
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश में कैबिनेट बैठकों के आयोजन को लेकर एक नई परंपरा शुरू की है। अब केवल भोपाल के मंत्रालय में ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अलग-अलग ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जनजातीय महत्व वाले स्थानों पर भी मंत्रिपरिषद की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इसका उद्देश्य विकास से जुड़े फैसलों को प्रदेश के हर अंचल तक पहुंचाना और स्थानीय विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।
इसी क्रम में 19 जुलाई को राजधानी भोपाल के समीप स्थित ऐतिहासिक गांव जगदीशपुर में मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित की जा रही है। यह स्थान अपने प्राचीन महलों और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है। सरकार का मानना है कि ऐसे स्थानों पर कैबिनेट बैठक होने से आम लोगों में इन धरोहरों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और पर्यटन को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा।
प्रदेश सरकार ने पहले भी महेश्वर, सिंग्रामपुर, खजुराहो, पचमढ़ी, राजवाड़ा और नागलवाड़ी जैसे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के स्थानों पर कैबिनेट बैठकें आयोजित की हैं। इन बैठकों के बाद इन स्थलों को लेकर लोगों की रुचि और जानकारी में बढ़ोतरी देखने को मिली है। सरकार का मानना है कि इस पहल से प्रदेश की पुरातात्विक और सांस्कृतिक धरोहरों को नई पहचान मिलेगी। साथ ही भविष्य में इन स्थानों पर पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पिछले ढाई वर्षों के दौरान भोपाल में होने वाली नियमित बैठकों के अलावा प्रदेश के विभिन्न जिलों में सात कैबिनेट बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इनमें जबलपुर, दमोह, खरगोन, नर्मदापुरम, छतरपुर और बड़वानी जैसे जिले शामिल हैं। इन सभी बैठकों में प्रदेश के विकास, जनकल्याण और प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए गए। इस नवाचार को आम जनता ने भी सकारात्मक रूप से स्वीकार किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सामान्य कैबिनेट के साथ-साथ कृषि कैबिनेट की बैठकें भी प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसी योजना के तहत बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में भी भविष्य में कैबिनेट बैठक प्रस्तावित है। इस पहल से स्थानीय जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समन्वय बेहतर हुआ है। साथ ही सरकार का उद्देश्य यह भी है कि प्रदेश के छोटे से छोटे क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं और विकास संबंधी मुद्दों पर वहीं जाकर निर्णय लिए जाएं।
कैबिनेट बैठकों के लिए ऐसे स्थानों का चयन किया गया है, जिनका संबंध प्रदेश की महान विभूतियों और गौरवशाली इतिहास से रहा है। इनमें वीरांगना रानी दुर्गावती, लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर और जनप्रिय शासक राजा भभूत सिंह जैसे महान व्यक्तित्वों की स्मृतियों से जुड़े स्थल शामिल हैं। दमोह के सिंग्रामपुर, खरगोन के महेश्वर, नर्मदापुरम के पचमढ़ी, छतरपुर के खजुराहो, इंदौर के राजवाड़ा और बड़वानी के नागलवाड़ी में आयोजित बैठकों के माध्यम से सरकार ने इन महान विभूतियों को श्रद्धांजलि भी दी है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के गौरवशाली इतिहास और महान व्यक्तित्वों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में यह पहल शुरू की। वर्ष 2024 की शुरुआत में 3 जनवरी को जबलपुर के शक्ति भवन में पहली बार राजधानी से बाहर कैबिनेट बैठक आयोजित की गई।
इसके बाद विश्व धरोहर स्थल खजुराहो, प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पचमढ़ी और अन्य ऐतिहासिक स्थानों पर भी मंत्रिपरिषद की बैठकों का आयोजन लगातार किया गया।
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