
भोपाल। ग्वालियर को कृषि के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का लक्ष्य रखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से आधुनिक तकनीक अपनाने, फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने 25 अगस्त को ग्वालियर जिले के डबरा तहसील प्रांगण में आयोजित “बलराम कृषि महोत्सव” को वर्चुअली संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ग्वालियर की पहचान सिर्फ संगीत सम्राट तानसेन तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की गजक, किसान और जवान भी इसकी अलग पहचान हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा, रक्षा, कृषि, फूड प्रोसेसिंग और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में ग्वालियर संभाग प्रदेश में अग्रणी है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में ग्वालियर कृषि के क्षेत्र में पंजाब और हरियाणा से भी आगे निकल सकता है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। इसी उद्देश्य से किसानों की सेवा, उनकी आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए अलग-अलग स्थानों पर 'बलराम कृषि महोत्सव' आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्वालियर तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह टेलीकॉम इंडस्ट्रीज का भी बड़ा हब बनने जा रहा है। क्षेत्र के सैंडस्टोन, सरसों, गेहूं, मसूर और चने ने ग्वालियर को देशभर में पहचान दिलाई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां की सरसों को उन्होंने 'पीला सोना' और गेहूं को 'कनक' बताते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में ग्वालियर की संभावनाएं काफी बड़ी हैं। इन क्षमताओं का सही इस्तेमाल किया जाए तो ग्वालियर निश्चित रूप से पंजाब और हरियाणा को भी पीछे छोड़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने ग्वालियर की लाल टिपारा स्थित आदर्श गौशाला की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह गौशाला प्रदेश के लिए एक उदाहरण बनी है। इससे प्रेरणा लेकर दूसरे क्षेत्रों में भी बेहतर गौशालाएं विकसित की जा रही हैं। उन्होंने किसानों से उन्नत पशुपालन को खेती के साथ जोड़ने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुग्ध उत्पादन किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का तेज माध्यम बन सकता है। खेती के साथ पशुपालन को अपनाने से किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार होंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से फार्मर आईडी बनवाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह आईडी किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करेगी। साथ ही खेती-किसानी से जुड़ी जरूरी और उपयोगी जानकारी भी किसानों तक पहुंचाई जा सकेगी। उन्होंने किसानों से कहा कि वे अपने खेत की क्षमता और मिट्टी की ताकत को पहचानें। केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती और उन्नत पशुपालन को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ें।
मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए बिजली से जुड़ी अहम बात भी कही। उन्होंने कहा कि गेहूं, चना जैसी रबी फसलों की सिंचाई के लिए प्रदेश सरकार अब किसानों को दिन के समय भी बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए रात के समय बिजली पर निर्भरता कम होगी और खेती करना आसान होगा। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में सरकार ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में वृंदावन गांव स्थापित करने का महत्वाकांक्षी निर्णय लिया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को गति मिलेगी। वहीं, शहरों में गीता भवन भी बनाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने किसानों से अपनी जमीन सुरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि विवाह समारोहों में अनावश्यक खर्च करने के बजाय सामूहिक विवाह सम्मेलनों के माध्यम से बेटे-बेटियों का विवाह करने की परंपरा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। डॉ. यादव ने कहा कि परिवार की आर्थिक मजबूती के लिए जमीन और संसाधनों को सुरक्षित रखना जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सभी को रक्षाबंधन और जन्माष्टमी की शुभकामनाएं भी दीं।
डबरा मंडी प्रांगण में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव की शुरुआत भगवान बलराम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। कार्यक्रम में अपेक्स बैंक के प्रशासक महेंद्र सिंह यादव सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे। इस दौरान जिले के प्रगतिशील किसानों और किसानों के मेधावी बच्चों को सम्मानित किया गया। सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत पात्र हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए गए।
महोत्सव में किसानों के लिए नवीन कृषि तकनीक, जैविक खेती, आधुनिक कृषि यंत्र, ड्रोन तकनीक और उन्नत पशुपालन से जुड़ी प्रदर्शनी लगाई गई। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और आधुनिक कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी दी।
बलराम कृषि महोत्सव के दौरान किसानों को डिजिटल कृषि सेवाओं, मौसम आधारित खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, ड्रोन तकनीक, स्मार्ट सिंचाई और आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों को बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों के अनुसार खेती की नई तकनीक अपनाने की सलाह दी। इसके साथ ही फसल उत्पादन में आधुनिक साधनों के इस्तेमाल और कृषि जोखिमों को कम करने के उपाय भी बताए गए। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि तकनीक का सही इस्तेमाल खेती की लागत को नियंत्रित करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद कर सकता है। किसानों को स्मार्ट सिंचाई और आधुनिक कृषि प्रबंधन प्रणालियों के बारे में भी समझाया गया।
कार्यक्रम में बिलौआ के प्राकृतिक खेती करने वाले किसान प्राण सिंह सहित अन्य किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने प्राकृतिक खेती से जुड़े अपने प्रयोग और अनुभवों के बारे में बताया। महोत्सव में कृषि से जुड़ी जानकारी और तकनीकी प्रदर्शनियों के साथ मनोहारी एवं देशभक्तिपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए। इससे किसानों को खेती की नई तकनीकों की जानकारी के साथ मनोरंजन का भी अवसर मिला।
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