
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बड़वानी जिले के गायत्री धाम कलाल्दा में आयोजित शरद उत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां उन्होंने नन्हे खिलाड़ियों का मलखंभ प्रदर्शन देखा। बच्चों ने अपने शारीरिक संतुलन, साहस, एकाग्रता और खेल कौशल से सभी का ध्यान खींचा। पारंपरिक भारतीय खेल मलखंभ की अलग-अलग विधाओं में उनकी प्रतिभा देखकर मुख्यमंत्री ने बच्चों की सराहना की। साथ ही शानदार प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री निधि से 1 लाख रुपये की राशि देने की घोषणा भी की।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शरद उत्सव में शामिल होने के लिए बड़वानी जिले के गायत्री धाम कलाल्दा पहुंचे थे। इस दौरान गायत्री धाम परिसर में मलखंभ खेल की आकर्षक और रोमांचक प्रस्तुति आयोजित की गई। नन्हे खिलाड़ियों ने कठिन शारीरिक मुद्राओं और चुनौतीपूर्ण करतबों के जरिए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
मुख्यमंत्री ने बच्चों की मलखंभ की विभिन्न विधाओं को करीब से देखा। उन्होंने खिलाड़ियों के साहस, अनुशासन और एकाग्रता की सराहना करते हुए उनका उत्साह बढ़ाया। बच्चों ने जिस तरह कठिन आसनों के दौरान शारीरिक संतुलन बनाए रखा, वह प्रस्तुति का खास आकर्षण रहा।
मलखंभ में शानदार प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निधि से 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दिए जाने की घोषणा की। उन्होंने बच्चों की मेहनत, लगन और खेल के प्रति समर्पण की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने भारतीय पारंपरिक खेलों के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने मलखंभ को ऐसा खेल बताया, जो शरीर को मजबूत बनाने के साथ मानसिक एकाग्रता, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करने में मदद करता है। इस तरह के खेल बच्चों में शारीरिक क्षमता के साथ चुनौतियों का सामना करने का हौसला भी बढ़ाते हैं।
शरद उत्सव के तहत मलखंभ प्रदर्शन का आयोजन एकलव्य गुरुकुल गायत्री धाम और जिला खेल एवं युवक कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें एकलव्य गुरुकुल गायत्री धाम में कक्षा तीसरी से आठवीं तक पढ़ने वाले कुल 20 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। बच्चों ने मलखंभ की अलग-अलग विधाओं में अपनी शारीरिक दक्षता, लचीलेपन और संतुलन का प्रदर्शन किया। समूह में प्रस्तुति देते समय भी खिलाड़ियों के बीच अच्छा तालमेल देखने को मिला। उनके प्रदर्शन में नियमित अभ्यास, अनुशासन और एक-दूसरे के साथ समन्वय की झलक साफ दिखाई दी।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने एकल मलखंभ के तहत आठ अलग-अलग विधाओं का प्रदर्शन किया। इसमें आड़ी मारना, वाने गुरुजी की पकड़, चक्रासन, धनुरासन, बजरंगी, पेट मयूरासन, हस्त मयूरासन और मलखंभ के शीर्ष पर खड़े होकर संतुलन बनाए रखने जैसी चुनौतीपूर्ण विधाएं शामिल थीं। नन्हे खिलाड़ियों ने इन कठिन आसनों और शारीरिक मुद्राओं को कुशलता से प्रस्तुत किया। मलखंभ पर अलग-अलग स्थितियों में शरीर का संतुलन बनाए रखना आसान नहीं होता। बच्चों ने अपने प्रदर्शन के जरिए नियमित अभ्यास, आत्मविश्वास और एकाग्रता का परिचय दिया। उनकी प्रस्तुति ने पारंपरिक खेल के प्रति उनकी मेहनत और लगन को भी सामने रखा।
मलखंभ कार्यक्रम में समूह पिरामिड की प्रस्तुति विशेष आकर्षण रही। इसमें विद्यार्थियों ने सात अलग-अलग पिरामिड संरचनाएं बनाकर अपनी शारीरिक क्षमता और आपसी तालमेल का प्रदर्शन किया। समूह में एक-दूसरे का सहयोग करते हुए बच्चों ने संतुलन बनाए रखा और अलग-अलग आकर्षक आकृतियां तैयार कीं। इस दौरान खिलाड़ियों के बीच सामूहिक समन्वय, अनुशासन और आपसी विश्वास देखने को मिला। समूह पिरामिड की इन प्रस्तुतियों ने दिखाया कि मलखंभ में व्यक्तिगत कौशल के साथ टीमवर्क भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
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