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कई अफसर नप गए! दूषित पानी बना आफत, सीएम मोहन यादव ने इंदौर अफसरों पर चला दिया डंडा
इंदौर में दूषित पेयजल आपूर्ति मामले पर सीएम मोहन यादव का सख्त रुख सामने आया है। रिव्यू बैठक के बाद नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ। लापरवाही पर कार्रवाई तेज, पूरे प्रदेश में समीक्षा के आदेश।

इंदौर की घटना ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें, सीएम मोहन यादव का कड़ा एक्शन
मध्य प्रदेश की सियासत में इंदौर की घटना ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। दूषित पेयजल सप्लाई को लेकर सामने आई गंभीर लापरवाही ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सरकार को भी विपक्ष के तीखे हमलों का सामना करना पड़ रहा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रिव्यू बैठक के बाद सख्त फैसले लेते हुए बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
रिव्यू मीटिंग के बाद सीएम का बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इंदौर में दूषित पेयजल प्रकरण की समीक्षा की। बैठक के बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि राज्य शासन द्वारा की जा रही कार्रवाई की विस्तार से समीक्षा की गई और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
इंदौर नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को कारण बताओ नोटिस
रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री ने इंदौर नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही अपर आयुक्त को तत्काल प्रभाव से इंदौर से हटाने और प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस लेने का आदेश दिया गया है। नगर निगम में खाली पड़े आवश्यक पदों पर तुरंत नियुक्ति के भी निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले भी इस मामले में कुछ अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है।
प्रदेशभर में होगी सख्ती, शाम को बुलाई गई अहम बैठक
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि इंदौर की घटना के बाद सरकार सिर्फ कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
इसी कड़ी में प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों के महापौर, अध्यक्ष, आयुक्त, जिला कलेक्टर, स्वास्थ्य विभाग, नगरीय विकास विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की वर्चुअल बैठक शाम को बुलाई गई है। इस बैठक में पूरे प्रदेश की स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
विपक्ष के निशाने पर सरकार, और कार्रवाई के संकेत
इंदौर की घटना के बाद सरकार विपक्ष के निशाने पर है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट और स्थानीय लोगों की शिकायतों के अनुसार यह मामला पूरी तरह प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा माना जा रहा है। नगर विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी प्रभावित इलाकों में लगातार कैंप कर हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
संकेत हैं कि आने वाले दिनों में कुछ और अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। इंदौर की घटना ने सरकार के सामने प्रशासनिक जवाबदेही और जनविश्वास बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
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