
लखनऊ। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार किसानों के हित में फैसले ले रही है। सरकार बनने के बाद पहले ही निर्णय में किसानों के 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज माफ किए गए थे। इसके साथ ही किसानों को समय पर गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित करने के लिए भी लगातार काम किया जा रहा है।
योगी सरकार की पारदर्शी और तकनीक आधारित व्यवस्था के कारण वर्ष 2017 से अब तक गन्ना किसानों को कुल 3,21,963 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड भुगतान किया जा चुका है। यह भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजा गया, जिससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो गई। प्रदेश में गन्ना और चीनी उद्योग अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ बन चुका है। सरकार किसानों की आय बढ़ाने, युवाओं को रोजगार देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
गन्ना किसानों को समय पर भुगतान कराने में योगी सरकार की नीति पिछली सरकारों की तुलना में काफी प्रभावी रही है। वर्ष 2007 से 2012 के बीच किसानों को 52,131 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था, जबकि 2012 से 2017 के बीच यह राशि 95,215 करोड़ रुपये रही।
वहीं योगी सरकार ने अपने 9 वर्षों के कार्यकाल में किसानों को रिकॉर्ड 3,21,963 करोड़ रुपये का भुगतान कर नया इतिहास बनाया है। सरकार की ‘स्मार्ट गन्ना किसान’ योजना के जरिए गन्ना क्षेत्रफल, सट्टा, कैलेंडरिंग और पर्ची जारी करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। अब किसानों को गन्ना पर्ची सीधे मोबाइल पर मिलती है और डीबीटी के माध्यम से भुगतान सीधे बैंक खाते में पहुंचता है।
योगी सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति कुंतल की बढ़ोतरी की है। नई दरों के अनुसार अगेती प्रजाति के गन्ने का मूल्य 400 रुपये प्रति कुंतल और सामान्य प्रजाति का मूल्य 390 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया है। इस फैसले से किसानों को लगभग 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान मिला है। योगी सरकार के कार्यकाल में यह चौथी बार है जब गन्ना मूल्य बढ़ाया गया है। समय से भुगतान और मूल्य वृद्धि का लाभ प्रदेश के लगभग 48 लाख गन्ना किसान परिवारों को मिला है। सरकार का मानना है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने में गन्ना विकास विभाग की बड़ी भूमिका होगी।
उत्तर प्रदेश में गन्ना खेती का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 29.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती की गई। योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी गन्ना उत्पादक राज्य बन चुका है। प्रदेश में कुल 121 चीनी मिलें संचालित हैं। इनमें उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम की 3, सहकारी चीनी मिल संघ की 23 और निजी क्षेत्र की 95 चीनी मिलें शामिल हैं।
इन मिलों द्वारा 877.93 लाख टन गन्ने की पेराई कर 89.68 लाख टन चीनी का उत्पादन किया गया। पिछले पेराई सत्र में उत्तर प्रदेश का औसत चीनी परता 10.21 प्रतिशत रहा, जबकि महाराष्ट्र का चीनी परता 9.49 प्रतिशत दर्ज किया गया।
प्रदेश में बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने, नई मिलों की स्थापना और मिलों की क्षमता बढ़ाने का काम तेजी से किया गया है। चीनी मिलों की पेराई क्षमता में 1,28,500 टीसीडी की वृद्धि की गई है। मिलों के आधुनिकीकरण और औद्योगिक विकास के कारण प्रदेश में 10 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। पिछले 9 वर्षों में लगभग 6924 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश भी किया गया है। एथेनॉल उत्पादन के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सरकार के प्रयासों से राज्य में एथेनॉल उत्पादन बढ़कर 188 करोड़ लीटर तक पहुंच गया है।
गन्ना आयुक्त Minsty S. ने बताया कि किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया है। ई-गन्ना ऐप, ऑनलाइन सर्वे, पारदर्शी पर्ची वितरण और शिकायत निवारण प्रणाली जैसी सुविधाओं से किसानों को बड़ी राहत मिली है। अब लाखों किसान मोबाइल के जरिए घर बैठे गन्ने से जुड़ी सभी जानकारियां प्राप्त कर रहे हैं।
गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यालय स्तर पर टोल फ्री कॉल सेंटर नंबर 1800-121-3203 शुरू किया गया है। यह हेल्पलाइन 24 घंटे सक्रिय रहती है ताकि किसानों की शिकायतों का तुरंत समाधान किया जा सके।
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