जयपुर में 9th क्लास के बच्चे के सुसाइड से हर कोई रोया, मासूम ने कैमरे के सामने लगाया मौत को गले

Published : Jul 21, 2025, 11:15 AM ISTUpdated : Jul 21, 2025, 12:19 PM IST
Jaipur News shocking crime

सार

Jaipur shocking News : जयपुर में 9वीं कक्षा के छात्र की आत्महत्या ने शहर के हर शख्स को चौंका दिया। मासूम को जब अपने दोस्तों के इरादों का पता चला तो वह मरने के लिए बेबस हो गया। स्कूल से लौटा और ड्रेस उतारे बिना ही किचन में पहुंचकर जहर पी लिया।

Rajasthan News : जयपुर में एक 14 वर्षीय छात्र की आत्महत्या ने न सिर्फ उसके परिवार, बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले एश्वर्य सिंह ने अपने ही दोस्तों की ब्लैकमेलिंग और पैसों की डिमांड से परेशान होकर जहर पी लिया। सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि घटना परिवार वालों के सामने घटी, लेकिन जब पता चला तो तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

मासूम ने कैमरे के सामने आकर लगाया मौत को गले

पिता मानवीर सिंह ने बताया कि 3 जुलाई को एश्वर्य स्कूल से लौटा लेकिन स्कूल ड्रेस उतारे बिना ही सीधा रसोई में गया। CCTV फुटेज में वह कई बार जहरीली शीशी खोलते हुए दिखा। पहले तो उसने खुद को रोका, लेकिन अंत में हार मानते हुए ज़हर पी लिया। घर वालों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन 6 जुलाई को उसने दम तोड़ दिया।

मौत की वजह इंस्टाग्राम और वॉट्सएप चैट के वीडियो

घटना के बाद मोबाइल चेक करने पर खुलासा हुआ कि इंस्टाग्राम और वॉट्सएप पर उसके दोस्त उसे कुछ वीडियो और चैट के जरिए ब्लैकमेल कर रहे थे। राजीनामा के बदले 2 लाख रुपये की मांग की जा रही थी। इससे पहले 26 जून को पैसों को लेकर उसका अपने दोस्तों से झगड़ा भी हुआ था। मोबाइल चैट और वीडियो के आधार पर अब परिवार के लोग पुलिस कार्रवाई कर रहे हैं।

सोशल मीडिया मासूमों के लिए कितना खतरनाक?

यह सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि एक गहरी सामाजिक बीमारी का संकेत है। बच्चों में मोबाइल, सोशल मीडिया और नशे का बढ़ता प्रभाव अब उनके मानसिक स्वास्थ्य और जीवन दोनों को निगल रहा है। एश्वर्य के मामले में भी आरोपी किशोर उसे नशे की लत में धकेलते और फिर उसी आधार पर ब्लैकमेल करते थे।

बच्चों पर आप ऐसे रखें नजर

  • बच्चों के व्यवहार में बदलाव नजरअंदाज न करें। उदासी, डर, अकेलापन संकेत हो सकते हैं कि वह किसी दबाव में हैं।
  • मोबाइल और सोशल मीडिया की एक्टिविटी पर नज़र रखें। स्क्रीन के पीछे कई बार ऐसी दुनिया होती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है।
  • दोस्तों की संगत पर नियमित बात करें। जरूरी नहीं कि हर दोस्त हमदर्द हो।
  • स्कूल प्रशासन और पुलिस को समय पर सूचना देना जरूरी है। एश्वर्य चला गया, लेकिन अब समय है जागने का।
  •  ज़रा सी सतर्कता कई ज़िंदगियां बचा सकती है। सोशल मीडिया, नशे और ब्लैकमेलिंग का यह घातक जाल अब स्कूलों और घरों तक पहुंच चुका है, इससे पहले कि अगला बच्चा इसकी चपेट में आए, चेतना जरूरी है।

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