
उज्जैन में बाबा महाकाल की पांचवीं सवारी रविवार को आस्था, परंपरा और संस्कृति के भव्य संगम के रूप में नजर आई। इस खास मौके पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी सवारी में शामिल हुए। दत्त अखाड़ा से नाव के जरिए रामघाट पहुंचे मुख्यमंत्री ने पालकी में विराजित भगवान चन्द्रमोलेश्वर का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि व खुशहाली की कामना की।
31 अगस्त को उज्जैन में आयोजित भगवान महाकालेश्वर की पांचवीं सवारी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी खास आकर्षण रही। वे दत्त अखाड़ा से नाव में सवार होकर रामघाट पहुंचे। महाकालेश्वर की सवारी के रामघाट पहुंचने के बाद पालकी में विराजित भगवान चन्द्रमोलेश्वर का पूजन किया गया। पुजारी आशीष शर्मा ने मां शिप्रा के पवित्र जल से भगवान चन्द्रमोलेश्वर का जलाभिषेक कराया।
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बाबा महाकाल की सवारी रामघाट पहुंची तो आसमान से पुष्पवर्षा की गई। हेलीकॉप्टर से हुई फूलों की बारिश ने इस धार्मिक आयोजन को और भव्य बना दिया। इस दौरान 1100 बटुकों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया, जिससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक माहौल बन गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए मौजूद रहे।
महाकाल की पांचवीं सवारी में धर्म और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिला। आयोजन में 500 से अधिक कलाकारों वाले 8 जनजातीय दलों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इस बार सवारी की विशेष योजना 84 महादेव की थीम पर की गई थी। परंपरागत मार्ग से निकाली गई सवारी में धार्मिक परंपराओं के साथ आधुनिक तकनीक का भी समन्वय दिखाई दिया। पुलिस बैंड की प्रस्तुति ने भी श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सनातन संस्कृति और चेतना का गौरव दुनिया भर में बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिली है। सीएम के अनुसार, उज्जैन में श्री महाकाल लोक के निर्माण के बाद धार्मिक पर्यटन का तेजी से विस्तार हुआ है। इसका असर रोजगार, स्थानीय व्यापार और प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने धार्मिक पर्यटन को आस्था के साथ-साथ मध्य प्रदेश की समृद्धि और विकास का मजबूत माध्यम बताया।
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