Varanasi Vikramotsav 2026: वाराणसी में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य, जानें कार्यक्रम की पूरी खासियत

Published : Apr 02, 2026, 12:13 PM IST
Varanasi Vikramotsav 2026

सार

विक्रमोत्सव 2026 के तहत वाराणसी में 3 से 5 अप्रैल तक सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का आयोजन होगा। इसमें सैकड़ों कलाकार, पारंपरिक कला, युद्ध दृश्य, भस्म आरती और एमपी टूरिज्म पवेलियन के जरिए मध्य प्रदेश की संस्कृति और व्यंजनों का भव्य प्रदर्शन किया जाएगा।

विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत उज्जैन के महान सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन, न्यायप्रियता और गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुँचाने के लिए 3 से 5 अप्रैल तक वाराणसी में एक भव्य महानाट्य का मंचन किया जाएगा। इस विशेष आयोजन का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गरिमामयी उपस्थिति में होगा।

सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य: सांस्कृतिक विरासत का जीवंत मंचन

सम्राट विक्रमादित्य शोध संस्थान के माध्यम से बी.एल.डब्ल्यू. मैदान में आयोजित होने वाले इस भव्य महानाट्य में सैकड़ों कलाकार हिस्सा लेंगे। इस दौरान हाथी, घोड़े और ऊंटों के साथ प्राचीन भारतीय परंपराओं और कलाओं का शानदार प्रदर्शन किया जाएगा। यह आयोजन भारतीय संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की परिकल्पना से तैयार विशेष प्रस्तुति

यह महानाट्य मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की परिकल्पना पर आधारित है। इसे पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित ने लिखा है, जबकि इसका निर्माण राजेश कुशवाहा ने किया है और निर्देशन संजीव मालवी ने किया है। इस प्रस्तुति में 200 से अधिक कलाकार भाग लेंगे और इसमें हाथी, घोड़े, रथ, पालकियां, भव्य युद्ध दृश्य, लाइट शो, आतिशबाजी, नृत्य और बाबा महाकाल की भस्म आरती की झलकियां देखने को मिलेंगी। इसमें सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से लेकर उनके राजतिलक तक की कहानी, विक्रम-बेताल की कथाएं और सनातन धर्म के उत्थान की गाथा प्रस्तुत की जाएगी।

एमपी टूरिज्म पवेलियन: मध्य प्रदेश की संस्कृति और पर्यटन का प्रदर्शन

इस आयोजन के दौरान एमपी टूरिज्म पवेलियन भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगा। यहाँ मध्य प्रदेश की पारंपरिक कला, शिल्प, सांस्कृतिक विरासत और प्रमुख पर्यटन स्थलों को आकर्षक तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा। सचिव, मुख्यमंत्री एवं पर्यटन डॉ. इलैयराजा टी. के अनुसार, यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि सम्राट विक्रमादित्य की विरासत को लोगों तक पहुँचाने का एक प्रभावी माध्यम है।

पारंपरिक कला और जनजातीय पेंटिंग्स की झलक

एमपी टूरिज्म पवेलियन में प्रदेश की विविध कला और कारीगरी को प्रदर्शित किया जाएगा। यहाँ खजूर की पत्तियों से बनी टेराकोटा कलाकृतियां आकर्षण का केंद्र होंगी। साथ ही बुंदेली, गोंड और भील पेंटिंग्स के माध्यम से जनजातीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिलेगी।

मध्य प्रदेश के पारंपरिक व्यंजन बनेंगे खास आकर्षण

इस आयोजन में फूड कोर्ट भी खास रहेगा, जहाँ मध्य प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया जा सकेगा। यहाँ इंदौर के प्रसिद्ध पोहा-जलेबी, मक्के का कीस, मालवा की कचौरी, डिंडौरी का उड़द दाल और कोदो भात, कुटकी की गुड़ वाली खीर, बघेलखंडी निमोना-पुड़ी, बेड़ई पुड़ी और हींग वाले आलू जैसे व्यंजन उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही बुंदेलखंडी सन्नाटा छाछ, लेमन पुदीना, आम पना, सब्जा शिकंजी, गुलाब मलाई लस्सी और मावा बाटी जैसे पेय और मिष्ठान भी लोगों को आकर्षित करेंगे।

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