
भोपाल/अहमदाबाद। मध्यप्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत बनाने और बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए टोरेंट ग्रुप बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। समूह की संचालित और प्रस्तावित परियोजनाओं के जरिए प्रदेश में 43 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा रहा है। इससे करीब 15 हजार से अधिक युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
यह जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 12 अगस्त को गुजरात के अहमदाबाद में टोरेंट ग्रुप और टोरेंट पावर लिमिटेड के चेयरमैन समीर मेहता के साथ हुई बैठक के बाद दी। इस दौरान औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, सचिव जॉन किंसले और एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला भी मौजूद रहे।
राज्य की दीर्घकालिक बिजली जरूरतों को देखते हुए अनूपपुर जिले में टोरेंट पावर 1,600 मेगावाट क्षमता की अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत परियोजना विकसित कर रही है। इस परियोजना में लगभग 22 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। परियोजना से करीब 7 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) के साथ 27 जनवरी 2026 को पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) भी हो चुका है।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और एलएंडटी तथा टाटा प्रोजेक्ट्स जैसी प्रमुख कंपनियों को निर्माण कार्य सौंपा गया है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद परियोजना स्थल पर प्री-कंस्ट्रक्शन गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए छिंदवाड़ा जिले में 1,500 मेगावाट क्षमता की पातालकोट पंप्ड स्टोरेज परियोजना पर काम जारी है। इस परियोजना में 7,500 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है और इससे लगभग 4 हजार रोजगार सृजित होने की संभावना है। इसके अलावा रतलाम और उज्जैन में 250 मेगावाट क्षमता की पवन ऊर्जा परियोजनाएं भी विकास के चरण में हैं। इन परियोजनाओं में करीब 2 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा और लगभग 500 लोगों को रोजगार मिलेगा। मंदसौर जिले में टोरेंट ग्रुप की 36 मेगावाट क्षमता वाली पवन ऊर्जा इकाई पहले से सफलतापूर्वक संचालित हो रही है।
टोरेंट ग्रुप प्रदेश में एक और बड़ी अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर परियोजना विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। 800 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना में लगभग 11 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इस परियोजना के जरिए करीब 3,500 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई गई है। राज्य सरकार इसे भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मान रही है।
मध्यप्रदेश में लगातार बढ़ रही बिजली मांग को देखते हुए राज्य सरकार भविष्य की तैयारियों में जुट गई है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के आकलन के अनुसार वर्ष 2036-37 तक प्रदेश को करीब 1,900 मेगावाट अतिरिक्त ताप विद्युत क्षमता की जरूरत होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 2,800 मेगावाट ताप विद्युत क्षमता के क्रय के लिए DBFOO (Design, Build, Finance, Own and Operate) मॉडल पर नई निविदा प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने टोरेंट पावर को भी इस प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी निविदा प्रक्रिया में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है।
टोरेंट ग्रुप केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। समूह धार जिले के पीथमपुर में USFDA से अनुमोदित आधुनिक फार्मा विनिर्माण इकाई का भी सफल संचालन कर रहा है। करीब 300 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित इस इकाई में 400 से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। यह इकाई प्रदेश के फार्मा उद्योग को भी मजबूती देने का काम कर रही है।
अहमदाबाद स्थित टोरेंट ग्रुप देश के प्रमुख औद्योगिक समूहों में गिना जाता है। समूह ऊर्जा, फार्मास्युटिकल्स और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है। टोरेंट पावर की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग 5.1 गीगावाट है। कंपनी ने वर्ष 2030 तक 10 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य तय किया है।
इसके लिए कंपनी सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स, बैटरी स्टोरेज और पंप्ड स्टोरेज जैसी आधुनिक परियोजनाओं में लगातार निवेश कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि टोरेंट ग्रुप का यह व्यापक निवेश मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और रोजगार सृजन को नई गति देगा।
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