भोपाल में रिटायर्ड IAS राकेश अग्रवाल की हत्या के बाद केयरटेकर वरुण कुमार फरार है। CCTV, मोबाइल लोकेशन, गैस और नौकरी के सत्यापन से जुड़े सुरागों पर पुलिस की जांच जारी है।

भोपाल के सूरज नगर में रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या ने जांच की दिशा एक ऐसे केयरटेकर की तरफ मोड़ दी है, जो वारदात से कुछ दिन पहले ही घर में आया था और अब गायब है। पुलिस CCTV, मोबाइल लोकेशन और दूसरे तकनीकी सुरागों को जोड़कर यह पता लगाने में जुटी है कि घटना की रात घर से निकलने के बाद वरुण कुमार आखिर कहां गया।

हत्या के बाद से गायब है वरुण

70 वर्षीय राकेश अग्रवाल अपने सूरज नगर स्थित घर में मृत मिले थे। पुलिस की शुरुआती जांच में 33 वर्षीय केयरटेकर वरुण कुमार का नाम सामने आया। उसे घटना से कुछ ही दिन पहले एजेंसी के जरिए नियुक्त किया गया था। वारदात के बाद से वह लापता है और पुलिस ने उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। हालांकि जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया से पहले उसकी भूमिका को अंतिम रूप से दोष सिद्ध नहीं माना जा सकता।

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CCTV और लोकेशन ने बढ़ाए सवाल

पुलिस के अनुसार CCTV फुटेज में वरुण वारदात के कुछ समय बाद घर से बाहर जाता दिखाई दिया। इसके बाद उसकी गतिविधियों का पता लगाने के लिए आसपास के कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। उसकी आखिरी लोकेशन कुरवाई-बीना रोड से जुड़ी बताई गई है। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस रेलवे स्टेशनों और संभावित रास्तों पर भी सुराग तलाश रही है।

गैस खुली मिली, अलमारियों की भी जांच

घटनास्थल पर अलमारियों के टूटे ताले और सामान बिखरा मिलने की बात सामने आई है। घर में LPG पाइप डिस्कनेक्ट मिलने से पुलिस संभावित आग लगाने के एंगल की भी जांच कर रही है। कुछ रिपोर्टों में चोरी या लूट की आशंका का भी जिक्र है, लेकिन हत्या का स्पष्ट मकसद अभी जांच का विषय है।

नौकरी कैसे मिली, पुलिस कर रही पड़ताल

वरुण को एक केयरटेकर एजेंसी के जरिए नौकरी मिली थी। पुलिस एजेंसी से उसके दस्तावेज, पते और सत्यापन से जुड़ी जानकारी जुटा रही है। रिपोर्टों में उसके पुराने पुलिस सत्यापन की वैधता को लेकर भी सवाल उठे हैं। जांच का एक अहम हिस्सा यह है कि एजेंसी ने उसे नियुक्त करने से पहले पहचान और पृष्ठभूमि की कितनी जांच की थी।

अब सबसे बड़ा सवाल- कहां है वरुण?

फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल वरुण कुमार का पता लगाना है। अलग-अलग CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों को जोड़कर उसकी संभावित गतिविधियों का पता लगाया जा रहा है। साथ ही पुलिस घटनास्थल के फॉरेंसिक सबूतों और घर में मौजूद लोगों के बयानों के आधार पर पूरी घटना की कड़ी जोड़ रही है।

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