
मध्य प्रदेश में पोस्ट मेट्रिक छात्रावासों में रहने वाले पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए सरकार ने नई सुविधा शुरू की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 24 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 106 जिला स्तरीय छात्रावासों में आधुनिक मेस सुविधा का लोकार्पण किया। सरकार के मुताबिक इससे करीब 9 हजार विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन की सुविधा मिलेगी। इस पूरी व्यवस्था पर ₹8.61 करोड़ खर्च किए गए हैं।
सरकार के अनुसार जिला स्तरीय पिछड़ा वर्ग पोस्ट मेट्रिक छात्रावासों में पहली बार आधुनिक मेस व्यवस्था शुरू की गई है। यहां विद्यार्थियों के लिए आधुनिक किचन और डाइनिंग हॉल तैयार किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रावासों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पिछले करीब डेढ़ दशक में पिछड़ा वर्ग विद्यार्थियों के कल्याण के लिए ₹13,500 करोड़ खर्च किए गए हैं। सरकार के मुताबिक इस अवधि में 5 करोड़ से अधिक पिछड़ा वर्ग विद्यार्थियों को विभिन्न योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिला है। नई मेस सुविधा पर ₹8 करोड़ 61 लाख की राशि खर्च हुई है।
राज्य मंत्री कृष्णा गौर के मुताबिक प्रदेश में पिछड़ा वर्ग छात्रावासों में करीब 9 हजार सीटें हैं। इनमें लगभग 5,200 सीटें बालकों और 3,800 सीटें बालिकाओं के लिए हैं। टर्नकी प्रोजेक्ट के तहत बनाए गए आधुनिक किचन और डाइनिंग हॉल से खासतौर पर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों से पढ़ने आने वाले विद्यार्थियों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।
लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने इंदौर, शाजापुर, उज्जैन, देवास, शिवपुरी, सतना और अशोकनगर के छात्रावासों में रहने वाली छात्राओं से बातचीत की। छात्राओं ने बताया कि पहले गैस सिलेंडर की व्यवस्था करने या भोजन के लिए बाहर जाने में समय और अतिरिक्त खर्च होता था। अब छात्रावास में ही मेस की सुविधा मिलने से यह परेशानी कम होगी।
राज्य मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि नियमित और पौष्टिक भोजन मिलने से विद्यार्थियों को पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देने में मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि छात्रावास में भोजन की व्यवस्था होने से विद्यार्थियों के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी कम होगा। यह सुविधा फिलहाल 106 जिला स्तरीय पोस्ट मेट्रिक छात्रावासों में शुरू की गई है। सरकार के अनुसार इसे पिछड़ा वर्ग छात्रावासों के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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