
भोपाल। विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान का शुभारंभ किया। राजधानी भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और सर्कुलर इकॉनॉमी से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों का लोकार्पण एवं विमोचन किया।
इस अवसर पर उन्होंने सर्कुलर इकॉनॉमी से संबंधित पांच कोर्स मॉड्यूल्स का शुभारंभ किया। साथ ही एप्को और इन्टैक द्वारा संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रदेश के 16 जिलों में स्थित 500 बावड़ियों के दस्तावेजों का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और सर्कुलर इकॉनॉमी के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका मुख्यमंत्री ने अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में #विश्व_पर्यावरण_दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित 'पर्यावरण पुरस्कार वितरण समारोह' का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
इस अवसर पर वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री श्री @bjpdilipahirwar उपस्थित रहे।@DrMohanYadav51… pic.twitter.com/hjVVfu1zjp— Jansampark MP (@JansamparkMP) June 5, 2026
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आठ अलग-अलग श्रेणियों में कुल 11 राज्य स्तरीय पर्यावरण पुरस्कार प्रदान किए। वर्ष 2024-25 के लिए दिए गए ये सम्मान उन औद्योगिक इकाइयों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और व्यक्तियों को दिए गए जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और सतत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित 'पर्यावरण पुरस्कार वितरण समारोह'https://t.co/z2oDubCV71
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मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के लिए यह गौरव का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सफल 12 वर्ष पूरे कर 13वें वर्ष में प्रवेश किया है। उन्होंने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों के पीछे प्रधानमंत्री मोदी का दूरदर्शी विजन है। सीएम ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति का आधार ही प्रकृति और पर्यावरण के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीना रहा है। आज पूरी दुनिया पर्यावरण संरक्षण के लिए भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रही है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन पंचतत्वों से निर्मित है और हमारे धार्मिक ग्रंथों में पर्यावरण संरक्षण का विस्तृत वर्णन मिलता है। उन्होंने ‘यत् पिंडे तत् ब्रह्मांडे’ का उल्लेख करते हुए कहा कि मानव और प्रकृति एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय परंपराओं में प्रकृति का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारी पूजा-पद्धति और धार्मिक अनुष्ठान प्रकृति के बिना पूर्ण नहीं माने जाते। संध्यावंदन से लेकर सूर्य को अर्घ्य देने तक, हर प्रक्रिया प्रकृति से जुड़ी हुई है। भगवान को अर्पित किया जाने वाला भोग भी तुलसी के बिना अधूरा माना जाता है।
उन्होंने प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने वैज्ञानिक रूप से सिद्ध किया था कि पौधों में भी जीवन होता है। हालांकि भारत की संस्कृति में यह बात सदियों से स्वीकार की जाती रही है। उन्होंने कहा कि गांवों में आज भी लोगों को यह ज्ञान है कि पौधों में संवेदनाएं होती हैं और इसलिए रात के समय पौधों की पत्तियां तोड़ने से बचा जाता है।
सीएम ने कहा कि भारतीय परंपरा में एक वृक्ष को दस पुत्रों के समान माना गया है। इसी भावना के साथ प्रदेश सरकार जल गंगा संवर्धन अभियान के माध्यम से नदियों, कुओं, बावड़ियों और तालाबों के संरक्षण का कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्रियों में शामिल होने जा रहे हैं। उनके नेतृत्व में प्रधानमंत्री पद की गरिमा और बढ़ी है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने 24 दलों के गठबंधन के साथ सफल सरकार चलाई और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी ऐतिहासिक योजनाएं देश को दीं।
सीएम ने कहा कि आज भारत वैश्विक स्तर पर अधिक मजबूत और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में उभरा है। देश आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई कर रहा है। अंतरिक्ष, विज्ञान, तकनीक और खेल के क्षेत्र में भारतीय प्रतिभाएं विश्व मंच पर अपनी अलग पहचान बना रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी लगातार खिलाड़ियों और वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन करते रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में अल नीनो और पश्चिम एशिया की परिस्थितियों के कारण पूरी दुनिया ऊर्जा संकट का सामना कर रही है। इसके बावजूद भारत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ऊर्जा क्षेत्र में मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी को पर्यावरण और मानव जीवन के लिए सबसे विनाशकारी घटनाओं में से एक बताया। सीएम ने कहा कि गैस रिसाव के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उस समय पर्याप्त जवाबदेही तय नहीं की गई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर में मौजूद कचरे का लगभग 40 वर्ष बाद सफलतापूर्वक निष्पादन कर एक बड़ा कदम उठाया है। अब सरकार उस भूमि के बेहतर और सुरक्षित उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोमास और जल विद्युत परियोजनाओं सहित 62 मेगावाट क्षमता की हरित ऊर्जा परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि खजुराहो सहित कई क्षेत्रों में बड़े ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण के लिए भी गंभीरता से कार्य कर रही है। प्रदेश में चीतों का पुनर्वास किया गया है और असम से जंगली भैंसों को भी लाया गया है।
सीएम ने कहा कि मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति के साथ सहअस्तित्व का उत्कृष्ट उदाहरण बन रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कालिया नाग मर्दन की कथा भी यह संदेश देती है कि अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी और सूर्य जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर सभी का समान अधिकार है।
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