
भोपाल/उज्जैन। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 15 जुलाई को उज्जैन पहुंचे, जहां उन्होंने कार्तिक चौक स्थित भगवान जगदीश मंदिर में विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने भगवान जगन्नाथ की परंपरा और उज्जैन के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह रिश्ता हजारों वर्षों पुराना है। उन्होंने बताया कि उज्जैन के राजा इंद्रसेन ने वर्तमान ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में भगवान जगन्नाथ का भव्य मंदिर बनवाया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण (गोपाल कृष्ण), भगवान बलराम और माता सुभद्रा की प्रतिमाएं विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति के चार प्रमुख धामों में शामिल जगन्नाथपुरी धाम का देश की धार्मिक परंपरा में विशेष स्थान है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि पहले से निर्धारित नई दिल्ली प्रवास के कारण वे 16 जुलाई को आयोजित होने वाली उज्जैन की भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल नहीं हो पाएंगे। उन्होंने कहा कि रथ यात्रा आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि यह आयोजन पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ संपन्न होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की प्रतिष्ठा पूरी दुनिया में लगातार बढ़ रही है। देश में हो रहे विकास कार्यों के साथ मध्यप्रदेश भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ प्रदेश का विकास नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है और विशेष रूप से उज्जैन का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। सरकार धार्मिक, सांस्कृतिक और आधारभूत विकास को साथ लेकर आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व की तैयारियां लगातार आगे बढ़ रही हैं। सरकार का लक्ष्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और उज्जैन को विश्वस्तरीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक शहर के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन को नई ऊंचाई देने का अवसर भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शासकीय सेवकों के हितों का भी पूरा ध्यान रख रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को लंबे समय से लंबित पदोन्नति (Promotion) का लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने इसे कर्मचारियों के लिए किसी बड़े उत्सव से कम नहीं बताते हुए कहा कि विभिन्न विभागों की पदोन्नति सूची लगातार जारी की जा रही है। सरकार चाहती है कि कर्मचारी पूरी दक्षता और ईमानदारी से कार्य करें, वहीं उनके अधिकारों और बेहतर जीवन की जिम्मेदारी भी सरकार निभाए।
मुख्यमंत्री ने उज्जैन में चल रहे विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला प्रशासन की सराहना की। उन्होंने कहा कि जब जनता की भागीदारी के साथ विकास कार्य होते हैं तो सरकार को भी नए संकल्प और नई ऊर्जा मिलती है। यही सहभागिता प्रदेश के समग्र विकास की सबसे बड़ी ताकत है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र सुदृढ़ीकरण एवं संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए कहा कि राज्य सरकार महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन से पहले प्रदेश की लाड़ली बहना योजना की लाभार्थी महिलाओं के खातों में जुलाई माह की 1,500 रुपये की किस्त जारी की जा चुकी है। इसके साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का अभियान भी तेज किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश की सभी आंगनबाड़ियों को बेहतर बुनियादी सुविधाओं और आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित करना है ताकि महिलाओं और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन केवल बाबा महाकाल की नगरी ही नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन शिक्षा और संस्कृति का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा ने उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी। यही वह पवित्र भूमि है, जिसने भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि महाभारत काल से श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश मानव समाज को धर्म, कर्तव्य और जीवन मूल्यों की प्रेरणा देता आ रहा है।
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