
भोपाल/हरदा। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरदा में समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम के दौरान जनसमस्याओं के निराकरण की समीक्षा की। उन्होंने पांच आवेदकों से सीधे बातचीत कर उनकी शिकायतें सुनीं और संबंधित अधिकारियों को जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान एक महिला कर्मचारी का मानदेय 10 महीने से अधिक समय तक लंबित रखने और शिकायत के निराकरण में लापरवाही का मामला सामने आया। मुख्यमंत्री ने इस पर नाराजगी जताते हुए आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक प्रमोद माथुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से लेना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। प्रशासनिक अधिकारियों को जमीनी स्तर पर जाकर शिकायतों का समाधान करना होगा। शासन और प्रशासन जनता की सेवा के लिए हैं। ऐसे में शिकायतों के निराकरण में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम में रसोई का काम करने वाली एक महिला कर्मचारी के मानदेय का मामला सामने आया। महिला को 10 महीने से अधिक समय से भुगतान नहीं किया गया था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संबंधित अधिकारियों से पूछा कि शिकायत अब तक लंबित क्यों है।
आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक प्रमोद माथुर इस मामले में संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारियों के भुगतान में अनावश्यक देरी और सरकारी जिम्मेदारियों को निभाने में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
समाधान ऑनलाइन के दौरान मुख्यमंत्री ने संदीप गौर से बातचीत कर कृषि यंत्रों पर सब्सिडी से जुड़ी उनकी शिकायत सुनी। वहीं, सतीश उइके ने बिजली बिल से संबंधित अपनी समस्या रखी। मुख्यमंत्री ने इस मामले में विद्युत विभाग के महाप्रबंधक को जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
उन्होंने बिजली बिल से जुड़ी शिकायतों की जांच के लिए मीटरों का सैंपल सर्वे कर जानकारी जुटाने को भी कहा। बिजली बिल की शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं होने पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई। मुख्यमंत्री ने शबाना, रेखा यादव और अरविंद इवने समेत अन्य आवेदकों की समस्याएं भी सुनीं। उन्होंने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को शिकायतों के निराकरण के लिए आवश्यक निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत तय समय-सीमा में शिकायतों का निराकरण नहीं करने वाले अधिकारियों पर अर्थदंड लगाने की कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों का भी निर्धारित समय में समाधान होना चाहिए। शिकायतों की जांच और कार्रवाई में बेवजह देरी नहीं की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी कर्मचारी का वेतन लंबित नहीं रहना चाहिए। नियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकायतों का समाधान शुरुआती स्तर पर ही हो जाना चाहिए, ताकि आम लोगों को अपनी समस्याएं लेकर समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम तक पहुंचने की जरूरत न पड़े। इसके लिए कलेक्टरों को सभी शिकायतों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के निर्देश दिए गए।
समीक्षा के दौरान पुलिस विभाग से संबंधित 100 दिन से अधिक समय से लंबित 27 शिकायतों का मामला सामने आया। इस पर मुख्यमंत्री ने अप्रसन्नता जताई और पुलिस अधीक्षक को इन शिकायतों की स्वयं समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाए कि शिकायतों के निराकरण में किस स्तर पर देरी या लापरवाही हो रही है। लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए।
मुख्यमंत्री ने कृषि, ऊर्जा, महिला एवं बाल विकास, पंचायत, राजस्व और गृह विभाग से जुड़ी 100 दिन से अधिक समय से लंबित शिकायतों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शिकायतों को केवल औपचारिकता के तौर पर न देखा जाए। आवेदकों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ समझकर उन्हें समय पर राहत दी जाए।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कलेक्टर को हस्तांतरित नल-जल योजनाओं की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं के संचालन में कोई समस्या सामने आती है तो उसका तुरंत समाधान किया जाए, ताकि लोगों को नियमित रूप से पेयजल मिलता रहे।
मुख्य सचिव ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पूर्ण हो चुकी नल-जल योजनाओं का हस्तांतरण जल्द सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी संचालन और निर्बाध पेयजल आपूर्ति के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही जिले में बिजली से जुड़ी समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई करने और बिजली ट्रिपिंग जैसी परेशानियों को रोकने के लिए भी कहा गया।
