
उज्जैन। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड, मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम और जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद, उज्जैन के संयुक्त प्रयासों से गुरुवार को सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती सभागार में होमस्टे योजना जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश में होमस्टे संस्कृति को बढ़ावा देना, स्थानीय परिवारों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ना और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक आतिथ्य का अनुभव कराना था। कार्यशाला में लोगों का उत्साह देखने लायक रहा। करीब 360 होमस्टे संचालकों और इच्छुक हितग्राहियों ने इसमें भाग लिया और योजना से जुड़ी जानकारियां प्राप्त कीं।
मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने कहा कि उज्जैन में सिंहस्थ-2028 के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने की संभावना है। ऐसे में बेहतर आवास सुविधाएं उपलब्ध कराना और स्थानीय लोगों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर तैयार करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा नागरिकों को होमस्टे योजना से जोड़ना, पर्यटन आधारित स्वरोजगार को बढ़ावा देना और सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को मजबूत करना है।
कार्यशाला में पर्यटन, राजस्व, नगरीय प्रशासन, जिला पुरातत्व एवं संस्कृति परिषद, स्वयंसेवी संस्थाओं और निजी संपत्ति मालिकों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों को मध्यप्रदेश होमस्टे योजना की पूरी जानकारी दी गई। इसमें आवेदन प्रक्रिया, पंजीयन, पात्रता, जरूरी दस्तावेज, आर्थिक लाभ और व्यवसायिक संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि जिन नागरिकों के घरों में अतिरिक्त कमरे उपलब्ध हैं, वे योजना के तहत पंजीयन कर पर्यटन उद्योग से जुड़ सकते हैं और घर बैठे अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित कर सकते हैं।
मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के कौशल प्रकोष्ठ के संचालक डॉ. डी.पी. सिंह ने कहा कि बोर्ड द्वारा संचालित होमस्टे, फार्मस्टे, ग्रामस्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट योजनाएं आम लोगों को पर्यटन उद्योग का हिस्सा बनने का अवसर दे रही हैं। इन योजनाओं के तहत प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और विभिन्न वित्तीय सहायता का लाभ भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे लोग आसानी से अपना पर्यटन आधारित व्यवसाय शुरू कर सकें।
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. अर्पण भारद्वाज ने कहा कि सरकार होमस्टे योजना के माध्यम से नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि उज्जैन एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक शहर है। यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को यदि घर जैसा माहौल और आत्मीय व्यवहार मिलेगा, तो वे दोबारा भी यहां आने के लिए प्रेरित होंगे। इससे होमस्टे संचालकों को स्थायी आय और रोजगार के अवसर मिलेंगे।
कार्यशाला में मेक माय ट्रिप की बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर सुश्री इशिता जोशी ने प्रतिभागियों को डिजिटल माध्यमों से होमस्टे व्यवसाय को बढ़ाने के तरीके बताए। उन्होंने ऑनलाइन बुकिंग, आकर्षक प्रॉपर्टी लिस्टिंग, बेहतर ग्राहक सेवा और पर्यटकों की अपेक्षाओं के अनुरूप आतिथ्य विकसित करने से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
होमस्टे योजना स्थानीय लोगों के लिए अतिरिक्त आय और स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम बन रही है। इस योजना के जरिए घर के खाली कमरों का उपयोग कर नियमित कमाई की जा सकती है। साथ ही स्थानीय संस्कृति, खान-पान, बोली, वेशभूषा और परंपराओं को देश-विदेश के पर्यटकों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है। गृहिणियां, सेवानिवृत्त कर्मचारी, शिक्षक, डॉक्टर, पूर्व सैनिक, अधिकारी और अन्य नागरिक भी इस योजना से जुड़कर सम्मानजनक आय अर्जित कर सकते हैं। इससे स्थानीय रोजगार बढ़ने के साथ पर्यटन क्षेत्र को भी मजबूती मिलती है।
राज्य सरकार ने होमस्टे व्यवसाय को आसान और लाभदायक बनाने के लिए कई सुविधाएं दी हैं।
इन सुविधाओं से होमस्टे शुरू करने की लागत कम होती है और संचालन भी आसान बनता है।
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