MP Tourism: उज्जैन से कान्हा तक पर्यटन का बूम, 57% बढ़े पर्यटक, उज्जैन ने 8.40 करोड़ की भीड़ से रचा इतिहास

Published : Sep 26, 2026, 07:41 PM IST
mp tourism 2025 record

सार

मध्य प्रदेश में 2025 के दौरान 21 करोड़ से ज्यादा पर्यटक पहुंचे। उज्जैन, इंदौर, चित्रकूट, मैहर और वन्यजीव पर्यटन स्थलों ने रिकॉर्ड बनाया।

मध्य प्रदेश की प्राकृतिक खूबसूरती, समृद्ध संस्कृति, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत ने एक बार फिर देश-दुनिया के पर्यटकों को अपनी ओर खींचा है। साल 2025 प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए बेहद खास रहा। इस दौरान मध्य प्रदेश में 21 करोड़ 5 लाख 42 हजार 503 पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। यह संख्या 2024 में आए 13 करोड़ 41 लाख 10 हजार 274 पर्यटकों के मुकाबले करीब 57 प्रतिशत अधिक है। पर्यटन आंकड़ों में आई यह तेज बढ़ोतरी बताती है कि मध्य प्रदेश में धार्मिक, प्राकृतिक, वन्यजीव, हेरिटेज और अवकाश पर्यटन के अलग-अलग क्षेत्रों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

MP Tourism: घरेलू पर्यटकों की संख्या में 57 फीसदी बढ़ोतरी

वर्ष 2025 में मध्य प्रदेश आने वाले घरेलू पर्यटकों की संख्या 21 करोड़ 3 लाख 59 हजार 468 रही। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा करीब 13 करोड़ 39 लाख था। यानी घरेलू पर्यटकों के आगमन में 57 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कुल पर्यटक आगमन में घरेलू पर्यटकों की हिस्सेदारी 99.8 प्रतिशत रही। विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई। साल 2025 में 1 लाख 83 हजार 35 विदेशी पर्यटक मध्य प्रदेश पहुंचे, जबकि 2024 में इनकी संख्या 1 लाख 67 हजार 709 थी। इस तरह विदेशी पर्यटकों के आगमन में 9.10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

2021 से 2025 तक लगातार बढ़ा पर्यटन

पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्य प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र में लगातार विस्तार दिखाई देता है। साल 2021 में प्रदेश में 4 करोड़ 88 लाख से अधिक पर्यटक आए थे। 2023 में यह संख्या बढ़कर 11 करोड़ 22 लाख से ज्यादा हो गई। 2024 में 13 करोड़ 41 लाख से अधिक और 2025 में 21 करोड़ 5 लाख से ज्यादा पर्यटकों का आगमन हुआ।

Ujjain Tourism सबसे आगे, चित्रकूट और मैहर भी टॉप डेस्टिनेशन

साल 2025 में पर्यटकों की संख्या के लिहाज से उज्जैन प्रदेश का सबसे बड़ा पर्यटन केंद्र रहा। यहां 8 करोड़ 40 लाख से ज्यादा पर्यटक पहुंचे। श्री महाकाल महालोक और ज्योतिर्लिंग उज्जैन के प्रमुख आकर्षण बने रहे। इंदौर 2 करोड़ 80 लाख 70 हजार 73 पर्यटकों के साथ दूसरे प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में सामने आया। शहर ने शहरी और अवकाश पर्यटन के साथ मालवा क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन केंद्र के तौर पर अपनी स्थिति मजबूत की। सतना जिले के चित्रकूट में 1 करोड़ 62 लाख 59 हजार 837 पर्यटक पहुंचे। वहीं मैहर में मां शारदा देवी धाम के दर्शन के लिए 1 करोड़ 61 लाख 78 हजार पर्यटक आए।

दतिया का रतनगढ़ माता मंदिर करीब 1 करोड़ पर्यटकों के आगमन के साथ आस्था का बड़ा केंद्र रहा। इसके अलावा आगर मालवा के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में 51 लाख 69 हजार, अमरकंटक में 43 लाख 17 हजार 292 और पांढुर्णा के जामसांवली हनुमान मंदिर में 41 लाख 70 हजार पर्यटकों का आगमन हुआ। दतिया का श्री पीताम्बरा पीठ भी करीब 40 लाख पर्यटकों के साथ प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल रहा।

