
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 मई को ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर आधारित अखिल भारतीय सेमिनार और इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस (IBC) की 113वीं गवर्निंग काउंसिल मीटिंग का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुआ, जहां मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन भी किया गया।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने मुख्यमंत्री का शॉल-श्रीफल और स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया। इस दौरान लोक निर्माण विभाग (PWD) की परियोजना क्रियान्वयन इकाई की गतिविधियों पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम में विभाग की स्मारिका, न्यूजलेटर और IBC की ‘बिल्ट इन्वायरनमेंट’ पत्रिका का विमोचन भी किया गया। साथ ही, PWD ने IIT इंदौर और GRIHA संस्था के साथ एक महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि राजा भोज ने भोज पत्रों और निर्माण कार्यों के माध्यम से प्राचीन भारतीय निर्माण परंपरा को समृद्ध बनाया। उन्होंने बताया कि हमारा संसार पंचतत्वों से बना है, जिसमें पृथ्वी का विशेष स्थान है। उज्जैन के पास डोंगला को पृथ्वी का भौगोलिक केंद्र माना जाता है, जो प्राचीन समय से समय गणना का केंद्र रहा है।
उन्होंने इंदौर के पास स्थित मांडव महल को स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जहां तालाब के कारण पूरे भवन में ठंडक बनी रहती है। इसके अलावा तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित श्रृंगेरी का उदाहरण देते हुए उन्होंने भारतीय स्थापत्य कला की विशेषता को रेखांकित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राचीन ज्ञान और परंपरा को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ा है। आज जरूरत है कि हम प्रकृति से सीखकर उसके साथ संतुलन बनाकर विकास करें। उन्होंने भोपाल के बड़े तालाब और उज्जैन में शिप्रा नदी के आसपास हुए निर्माण कार्यों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे बिना प्राकृतिक प्रवाह को बाधित किए विकास किया जा सकता है।
डॉ. यादव ने कहा कि विकास के साथ-साथ संसाधनों का सही उपयोग जरूरी है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ग्रीन बिल्डिंग तकनीक को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने बताया कि ग्लोबल वॉर्मिंग एक बड़ी चुनौती बन चुकी है, जिससे निपटने के लिए पर्यावरण अनुकूल निर्माण जरूरी है।
सरकार ने गुढ़ी पड़वा से गंगा दशहरा तक जल संवर्धन अभियान शुरू किया है। इसके तहत प्रदेशभर में कुएं, बावड़ियां और अन्य जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर साल जल संरक्षण पर कार्य करने का संकल्प लिया गया है और मध्यप्रदेश इस क्षेत्र में देश में अग्रणी बना हुआ है।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि प्रदेश में टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल निर्माण के लिए प्राचीन भारतीय तकनीकों को अपनाया जा रहा है। उन्होंने हड़प्पा सभ्यता और अंकोरवाट मंदिर का उदाहरण देते हुए बताया कि इन निर्माणों में प्रकृति के साथ संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया था। उन्होंने बताया कि अब प्रदेश में बनने वाले सभी भवन ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर आधारित होंगे। इसके अलावा 3D निर्माण तकनीक को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जो भविष्य में उपयोगी साबित होगी।
राकेश सिंह ने कहा कि भविष्य में ऊर्जा संकट की संभावना को देखते हुए ग्रीन बिल्डिंग तकनीक महत्वपूर्ण साबित होगी। इसमें बेहतर वेंटिलेशन और प्राकृतिक प्रकाश की व्यवस्था होती है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष प्रदेश में 506 से अधिक लोक कल्याण सरोवर बनाए गए और इंजीनियरों ने 2.5 लाख पौधे लगाए। प्रदेश में हाईवे और फ्लाईओवर निर्माण में भी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग तकनीक को शामिल किया जा रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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