विभागीय समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हरदा छोटा जिला है, लेकिन इसे एक आदर्श जिले के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसके लिए सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा। मुख्यमंत्री ने नर्मदा परिक्रमा पथ का विकास तेजी से पूरा करने और जिले में उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने नए औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए, ताकि जिले में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिल सके।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने जिले के वरिष्ठ नागरिक सरगम जैन और विक्रान्त अग्रवाल से भी बातचीत की। सरगम जैन ने जिले के विकास से जुड़े सुझाव दिए और नाभि कुण्ड के विकास का अनुरोध किया। वहीं, विक्रान्त अग्रवाल ने जिले में ओपन स्टेडियम बनाने का सुझाव रखा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत हरदा जिला पंचायत सभागार में आयोजित उद्यमी, युवा एवं किसान संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर आगे बढ़ रहे लोगों से बातचीत की और उनके अनुभव जाने।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार कौशल विकास, आधुनिक तकनीक, शिक्षा और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। उद्यमियों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ ई-कॉमर्स और डिजिटल माध्यमों के जरिए देश-विदेश के बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ पशुपालन, प्राकृतिक खेती, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित नवाचार अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे वे अपनी आय के नए स्रोत विकसित कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भर बन रहे हरदा के उद्यमी, युवा और किसान आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की मजबूत तस्वीर पेश कर रहे हैं। उनके प्रयास प्रदेश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हरदा में स्थानीय उत्पादों और नए प्रयोगों को बाजार से जोड़ने से रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। संवाद में सामने आई सफलता की कहानियां दूसरे युवाओं और किसानों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, जिले के उद्यमियों ने स्थानीय संसाधनों को व्यवसाय और रोजगार के अवसरों में बदला है। युवाओं ने आधुनिक तकनीक अपनाकर नई संभावनाएं तलाशीं, जबकि किसानों ने प्राकृतिक खेती, पशुपालन और कृषि आधारित नवाचारों के जरिए अपनी आय बढ़ाने की दिशा में काम किया है। सरकारी योजनाओं का सही लाभ लेकर व्यक्ति खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार कर सकता है।
हरदा के उद्यमी पलाश करोड़े ने मुख्यमंत्री को अपने रजाई निर्माण व्यवसाय के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत मिले 25 लाख रुपये के बैंक ऋण और सवा 6 लाख रुपये के अनुदान की मदद से उन्होंने यह व्यवसाय स्थापित किया।
उनके उत्पाद मध्यप्रदेश सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में सप्लाई किए जा रहे हैं। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए ऑनलाइन बिक्री भी होती है। इस व्यवसाय से करीब 72 लोगों को रोजगार मिला है। मुख्यमंत्री ने उनसे कच्चे माल, उत्पादन लागत और कारोबार के टर्नओवर की जानकारी ली और उनके प्रयासों की सराहना की।
इसी तरह खिरकिया निवासी गौरव माहेश्वरी ने गोवर्धन योजना और मुख्यमंत्री जैव ईंधन योजना के माध्यम से स्थापित होने वाले बायो सीएनजी प्लांट की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्लांट शुरू होने से आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही पराली का उपयोग होने से उसे जलाने के कारण होने वाले प्रदूषण में भी कमी आ सकेगी।
टिमरनी निवासी गुरचरण लाल ने कृषि उपकरण और मशीनरी निर्माण के अपने काम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 30 हजार लैंड लेवलर बनाए जा चुके हैं और इनकी बिक्री 12 जिलों में हो रही है। यह कृषि उपकरण खेतों में नरवाई को चूर करने, बखरी हुई जमीन के ढेलों को बारीक करने और जमीन की उर्वरता बनाए रखने में उपयोगी है। गुरचरण लाल ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत मिले ऋण और अनुदान के लिए आभार जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरदा जिले में लैंड लेवलर का इस्तेमाल बढ़ाया जाना चाहिए, जिससे पराली जलाने की समस्या का स्थायी समाधान खोजने में मदद मिल सके।
ग्राम कनारदा के उद्यमी दीपक उपाध्याय ने लिंक अनुदान योजना के तहत मिली 70 लाख 77 हजार रुपये की सहायता से स्थापित मूंगदाल और मूंग पॉलिश इकाई के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनके उत्पाद चीन, दुबई और अमेरिका सहित देश के बड़े शहरों तक पहुंच रहे हैं।
