
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बदलते समय के साथ अपराध और अपराधियों के तरीके भी बदल गए हैं। अब डिजिटल और साइबर क्राइम जैसी नई चुनौतियां सामने आ रही हैं, लेकिन मध्यप्रदेश पुलिस पूरी दक्षता और मजबूती के साथ इनसे निपट रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश पुलिस अपने साहस, अनुशासन और मजबूत इच्छाशक्ति के लिए जानी जाती है। कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस विभाग ने अपनी अलग पहचान बनाई है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव 11 मई को भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित केएफ रूस्तमजी पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने मुख्यमंत्री का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान अश्वरोही दल ने विशेष अंदाज में मुख्यमंत्री का स्वागत किया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
समारोह में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2019-20 और 2021-22 के लिए केएफ रूस्तमजी पुरस्कार के तहत परम विशिष्ट, अति विशिष्ट और विशिष्ट श्रेणी में सम्मान प्रदान किए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जिन पुलिसकर्मियों को सम्मान मिला है, उन्होंने अपनी बहादुरी, मेहनत और कार्यकुशलता से यह उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने सभी सम्मानित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी। सीएम ने कहा कि केएफ रूस्तमजी पुरस्कार हर साल नियमित रूप से दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि पद्म विभूषण केएफ रूस्तमजी ने अपने कार्यों से प्रदेश पुलिस को नई पहचान दिलाई थी। ऐसे पुरस्कार युवाओं को शांति, सुरक्षा और देश सेवा के लिए प्रेरित करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केएफ रूस्तमजी ने जिस तरह प्रदेश में दस्यु समस्या खत्म करने की मुहिम चलाई थी, उसी दिशा में आगे बढ़ते हुए मध्यप्रदेश ने नक्सलवाद की समस्या को भी समाप्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि संगठित अपराधों से निपटने के लिए सरकार योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है।
सीएम डॉ. यादव ने बताया कि रूस्तमजी ने नागपुर दंगों के दौरान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और देश की सुरक्षा के लिए सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ की नींव रखने में अहम योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि इस बार प्रदेश के 101 पुलिसकर्मियों को केएफ रूस्तमजी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। राज्य सरकार पुलिस विभाग में नवाचार और उत्कृष्ट कार्यों को लगातार प्रोत्साहन दे रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मी कई तरह की चुनौतियों के बीच अपनी ड्यूटी निभाते हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखना आसान काम नहीं है, फिर भी पुलिस विभाग पूरी निष्ठा से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश में बड़े बदलाव हो रहे हैं। करीब 35 वर्षों तक नक्सलवाद देश के लिए गंभीर समस्या बना रहा, लेकिन मध्यप्रदेश इस समस्या से मुक्त होने वाला पहला राज्य बना।
सीएम ने कहा कि आज देश के कई राज्य नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रहे हैं और “लाल सलाम को आखिरी सलाम” देने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हथियार और आतंक के दम पर लोगों को डराने की कोशिश की जाती थी और मध्यप्रदेश में एक मंत्री की हत्या तक कर दी गई थी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पुलिस विभाग में लगातार भर्तियां की जा रही हैं। वर्ष 2023 और 2024 की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब वर्ष 2026 में नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसमें सब इंस्पेक्टर से लेकर पुलिसकर्मियों तक की नियुक्तियां होंगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 22 हजार 500 भर्तियों का लक्ष्य रखा था और अगले साल इसे पूरा करने के लिए फिर भर्ती अभियान चलाया जाएगा। प्रदेश में पुलिस बैंड के लिए भी भर्ती निकाली गई है।
सीएम ने कहा कि पुलिस विभाग सरकार के परिवार का हिस्सा है। पुलिसकर्मियों के लिए आवास और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। उनकी समस्याओं और सुविधाओं का ध्यान रखना सरकार की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कहा कि इस समारोह में परम विशिष्ट श्रेणी के 7, अति विशिष्ट श्रेणी के 8 और विशिष्ट श्रेणी के 86 पुरस्कार दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश पुलिस ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। इसमें 11 दिसंबर 2025 को प्रदेश को नक्सलवाद मुक्त बनाना भी शामिल है।
डीजीपी ने बताया डायल 112 सेवा का सफल संचालन किया जा रहा है। पिछले साल साढ़े 8 हजार पदों पर भर्ती की स्वीकृति मिली थी और कॉन्स्टेबल भर्ती प्रक्रिया पूरी कर जवानों को जॉइनिंग दी जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में प्रदेश पुलिस बल में 10 हजार नए पदों पर भर्ती की मंजूरी मिलने की संभावना है। सिंहस्थ 2028 जैसे बड़े आयोजन को देखते हुए पुलिस बल को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है और तैयारियां जारी हैं।
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