Spiritual Tourism: मध्य प्रदेश बना आध्यात्मिक और तीर्थ पर्यटन का बड़ा केंद्र

मध्य प्रदेश में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन ने 2025 में खास रफ्तार पकड़ी। आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान करीब 16.92 करोड़ श्रद्धालुओं ने प्रदेश के अलग-अलग धार्मिक और पवित्र स्थलों का रुख किया। श्री महाकाल महालोक के आकर्षण के कारण उज्जैन में सालाना 14.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और शहर ने 8 करोड़ 40 लाख श्रद्धालुओं का स्वागत किया। सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन में पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आवास सुविधाओं को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में होम स्टे योजना का प्रचार किया जा रहा है, ताकि स्थानीय लोगों को पर्यटन आधारित रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकें।

महाकाल मंदिर के पास MPT सम्राट विक्रमादित्य द हेरिटेज को शाही विरासत और आधुनिक सुविधाओं के मेल के रूप में विकसित किया गया है। यहां धन्वंतरि वेलनेस सेंटर में अभ्यंगम और शिरोधारा जैसी पारंपरिक आयुर्वेदिक सेवाएं भी उपलब्ध हैं। पर्यटकों के लिए साउंड एंड लाइट शो भी शुरू किए गए हैं।

चित्रकूट में पर्यटकों की संख्या में 36.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यहां 1.62 करोड़ पर्यटक पहुंचे। वहीं मैहर के मां शारदा धाम में 20.9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.61 करोड़ श्रद्धालुओं का आगमन हुआ।

Omkareshwar और Maheshwar में बड़े पर्यटन प्रोजेक्ट

आस्था से जुड़े पर्यटन को लंबे समय तक बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भी चल रहे हैं। ओंकारेश्वर में करीब 2,400 करोड़ रुपये की लागत से एकात्म धाम का निर्माण जारी है। यहां आचार्य शंकर की 108 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित हो चुकी है। परियोजना के दूसरे चरण में 2,424 करोड़ रुपये की लागत से 'अद्वैत लोक' को मंजूरी दी गई है।

महेश्वर में 100 करोड़ रुपये की लागत से 'देवी अहिल्या बाई लोक' विकसित करने की योजना पर काम शुरू हो चुका है। इसके अलावा 18 पर्यटन गांव और 500 विशेष गाइड तैयार करने की योजना भी है। पर्यटकों की आवाजाही आसान बनाने के लिए हेली पर्यटन सेवा शुरू की गई है। 'ओंकारेश्वर-महाकालेश्वर-इंदौर', 'कान्हा-बांधवगढ़-मैहर-अमरकंटक-चित्रकूट' और 'भोपाल-ओरछा-चंदेरी' सेक्टर में हेली सेवाओं का संचालन किया जा रहा है।

Leisure Tourism: इंदौर ने दर्ज की 173.8 फीसदी की रिकॉर्ड वृद्धि

मध्य प्रदेश के आधुनिक शहरों और प्राकृतिक स्थलों को देखने के लिए 2025 में करीब 3.37 करोड़ पर्यटक पहुंचे। इस क्षेत्र में इंदौर ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा। शहर में पर्यटकों की संख्या में 173.8 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई और करीब 2 करोड़ 80 लाख पर्यटक पहुंचे। भोपाल में 10.72 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 24.62 लाख पर्यटकों का आगमन हुआ। जबलपुर में 23.94 लाख, महेश्वर में 14.68 लाख, भेड़ाघाट में 5.97 लाख और पचमढ़ी में 3.11 लाख पर्यटक पहुंचे।

भोपाल को MICE Tourism का केंद्र बनाने के लिए कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर को 99.38 करोड़ रुपये की लागत से अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर के तौर पर विकसित किया जा रहा है। भोपाल बोट क्लब में शिकारा, चप्पू बोट और वॉटर साइकिल जैसी सुविधाएं भी पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं। इसके साथ ही पूरे प्रदेश में 8,000 से ज्यादा नए होटल कमरों के विस्तार से अवकाश पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।

Heritage Tourism: मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत ने भी खींचे पर्यटक

