सिंहस्थ 2028: माँ शिप्रा के पावन जल से होगा स्नान, उज्जैन में तैयार हो रहा ऐतिहासिक आयोजन

Published : May 26, 2026, 10:44 PM IST
Simhastha 2028 Devotees to Take Holy Dip in Flowing Shipra River Water Says CM Mohan Yadav

सार

Simhastha 2028: सिंहस्थ 2028 को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिप्रा नदी के बारे में क्या बड़ा ऐलान किया? सिंहस्थ 2016 और सिंहस्थ 2028 के आयोजन में सबसे बड़ा अंतर क्या होगा? उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए सरकार किन बड़े विकास कार्यों पर काम कर रही है?

मध्यप्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाले सिंहस्थ को लेकर तैयारियां अब तेज होती नजर आ रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में आयोजित शिप्रा तीर्थ परिक्रमा के समापन समारोह में बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि सिंहस्थ 2028 में श्रद्धालुओं को माँ शिप्रा के स्वच्छ और प्रवाहमान जल से स्नान का पुण्य लाभ मिलेगा। लगभग छह दशक बाद ऐसा अवसर आएगा, जब लाखों श्रद्धालु सीधे शिप्रा नदी के प्राकृतिक प्रवाह में आस्था की डुबकी लगा सकेंगे।

उज्जैन की आध्यात्मिक धरती पर आयोजित यह समारोह धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और विकास योजनाओं का अनूठा संगम बन गया। दीपों से सजे घाटों और भक्ति संगीत के बीच मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ 2028 को “ऐतिहासिक और यादगार” बनाने का भरोसा दिलाया।

30 किलोमीटर लंबे घाटों पर होगा पुण्य स्नान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए शिप्रा नदी के किनारे 30 किलोमीटर से अधिक लंबे घाट विकसित किए जा रहे हैं। इन घाटों पर श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालु सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से स्नान कर सकें। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ 2016 में श्रद्धालुओं को माँ नर्मदा के जल से स्नान की सुविधा दी गई थी, लेकिन लोगों की इच्छा थी कि शिप्रा का अपना प्रवाहमान जल उपलब्ध हो। अब राज्य सरकार उसी दिशा में काम कर रही है ताकि आस्था और परंपरा दोनों का सम्मान बना रहे।

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“बाबा महाकाल के आशीर्वाद से बनेगा नया कीर्तिमान”

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा महाकाल और संत समाज के आशीर्वाद से सिंहस्थ 2028 के आयोजन में नए कीर्तिमान स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आयोजन को विश्वस्तरीय बनाने के लिए आधारभूत ढांचे, घाटों, सड़क, जल और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर लगातार काम चल रहा है। उन्होंने शिप्रा तीर्थ परिक्रमा के दौरान दिखाई दी दीपमालिकाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पूरा वातावरण दीप पर्व जैसा प्रतीत हो रहा था। मुख्यमंत्री ने इसे आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम बताया।

विकास के साथ विरासत संरक्षण पर जोर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में विकास के साथ-साथ विरासत संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी सांस्कृतिक समरसता और मेलजोल की परंपरा से है। उन्होंने अयोध्या राम मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायालय के फैसले के बाद समाज ने जिस तरह सहयोग और सद्भाव का परिचय दिया, वह भारत की लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक शक्ति को दर्शाता है।

भोजशाला और राजा भोज का भी किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राजा भोज और उज्जैन-भोपाल के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि धार स्थित भोजशाला में मां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापना का मार्ग अब न्यायालय के फैसले के बाद साफ हो गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर भारत की सांस्कृतिक विरासत के पुनर्जागरण का समय है, जहां प्राचीन पहचान को आधुनिक विकास से जोड़ा जा रहा है।

जल गंगा संवर्धन अभियान से मजबूत होगी जल संरचना

मुख्यमंत्री ने बताया मध्यप्रदेश सरकार जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रदेशभर में कुओं, तालाबों, नदियों और जलाशयों के संरक्षण पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के इस अभियान में आम जनता की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है। सरकार की कोशिश है कि नदियों का प्राकृतिक प्रवाह बना रहे और धार्मिक आयोजनों के दौरान पर्यावरण संतुलन भी कायम रखा जा सके।

मैथिली ठाकुर की प्रस्तुति ने बांधा समां

समारोह में बिहार की प्रसिद्ध लोकगायिका और विधानसभा सदस्य मैथिली ठाकुर ने अपनी भजन प्रस्तुति से माहौल को भक्तिमय बना दिया। उनकी सुरीली आवाज और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को देर तक मंत्रमुग्ध रखा। मुख्यमंत्री ने मंच पर उनका स्वागत करते हुए मध्यप्रदेश आगमन पर शुभकामनाएं भी दीं।

सिंहस्थ 2028 क्यों रहेगा खास?

विशेषज्ञों का मानना है कि सिंहस्थ 2028 सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि यह मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पर्यटन क्षमता को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का बड़ा अवसर भी बनेगा। शिप्रा नदी के स्वच्छ और प्रवाहमान जल के साथ होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए एक अलग अनुभव साबित हो सकता है।

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