
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पीड़ित महिलाओं और बच्चों को जल्द न्याय दिलाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से लिए गए बड़े फैसले का स्वागत किया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना को अगले पांच साल तक जारी रखने और देश में इन अदालतों का नेटवर्क बढ़ाने की मंजूरी दी है। इस फैसले को लंबित मामलों के तेजी से निपटारे और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लंबित मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बेहद महत्वपूर्ण न्यायिक व्यवस्था है। केंद्र सरकार का यह निर्णय मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने की दिशा में क्रांतिकारी साबित होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक हुई। इस बैठक में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना को अगले पांच साल तक जारी रखने का फैसला लिया गया। यह योजना अब 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी। इसके साथ ही देशभर में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट के मौजूदा नेटवर्क का विस्तार करने को भी मंजूरी दी गई है। सरकार का उद्देश्य दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाना और लंबे समय से लंबित मामलों का जल्द निपटारा करना है।
केंद्र सरकार के फैसले के मुताबिक, देश में स्पेशल पॉक्सो कोर्ट सहित कुल 850 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट शुरू किए जाएंगे। फिलहाल देश में 779 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट काम कर रहे हैं। इनके नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। मौजूदा अदालतों में 399 विशेष पॉक्सो कोर्ट भी शामिल हैं।
योजना के विस्तार के तहत दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों की लंबित संख्या को भी आधार बनाया जाएगा। जिन जिलों में ऐसे मामले अधिक संख्या में लंबित हैं, उन्हें भी इस योजना में शामिल किया जा सकेगा। इससे जरूरत के हिसाब से अतिरिक्त जिलों में विशेष अदालतें स्थापित करने का रास्ता खुलेगा।
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना को देश के 29 भाग लेने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा। इसके जरिए महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाने की कोशिश होगी। केंद्र सरकार के इस फैसले से न केवल लंबित मामलों के निपटारे में मदद मिलने की उम्मीद है, बल्कि पीड़ित महिलाओं और बच्चों को न्याय के लिए लंबा इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसी वजह से इस निर्णय को न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया है।
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