
भोपाल। किसानों को खेती के लिए सुविधाएं बढ़ाने और उनकी आय के नए रास्ते खोलने पर मध्यप्रदेश सरकार लगातार जोर दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 सितंबर को श्योपुर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को ग्वालियर एयरपोर्ट से वर्चुअली संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से संवाद भी किया और कहा कि अब किसानों को सिंचाई के लिए दिन में भी बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिन में बिजली मिलने से किसान अपनी फसलों की सिंचाई सुविधानुसार कर सकेंगे। उन्होंने श्योपुर कृषि उपज मंडी में किसानों के लिए नए विश्राम गृह के निर्माण की घोषणा भी की। इसके लिए 60 लाख रुपये की राशि देने की बात कही गई।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसके तहत किसानों के हित से जुड़े कई कार्यक्रम और योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण की सुविधा मिल रही है। पहले खरीफ और रबी फसलों के लिए ऋण चुकाने की अवधि छह-छह महीने तय थी। अब इसे बढ़ाकर एक वर्ष कर दिया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार किसान जिस तारीख को ऋण लेंगे, उसके एक साल के भीतर उसे चुका सकेंगे। इससे किसानों को कर्ज चुकाने के लिए ज्यादा समय मिलेगा और उन पर तत्काल भुगतान का दबाव कम होगा।
मुख्यमंत्री ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के साथ पशुपालन को भी बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अधिक संख्या में दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जाना चाहिए और दूध उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। उन्होंने श्योपुर के कृषि उत्पादन का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक जिले में धान और गेहूं का अच्छा उत्पादन होता है। इसके साथ ही यहां के किसान मोटे अनाज की खेती भी कर रहे हैं। कृषि की इन विविध गतिविधियों को बढ़ावा देकर किसानों की आमदनी के नए स्रोत तैयार किए जा सकते हैं।
बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने 12वीं कक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने बताया कि एक दिन पहले ही ऐसे विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपये की राशि दी गई है। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील की। साथ ही उन्होंने सामाजिक आयोजनों में अनावश्यक खर्च से बचने की बात कही।
उन्होंने कहा कि परिवारों को बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए और फिजूलखर्ची पर रोक लगानी चाहिए। शादी-विवाह जैसे आयोजनों में अधिक खर्च करने के बजाय सामूहिक विवाह सम्मेलनों के माध्यम से विवाह संपन्न कराने की परंपरा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं भी दीं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों से सीधा संवाद किया। ग्राम राडेप के किसान मुकुट चौधरी ने कृषि विभाग की योजनाओं से मिले लाभ की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कृषि अभियांत्रिकी योजना के माध्यम से उन्हें पराली प्रबंधन के लिए कृषि यंत्र सब्सिडी पर मिले हैं। उन्होंने पराली प्रबंधन के लिए सुपर सीडर खरीदा, जिस पर उन्हें 1 लाख 20 हजार रुपये का अनुदान मिला। बलराम कृषि महोत्सव और किसान मेले में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खेती की नई तकनीकों, फसल प्रबंधन और कृषि से जुड़ी उपयोगी जानकारियां दीं। किसानों को बदलती तकनीक के साथ खेती को अधिक लाभकारी बनाने के तरीकों के बारे में भी बताया गया।
बलराम कृषि महोत्सव एवं किसान मेले में किसानों के लिए अलग-अलग विभागों की प्रदर्शनियां भी लगाई गईं। इनमें पशुपालन, कृषि, उद्यानिकी, मत्स्यपालन और एनआरएलएम से संबंधित स्टॉल शामिल रहे। इन प्रदर्शनियों के जरिए किसानों और ग्रामीणों को विभागीय योजनाओं, तकनीक और आय बढ़ाने वाली गतिविधियों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में खेती के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले किसानों को भी सम्मानित किया गया। प्रगतिशील किसानों नरेन्द्र चौधरी, भरत जाट, शिशुपाल मीणा, सोनू शर्मा, बनवारी मीणा, भुवनेश मीणा, पूरण प्रजापति, गोविंद पटेलिया और मान सिंह पटेलिया को शॉल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इसके साथ ही 12वीं कक्षा में उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम हासिल करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को भी मंच से सम्मान मिला। सम्मानित विद्यार्थियों में अंकुश मेहर, भूमिका माहौर, आशा गुर्जर, अनमोल मीणा, अभय गुर्जर, पूनम जाट, वैष्णवी जाट, दीनबंधु मीणा, करण मीणा और मयंक शर्मा शामिल रहे।
बलराम कृषि महोत्सव के जरिए एक तरफ किसानों को सरकारी योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीक की जानकारी दी गई, वहीं दूसरी ओर बेहतर खेती करने वाले किसानों और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर प्रोत्साहित किया गया।
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