मध्यप्रदेश स्थापना दिवस 2026 इस बार ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ थीम पर मनाया जाएगा। कृषि नवाचार, किसान सम्मान, देशज व्यंजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विकसित मध्यप्रदेश-2047 आकर्षण होंगे।
मध्यप्रदेश का स्थापना दिवस इस बार सिर्फ रोशनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और आतिशबाजी तक सीमित नहीं रहने वाला है। 1 नवंबर 2026 को होने वाले स्थापना दिवस समारोह को प्रदेश की कृषि ताकत, किसान कल्याण और भविष्य के विकास मॉडल से जोड़ने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि इस बार समारोह की थीम ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ रहे और कृषि क्षेत्र में काम करने वाले किसानों, युवाओं व उद्यमियों को विशेष मंच दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में हुई बैठक में कहा कि वर्ष 2026 को प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। ऐसे में स्थापना दिवस के कार्यक्रमों में भी कृषि विकास और किसान कल्याण को प्रमुखता दी जाए।
कृषि से लेकर प्राकृतिक खेती तक, दिखेगी नई तस्वीर
स्थापना दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में उन्नत कृषि, प्राकृतिक खेती और कृषि क्षेत्र में हुए नवाचारों पर प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। खास बात यह होगी कि केवल योजनाओं की जानकारी देने के बजाय कृषि में उपलब्धियां हासिल करने वाले किसानों, उद्यमियों और युवाओं को सम्मानित भी किया जाएगा। यानी इस बार समारोह में मध्यप्रदेश की कृषि कहानी को उपलब्धियों और नए प्रयोगों के साथ सामने रखने की कोशिश होगी।
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‘विकसित मध्यप्रदेश-2047’ भी रहेगा आकर्षण
71वें मध्यप्रदेश स्थापना समारोह का राज्य स्तरीय आयोजन लाल परेड ग्राउंड में प्रस्तावित है। यहां ‘विकसित मध्यप्रदेश-2047’, ‘एक जिला-एक उत्पाद’, प्रदेश के जननायक, पारंपरिक कलाएं, मंदिर स्थापत्य और भारत की ऋषि परंपरा सहित कई विषयों पर प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। इसके अलावा ‘विरासत से विकास’ और कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इससे स्थापना दिवस समारोह को प्रदेश के अतीत, वर्तमान और भविष्य को एक साथ जोड़ने वाला स्वरूप देने की तैयारी है।
देशज व्यंजनों से लेकर सुगम संगीत तक
समारोह में मध्यप्रदेश के पारंपरिक खान-पान को भी खास जगह मिलेगी। बैठक में देशज व्यंजनों का मेला आयोजित करने की जानकारी दी गई है। इससे प्रदेश के अलग-अलग इलाकों के स्थानीय स्वाद और खान-पान को एक मंच पर लाने का मौका मिलेगा। 1 नवंबर की शाम सुगम संगीत का भव्य कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश के प्रतिष्ठित कलाकार प्रस्तुति देंगे। कार्यक्रम के दौरान आतिशबाजी भी आकर्षण का हिस्सा होगी।
जिलों में भी दिखेगी स्थानीय पहचान
स्थापना दिवस का आयोजन सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री ने जिला स्तर पर भी कार्यक्रमों को उत्साह के साथ आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। जिला मुख्यालयों पर सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ स्थानीय उपलब्धियों और जिला उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें जनप्रतिनिधियों के साथ समाजसेवी, उद्योगपति, कारोबारी, धर्मगुरु, स्वयंसेवी संस्थाएं, स्वतंत्रता सेनानी और लोकतंत्र सेनानी सहित विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को आमंत्रित किया जाएगा। शहीद सैनिकों के परिजनों और उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले स्व-सहायता समूहों व स्टार्टअप से जुड़े लोगों को भी विशेष रूप से शामिल किया जाएगा।
1 नवंबर की रात जगमगाएंगे सरकारी भवन
स्थापना दिवस के मौके पर प्रदेश के सभी शासकीय भवनों को 1 नवंबर की रात रोशन करने के निर्देश भी दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने समारोह में अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। इस बार मध्यप्रदेश स्थापना दिवस की पूरी तस्वीर देखें तो इसमें एक तरफ प्रदेश की संस्कृति और विरासत है, तो दूसरी तरफ कृषि, स्थानीय उत्पाद, युवा उद्यमिता और 2047 के विकास का विजन। यानी सरकार स्थापना दिवस को केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि प्रदेश की उपलब्धियों और भविष्य की दिशा दिखाने वाले मंच के रूप में पेश करने की तैयारी में है।
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