
कभी गर्मियों में सूखते कुएं, खाली तालाब और पेयजल संकट से जूझते गांव आज धीरे-धीरे बदलते नजर आ रहे हैं। मध्यप्रदेश में पानी को लेकर चल रही सबसे बड़ी सरकारी मुहिम अब जमीनी असर दिखाने लगी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में चल रहा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि गांवों को जल संकट से स्थायी राहत देने की कोशिश बन चुका है।
प्रदेश सरकार का दावा है कि अभियान के तहत अब तक 1.77 लाख से अधिक जल संरक्षण कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इन कार्यों पर 6 हजार 201 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत स्वीकृत की गई है। खास बात यह है कि यह अभियान केवल कागजों तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि खेत तालाब, सूखे कुओं का पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन जैसी परियोजनाएं गांवों में सीधे नजर आने लगी हैं।
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‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की शुरुआत विक्रम उत्सव 2026 के तहत की गई थी। इसका मकसद प्रदेश की पुरानी जल संरचनाओं को पुनर्जीवित करना और नए जल स्रोत तैयार करना है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा के सहयोग से चल रहे इस अभियान में कुल 2 लाख 42 हजार 188 कार्यों का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार ने इसके लिए ₹6,201.81 करोड़ का बजट स्वीकृत किया है, जिसमें से अब तक ₹4,443.85 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। योजना की मूल अवधारणा है - “खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में”। यानी बारिश की हर बूंद को स्थानीय स्तर पर रोकने की कोशिश।
अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में ‘डग वेल रिचार्ज’ यानी सूखे कुओं का पुनर्भरण शामिल है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 88,123 से अधिक कुओं को दोबारा रिचार्ज किया जा चुका है। ग्रामीण इलाकों में यह पहल बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि भू-जल स्तर गिरने से सबसे ज्यादा असर किसानों और ग्रामीण परिवारों पर पड़ता है। इसके अलावा 53,568 खेत तालाबों का निर्माण पूरा हो चुका है। इन तालाबों से किसानों को सिंचाई में मदद मिलने के साथ पशुपालन और भू-जल संरक्षण में भी फायदा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
राज्य सरकार का कहना है कि वैज्ञानिक पद्धतियों से Rain Water Harvesting की क्षमता बढ़ाने पर खास फोकस किया गया है। इसी का असर है कि प्रदेश में जल संरक्षण कार्यों की रफ्तार तेजी से बढ़ी है। जल पुनर्भरण से जुड़े 27 हजार से ज्यादा अन्य कार्य भी पूरे किए जा चुके हैं। अभियान के तहत सिर्फ निर्माण कार्य ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। स्कूलों में पानी की टंकियों की सफाई, वृक्षारोपण और स्थानीय जल स्रोतों की सफाई जैसे काम भी बड़े पैमाने पर कराए जा रहे हैं।
14 मई 2026 की ताजा रैंकिंग के मुताबिक Khandwa जिला जल गंगा संवर्धन अभियान में पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर है। खंडवा ने 7.51 स्कोर हासिल किया है। यहां 9,131 कार्य शुरू किए गए, जिनमें 2,944 कार्य पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। दूसरे स्थान पर खरगोन रहा, जिसने वित्तीय प्रगति में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इसके बाद बड़वानी, उज्जैन और राजगढ़ शीर्ष जिलों में शामिल रहे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस तरह की परियोजनाएं लगातार जमीन पर प्रभावी तरीके से चलती रहीं तो आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में भू-जल स्तर में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। खासकर वे इलाके जहां हर साल गर्मियों में पेयजल संकट गहराता है, वहां यह मॉडल राहत देने वाला साबित हो सकता है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अभियान को जनभागीदारी से जुड़ा आंदोलन बताते हुए कहा है कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के अस्तित्व से जुड़ा विषय है। सरकार का लक्ष्य स्थायी जल संरचनाओं के जरिए भविष्य में पानी की कमी को कम करना और किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है।
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