मध्य प्रदेश का इतिहास, स्थापत्य और पुरातात्विक वैभव भी पर्यटकों के लिए बड़ा आकर्षण बना हुआ है। वर्ष 2025 में करीब 59 लाख विरासत प्रेमियों ने प्रदेश के ऐतिहासिक और हेरिटेज स्थलों का दौरा किया। भोजपुर 18.64 लाख पर्यटकों के साथ इस क्षेत्र में सबसे आगे रहा। ग्वालियर में 12.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यहां 10.12 लाख पर्यटक पहुंचे। मांडू में 9.36 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 8.27 लाख पर्यटकों का आगमन हुआ।

विश्व धरोहर खजुराहो में 5.47 लाख, सांची में 3.81 लाख, भीमबेटका में 1.71 लाख और ओरछा में 1.93 लाख पर्यटक पहुंचे। विरासत संरक्षण के लिए ओरछा में 99.92 करोड़ रुपये की लागत से 'ओरछा मेडिवल स्पलेंडर' परियोजना पर काम चल रहा है। ग्वालियर, चित्रकूट, दतिया और अमरकंटक में करीब 300 करोड़ रुपये के विकास कार्य भी प्रगति पर हैं।

खजुराहो, सांची और भीमबेटका यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं। इसके अलावा ग्वालियर समेत मध्य प्रदेश के 15 स्थलों को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल कराया गया है। इस तरह भारत की 69 टेंटेटिव विरासतों में 15 स्थल मध्य प्रदेश के हैं। ओरछा, मांडू और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के लिए यूनेस्को नामांकन डोजियर भी प्रस्तुत किए जा चुके हैं।

चंदेरी का प्राणपुर बना Craft Handloom Tourism Village

अशोकनगर जिले में चंदेरी के पास स्थित प्राणपुर गांव को देश का पहला क्राफ्ट हैंडलूम टूरिज्म विलेज बनाया गया है। यहां आने वाले पर्यटक स्थानीय बुनकरों को पारंपरिक चंदेरी साड़ियां और हस्तशिल्प तैयार करते हुए देख सकते हैं और इन्हें सीधे खरीद भी सकते हैं। गांव में करीब 450 बुनकर परिवार पीढ़ियों से इस कला को आगे बढ़ा रहे हैं। इससे ग्रामीण पर्यटन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिल रहा है।

Wildlife Tourism: Tiger State MP में 17 लाख वन्यजीव प्रेमी पहुंचे

मध्य प्रदेश की पहचान सिर्फ धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन तक सीमित नहीं है। प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व भी देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना और सतपुड़ा सहित प्रदेश में 12 राष्ट्रीय उद्यान, 9 टाइगर रिजर्व और 24 वन्यजीव अभयारण्य हैं। मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट के साथ वुल्फ स्टेट, चीता स्टेट, घड़ियाल स्टेट, वल्चर स्टेट और लेपर्ड स्टेट के रूप में भी पहचान मिली है।

वर्ष 2025 में प्रदेश ने करीब 17 लाख वन्यजीव पर्यटकों का स्वागत किया। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के मढ़ई में 4.36 लाख, पन्ना में 4.03 लाख, कान्हा में 2.55 लाख, पेंच में 2.11 लाख और बांधवगढ़ में 1.99 लाख पर्यटक पहुंचे।

कान्हा और बांधवगढ़ को हेली सेवा के जरिए हवाई संपर्क से जोड़ा गया है। वहीं पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पचमढ़ी को ग्लोबल सस्टेनेबल टूरिज्म काउंसिल के तहत 'ग्रीन डेस्टिनेशन' के रूप में अनुबंधित किया गया है। पर्यटकों की सुविधा के लिए 11 नए सफारी वाहन और 10 कैंटर बसें भी बेड़े में शामिल की गई हैं।

Foreign Tourists: विदेशी सैलानियों की पहली पसंद बन रहा Wildlife Tourism

मध्य प्रदेश की जैव-विविधता और वन्यजीव पर्यटन का आकर्षण विदेशी पर्यटकों के बीच भी बढ़ा है। 2025 में प्रदेश आने वाले कुल 1 लाख 83 हजार 35 विदेशी पर्यटकों में से 93 हजार 412 यानी 51 प्रतिशत से अधिक ने वन्यजीव पर्यटन स्थलों का दौरा किया। इस क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों की संख्या में 17.44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। यह प्रदेश में विदेशी पर्यटकों की कुल वृद्धि दर 9.10 प्रतिशत से लगभग दोगुनी है।

