CM योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा में संस्कारों का महत्व बताया, 'विकसित भारत' का दिया मंत्र

Published : May 10, 2025, 08:47 PM IST
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सार

सीएम योगी ने शिक्षा को नैतिक मूल्यों और राष्ट्रभक्ति से जोड़ने पर ज़ोर दिया। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को 'विकसित भारत' के निर्माण में महत्वपूर्ण बताया और छात्रों में देशभक्ति की भावना जगाने का आह्वान किया।

लखनऊ, 10 मई: शिक्षा केवल अच्छे अंकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे नैतिक मूल्यों, संस्कारों और राष्ट्र प्रथम की भावना से जोड़ना चाहिए। हम अक्सर शिक्षा को अंकों तक सीमित कर देते हैं, लेकिन शिक्षा का उद्देश्य जीवन निर्माण है। एक ऐसा जीवन जो देश के लिए उपयोगी हो, समाज के लिए प्रेरणा हो। जब हम शिक्षा को संस्कारों और राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ते हैं, तभी विकसित भारत की नींव रखी जा सकती है। विकसित भारत वह होगा, जहां हर नागरिक सुरक्षित-समृद्ध और आत्मनिर्भर हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘विकसित भारत’ का जो संकल्प देशवासियों को दिया है, उसमें शिक्षा और शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। शिक्षक ऐसी पीढ़ी को गढ़ने का कार्य कर रहे हैं, जो आने वाले समय में न केवल अकादमिक रूप से उत्कृष्ट होंगी, बल्कि नैतिक दृष्टिकोण से भी मजबूत होंगी। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को सिटी मॉन्टेसरी स्कूल में आयोजित शिक्षक धन्यवाद समारोह में कहीं। इससे पहले सीएम योगी ने आईसीएससीई बोर्ड के 10वीं-12 वीं के टॉपर्स, जेईई मेन टॉपर स्टूडेंट्स को सम्मानित किया। सीएम ने शिक्षकों को भी सम्मानित किया।

पीएम मोदी के नेशन फर्स्ट के सिद्धांत के साथ हमें हर क्षेत्र में कार्य करना चाहिये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 70 वर्ष पूर्व डॉ. जगदीश गांधी और डॉक्टर भारती गांधी ने सीमित संसाधनों के बावजूद महान उद्देश्य को लेकर इस संस्थान की नींव रखी। जब वे लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र थे, तब न तो उनके पास कोई संसाधन था, न ही कोई विशेष व्यवस्था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और राजधानी लखनऊ में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का सपना देखा। आज उसी सपने के परिणामस्वरूप सीएमएस में हजारों छात्र अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर छात्र को मेरिट सूची में स्थान नहीं मिल सकता, लेकिन शिक्षा के विभिन्न क्षेत्र खेल, कला और सेवा में अपनी पहचान बना सकते हैं। सीएम योगी ने देश की वैदिक परंपराओं की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमारा वैदिक उद्घोष माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या: रहा है। यह वही भावना है, जिसे डॉ. गांधी ने 'जय जगत' के रूप में प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी भावना को ‘नेशन फर्स्ट’ के सिद्धांत में दोहरा रहे हैं। हमें भी इसी सिद्धांत के साथ जीवन के हर क्षेत्र में कार्य करना चाहिए।

शिक्षक छात्रों को केवल ज्ञान न दें, बल्कि उनमें देशभक्ति और नैतिकता भी रोपें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातों का उल्लेख करते हुए कहा कि हम सभी के लिए नेशन फर्स्ट ही पहला मंत्र होना चाहिए। ये काम सिर्फ देश के नेतृत्व, सेना के जवानों और प्रशासनिक अफसर का ही नहीं है, बल्कि शिक्षकों के लिए भी होना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब युवाओं के भीतर राष्ट्र के प्रति श्रद्धा का अभाव होता है, तभी देशविरोधी विचार पनपते हैं इसलिए शिक्षकों का उत्तरदायित्व बनता है कि वह न केवल ज्ञान दें, बल्कि छात्रों में देशभक्ति और नैतिकता भी रोपें। सीएम ने शिक्षकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्थान हर राष्ट्रीय आयोजन (चाहे वह स्वतंत्रता दिवस हो या गणतंत्र दिवस) में अग्रणी भूमिका निभाता है। सीएमएस के बच्चे जब विधान भवन के सामने झांकियों में भाग लेते हैं, तब उनके पीछे डॉक्टर भारती गांधी का उत्साह देखने को मिलता है। इस उम्र में भी वे जिस समर्पण और ऊर्जा से कार्य कर रही हैं, वह अनुकरणीय है। मुख्यमंत्री ने छात्रों द्वारा प्रस्तुत ‘आदि योगी’ नाट्य मंचन की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां बच्चों को इतिहास, परंपरा और मूल्यों से जोड़ती हैं। उन्होंने इस मंचन को महाकुंभ की ओर बढ़ते भारत के सांस्कृतिक स्वरूप से जोड़ते हुए कहा कि हमारी पौराणिक कथाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन के मूल्य सिखाने का माध्यम है। आज की पीढ़ी को अपने अतीत से जोड़ने के लिए ऐसे प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं।

कार्यक्रम में सीएमएस की संस्थापिका डॉक्टर भारती गांधी, सीएमएस की प्रबंधक प्रो. गीता गांधी, सीएमएस की प्रेसिडेंट डाॅ. रोजर किंगडम, कोषाध्यक्ष विनय गांधी, पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल आदि मौजूद रहे।

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