
दीपावली की रौनक के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने कानून व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपना लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ कर दिया है कि त्योहार के दौरान अवैध शराब, प्रतिबंधित पटाखों और नशीले पदार्थों के कारोबार पर किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी। इतना ही नहीं, किसानों को खाद की किल्लत हुई तो इसकी जिम्मेदारी सीधे जिले के कलेक्टरों की होगी। मुख्यमंत्री ने बुधवार को सभी जिलों के कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर कई अहम निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि दीपावली के दौरान प्रतिबंधित पटाखों का इस्तेमाल न होने पाए। स्वास्थ्य के लिए खतरनाक कार्बाइड गन और कार्बाइड लैंप पर भी सख्ती से रोक लगाई जाए। बड़े बाजारों में दीये, फूल, झालर और पूजा सामग्री बेचने वाले छोटे दुकानदारों को तहबाजारी से छूट देने और उन्हें परेशान नहीं करने के निर्देश भी दिए गए।
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सीएम ने अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और परिवहन पर सख्त कार्रवाई करने को कहा है। नकली और जहरीली शराब बनाने वाले ठिकानों की पहचान कर आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होगी। शराब परिवहन करने वाले वाहनों का भौतिक सत्यापन और दुकानों पर निर्धारित कीमत से अधिक वसूली रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए गांजा और अफीम की अवैध खेती पर रोक लगाने को कहा। नशे के कारोबार से जुड़े बड़े नेटवर्क और उनकी सप्लाई चेन को खत्म करने के लिए विशेष कॉम्बैट टीमें सक्रिय की जाएंगी। स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर निगरानी बढ़ेगी। जरूरत के मुताबिक नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने 9 नवंबर को प्रदेशभर में गोवर्धन पूजा के कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। भोपाल में बड़ा राज्यस्तरीय आयोजन होगा। सभी जिलों की गौशालाओं में गौपूजन के साथ पशुपालकों को सम्मानित किया जाएगा। बैलगाड़ी प्रतियोगिता कराने का सुझाव भी दिया गया है। कार्यक्रमों के जरिए पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और सरकारी योजनाओं का प्रचार किया जाएगा।
किसानों को खाद और उर्वरक की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रशासन को अलर्ट रहने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खाद की कमी से किसानों को परेशानी हुई तो कलेक्टर जिम्मेदार माने जाएंगे। इसके अलावा धनतेरस पर मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक पक्की रजिस्ट्री कराने के निर्देश दिए गए हैं। सामान्य बारिश वाले 12 जिलों में फसल सर्वे के बाद पात्र किसानों को राहत राशि देने की प्रक्रिया भी जल्द पूरी करने को कहा गया है।
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