बांधवगढ़ विदेशी पर्यटकों के लिए प्रमुख गंतव्य रहा, जहां 31,390 विदेशी पर्यटक पहुंचे। कान्हा में विदेशी पर्यटकों की संख्या में 25.30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई और यहां 23,992 विदेशी पर्यटक आए। प्रोजेक्ट चीता के कारण कूनो नेशनल पार्क को भी पहली बार 6,316 विदेशी पर्यटकों की मेजबानी मिली। डिंडोरी के जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान में 4,843 और रातापानी में 1,127 विदेशी पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया।

ये आंकड़े संकेत देते हैं कि मध्य प्रदेश के वन्यजीव और इको-टूरिज्म की पहुंच अब अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों तक भी बढ़ रही है।

Rural Tourism: होमस्टे और Astro Tourism पर भी जोर

ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पिछले कुछ वर्षों में होमस्टे की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2026-27 में 277 नए होमस्टे पंजीकृत किए गए। फिलहाल प्रदेश में करीब 666 होमस्टे संचालित हो रहे हैं। युवाओं को पर्यटन उद्योग से जोड़ने के लिए 'पर्यटन कौशल मिशन' की स्थापना की गई है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग एस्ट्रो टूरिज्म को भी बढ़ावा दे रहा है। इसके लिए छह जिलों के छह गांवों को एस्ट्रो विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है। इनमें धार का ज्ञानपुरा, छिंदवाड़ा का धुसावानी, बैतूल का बांचा, नर्मदापुरम का ढाबा, दमोह का रिछकुड़ी और उमरिया का रंछा गांव शामिल हैं।

MP Tourism को मिले कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान

मध्य प्रदेश के साबरवानी, लाड़पुरा और प्राणपुर को पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से 'बेस्ट टूरिज्म विलेज' का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। इसके अलावा मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग को ATOAI की ओर से 'बेस्ट स्टेट ऑफ एडवेंचर टूरिज्म', द वीक की ओर से 'गोल्डन बैनयन अवॉर्ड' और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदार पर्यटन के लिए 'बेस्ट सस्टेनेबल स्टेट टूरिज्म अवार्ड' समेत कई सम्मान मिले हैं।

Adventure Tourism: स्काई डाइविंग से लेकर स्कूबा डाइविंग तक बढ़ा दायरा

मध्य प्रदेश में एडवेंचर टूरिज्म को भी तेजी से विस्तार दिया जा रहा है। जल, थल और नभ आधारित गतिविधियों में स्काई डाइविंग, स्कूबा डाइविंग, कयाकिंग और बर्ड-वॉचिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया है। गांधीसागर का फ्लोटिंग फेस्टिवल, हनुवंतिया का जल महोत्सव, कूनो फॉरेस्ट फेस्टिवल और चंदेरी फेस्टिवल जैसे आयोजन प्रदेश की पर्यटन पहचान को नए स्तर पर ले जा रहे हैं।

मालवा, निमाड़ और चंबल की खान-पान संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली और भोपाल में फूड फेस्टिवल भी आयोजित किए गए हैं। वहीं हनुवंतिया, कूनो, चंदेरी और गांधीसागर में अगले 10 वर्षों तक उच्च स्तरीय टेंट सिटी के नियमित संचालन की रूपरेखा तैयार की गई है।

21 करोड़ से ज्यादा पर्यटकों का आंकड़ा क्या बताता है?

साल 2025 में 21 करोड़ 5 लाख से ज्यादा पर्यटकों का मध्य प्रदेश पहुंचना प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के विस्तार को दिखाता है। धार्मिक स्थलों से लेकर वन्यजीव अभयारण्यों, ऐतिहासिक धरोहरों, प्राकृतिक स्थलों, एडवेंचर गतिविधियों और ग्रामीण पर्यटन तक, अलग-अलग श्रेणियों में पर्यटकों की रुचि बढ़ी है।

आध्यात्मिक पर्यटन जहां स्थानीय रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा कर रहा है, वहीं अवकाश, हेरिटेज और वन्यजीव पर्यटन मध्य प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दे रहे हैं। पर्यटन विभाग का फोकस सुरक्षित, सुगम, जिम्मेदार, सतत और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को आगे बढ़ाने पर है।

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