
मध्यप्रदेश में खेती को सिर्फ एक पेशा नहीं बल्कि जीवन का आधार माना जाता है। यही वजह है कि राज्य सरकार लगातार ऐसे कदम उठा रही है जिससे किसानों की आमदनी बढ़े और खेती को आधुनिक बनाया जा सके। इसी दिशा में जबलपुर के जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित कृषि मंथन कार्यशाला में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों, वैज्ञानिकों और कृषि स्टार्ट-अप्स के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और खेती भी इस विकास का बड़ा हिस्सा है। मध्यप्रदेश में खेती और उससे जुड़े व्यवसायों को सम्मान के साथ देखा जाता है। इसी सोच के साथ प्रदेश में पूरे साल “समृद्ध किसान-समृद्ध मध्यप्रदेश” थीम पर कृषि उत्सव मनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि भारत में खेती की परंपरा हजारों साल पुरानी है। हमारे ऋषि-मुनियों ने प्रकृति के साथ जीने का रास्ता खेती के जरिए ही बताया है। भीमबेटका जैसे ऐतिहासिक स्थानों पर भी प्राचीन काल से खेती के प्रमाण मिलते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में किसान और खेती दोनों का विशेष सम्मान है। उन्होंने यह भी कहा कि एक समय ऐसा था जब देश में अनाज की कमी होती थी, लेकिन आज हमारे कृषि वैज्ञानिक नई किस्में विकसित कर रहे हैं और उत्पादन लगातार बढ़ रहा है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य सिर्फ किसानों को सुविधाएं देना नहीं है, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और बेहतर बाजार से भी जोड़ना है। इसी सोच के साथ कृषि मंथन कार्यशाला का आयोजन किया गया, जहां किसानों के अनुभव, वैज्ञानिकों के शोध और सरकार की योजनाओं को एक साथ लाने की कोशिश की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और गौमाता के पूजन के साथ हुई। इस मौके पर उन्नत बीज, औषधीय पौधों, खाद्य प्रसंस्करण और आधुनिक कृषि फसलों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य और वाद्य यंत्रों के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 23 करोड़ 21 लाख रुपये की लागत से बने कई विकास कार्यों का लोकार्पण किया। इनमें जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय का नया प्रशासनिक भवन, बोहानी गन्ना अनुसंधान केंद्र का भवन, बालाघाट के वारासिवनी कृषि महाविद्यालय में कौशल विकास केंद्र और जबलपुर में स्वचालित तरल जैव उर्वरक उत्पादन केंद्र शामिल हैं। इसके अलावा किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग की कई नई इकाइयों का भी उद्घाटन किया गया, जिनमें रीवा और शहडोल के ज्ञान प्रसार केंद्र शामिल हैं।
कृषि मंथन कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित 10 कृषि स्टार्ट-अप्स को 10 करोड़ रुपये से ज्यादा के स्वीकृति पत्र भी दिए। साथ ही विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरित किया गया और कृषि सखी प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत भी की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश देश में प्राकृतिक खेती करने वाले राज्यों में सबसे आगे है। प्रदेश में प्राकृतिक खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि उज्जैन में बाबा महाकाल के प्रसाद के लिए रागी के लड्डू तैयार किए जा रहे हैं, जो स्थानीय किसानों के लिए भी अवसर बना रहे हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि खेती के साथ पशुपालन, उद्यानिकी और फूड प्रोसेसिंग को जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश में दूध उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। अभी राज्य देश के कुल दूध उत्पादन में लगभग 9 प्रतिशत योगदान देता है, जिसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक के बच्चों को मुफ्त दूध के पैकेट देने का फैसला किया गया है। इससे बच्चों को पोषण मिलेगा और दूध की मांग भी बढ़ेगी।
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