नहीं होगा। दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और सख्त कार्रवाई होगी। दूसरी तरफ कांग्रेस एवं अन्य सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया हैद्ध कांग्रेस ने स्वास्थ्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की तस्वीर को पानी में डुबोया और विरोध जताया।
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