भारत में Project Cheetah का विस्तार हो रहा है। कुनो और गांधी सागर के बाद नौरादेही तीसरा चीता हैबिटेट बनेगा, जहां दो चीतों को रिलीज किया जाएगा।

भारत में चीता पुनर्स्थापना की मुहिम अब एक और अहम पड़ाव पर पहुंच गई है। मध्य प्रदेश में आज चीतों को उनके तीसरे ठिकाने पर बसाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व यानी पुराने नौरादेही अभयारण्य में चीतों को रिलीज करेंगे।

इसे सिर्फ दो चीतों को नए जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। यह Project Cheetah के विस्तार और भारत में बढ़ती चीता आबादी को नए इलाकों में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है। कुनो नेशनल पार्क और गांधी सागर के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश का तीसरा चीता हैबिटेट बनने जा रहा है।

1952 में विलुप्त हुआ चीता, 70 साल बाद भारत में वापसी

भारत में चीते को 1952 में विलुप्त घोषित किया गया था। इसके करीब 70 साल बाद सितंबर 2022 में Project Cheetah के तहत नामीबिया से आठ चीते भारत लाए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्हें मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से भी चीते भारत लाए गए। इस पूरी मुहिम का उद्देश्य सिर्फ अफ्रीकी चीतों को भारत लाना नहीं था। लक्ष्य था कि देश में ऐसी परिस्थितियां तैयार की जाएं, जहां चीते लंबे समय तक रह सकें, प्रजनन कर सकें और उनकी आबादी अपने दम पर बढ़ सके।

Project Cheetah में बड़ी कामयाबी, भारत में पैदा हुए चीता शावक

इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक भारत में चीतों का सफल प्रजनन है। 2023 में सात दशक से अधिक समय बाद भारतीय धरती पर पहली बार चीता शावकों का जन्म हुआ। इसके बाद लगातार कई लिटर सामने आए और भारत में जन्मे चीतों की संख्या बढ़ती गई। यानी Project Cheetah अब सिर्फ विदेशों से चीतों को लाने तक सीमित नहीं है। भारत में उनकी अगली पीढ़ी तैयार हो रही है।

अब भारत में जन्मी मादा चीता भी बन रही है मां

चीता संरक्षण की कहानी अब एक और महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है। भारत में जन्मी मादा चीता खुद मां बनने लगी हैं। अप्रैल 2026 में भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने कुनो में चार शावकों को जन्म दिया था। सितंबर 2026 में उसने दोबारा चार शावकों को जन्म दिया। इसके बाद 5 अक्टूबर को भारत में जन्मी 32 महीने की मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया।

यह भारत में जन्मी किसी मादा चीता की तीसरी ऐसी उपलब्धि है। इसके साथ देश में चीतों की कुल संख्या 60 हो गई है। इनमें 41 चीते भारत में जन्मे हैं। Project Cheetah के लिहाज से यह आंकड़ा खास महत्व रखता है, क्योंकि यह बताता है कि भारत में चीता आबादी अब अगली पीढ़ी तक पहुंच रही है।

Nauradehi में चीते क्यों बसाए जा रहे हैं?

चीतों की संख्या बढ़ने के साथ अब उनके लिए नए सुरक्षित इलाकों की जरूरत भी बढ़ रही है। रणनीति यह है कि पूरी आबादी को सिर्फ कुनो तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें अलग-अलग उपयुक्त और सुरक्षित क्षेत्रों में फैलाया जाए। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व करीब 2,339 वर्ग किलोमीटर में फैला है और यह मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। यहां खुले जंगल, घास के मैदान और चीतों के लिए पर्याप्त शिकार उपलब्ध है।

वैज्ञानिक आकलन में भी इस इलाके को चीतों के लिए उपयुक्त माना गया है। शुरुआत में चीतों को करीब 439 हेक्टेयर के soft-release enclosure में रखा जाएगा। इस दौरान उनके स्वास्थ्य, व्यवहार और नए वातावरण के साथ अनुकूलन पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।

Kuno से आगे बढ़ रहा है Project Cheetah

अब तक भारत की चीता पुनर्स्थापना योजना का सबसे बड़ा केंद्र कुनो नेशनल पार्क रहा है। लेकिन नौरादेही में चीतों की मौजूदगी इस पूरी परियोजना को एक नए भौगोलिक विस्तार तक ले जाएगी। इसके बाद मध्य प्रदेश में चीता संरक्षण और पुनर्स्थापना के तीन प्रमुख केंद्र होंगे-

  • कुनो नेशनल पार्क
  • गांधी सागर वाइल्डलाइफ सेंचुरी
  • वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व

यानी Project Cheetah का लक्ष्य अब केवल चीतों की संख्या बढ़ाना नहीं रह गया है। इसके साथ उनकी आबादी को अलग-अलग सुरक्षित और उपयुक्त इलाकों में फैलाना भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। नौरादेही में चीतों की एंट्री इसी रणनीति की अगली बड़ी कड़ी है।