टिमरनी निवासी महेंद्र सिंह राजपूत ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना के तहत मिले 10 लाख रुपये के अनुदान से खाद्य प्रसंस्करण और मसाला उद्योग स्थापित किया है। उनके ‘निर्मल स्पाइसेज’ ब्रांड के उत्पाद मध्यप्रदेश के 12 जिलों में पहुंच रहे हैं। कारोबार को बढ़ाने के लिए ऑनलाइन बिक्री और डिजिटल मार्केटिंग का भी सहारा लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इन उद्यमियों के प्रयासों को स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
हरदा जिले में विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए चलाए जा रहे ‘मिशन कोड शक्ति’ नवाचार की मुख्यमंत्री ने सराहना की। इस दौरान शासकीय हाई स्कूल मांदला की कक्षा 10वीं की छात्रा टीना नगरे ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि मिशन कोड शक्ति के माध्यम से उन्हें वेबसाइट डिजाइनिंग, वेब बेसिक्स और प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखने का अवसर मिला है।
कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने जानकारी दी कि इस नवाचार के जरिए जिले के 2,500 विद्यार्थी आधुनिक तकनीक में दक्ष हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के अवसर मिलने से रोजगार और स्वरोजगार की नई संभावनाएं खुलती हैं।
सिरकंपा निवासी उद्यमी अर्चना नागर ने अपने अंतरराष्ट्रीय ब्रांड ‘बरगंडी बाग’ के बारे में मुख्यमंत्री को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अफ्रीकी मूल के रोसेले पौधे से स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इस काम से करीब एक हजार जनजातीय महिलाओं को जोड़ा गया है।
अर्चना नागर के अनुसार, उनके ब्रांड को एमएसएमई, एपीडा, फिक्की और यूएस एफडीए जैसे संस्थानों से प्रमाण-पत्र प्राप्त हैं। मुख्यमंत्री ने उत्पादों का अवलोकन किया और ब्रांड के विस्तार के लिए इसे पर्यटन विभाग से जोड़ने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने टिमरनी के अंतरराष्ट्रीय रैपिड चेस प्रतियोगिता विजेता यश पचौरी से भी बातचीत की।
हरदा जिले में किसानों ने भी सरकारी योजनाओं की मदद से खेती और पशुपालन के नए तरीके अपनाए हैं। सिराली निवासी किसान आनंद यादव ने बताया कि उन्हें सरकारी योजना के तहत एक लाख रुपये की सहायता मिली, जिससे उन्होंने बायो रिसोर्स सेंटर स्थापित किया। उन्होंने जीवामृत और बीजामृत के उपयोग से प्राकृतिक खेती तथा गो आधारित उत्पादों से होने वाले लाभ की जानकारी दी।
टिमरनी निवासी किसान नवनीत जैन ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत स्थापित साइलेज निर्माण इकाई के बारे में बताया। इस इकाई के जरिए हरे चारे को लंबे समय तक सुरक्षित और पौष्टिक रूप में रखा जा सकता है। इससे पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन में सुधार करने के साथ पशुपालन की लागत कम करने में मदद मिलती है।
खिरकिया तहसील के किसान सूर्य प्रताप ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना का लाभ लेकर अपना डेयरी व्यवसाय बढ़ाया। उन्होंने बताया कि योजना के तहत 42 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिलने से उन्होंने उच्च नस्ल की 9 मुर्रा भैंसें खरीदीं। उनके मुताबिक, योजना का लाभ मिलने के बाद डेयरी व्यवसाय का विस्तार हुआ है और अब प्रतिदिन करीब 100 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। इससे उनकी आय में बढ़ोतरी हुई है। उनकी सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों और युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संवाद कार्यक्रम में शामिल सभी हितग्राहियों के प्रयासों की सराहना की और उन्हें आगे बढ़ने के लिए शुभकामनाएं दीं।
हरदा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम में एक तरफ सरकारी शिकायतों के समय पर समाधान और अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर दिया गया, तो दूसरी ओर उद्यमियों, युवाओं और किसानों के काम को भी सामने रखा गया। समाधान ऑनलाइन में लंबित मानदेय, बिजली बिल और अन्य शिकायतों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। वहीं, जिले के विकास के लिए नर्मदा परिक्रमा पथ, नए औद्योगिक क्षेत्र, नल-जल योजनाओं और बिजली व्यवस्था पर ध्यान देने की बात कही गई।
उद्यमी, युवा एवं किसान संवाद में रजाई निर्माण, कृषि उपकरण, खाद्य प्रसंस्करण, तकनीकी शिक्षा, प्राकृतिक खेती और डेयरी व्यवसाय से जुड़े उदाहरण सामने आए। मुख्यमंत्री ने इन प्रयासों को आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में महत्वपूर्ण बताते हुए सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
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